छत्तीसगढ़

एकीकृत मछली-सह-मुर्गी पालन से दोगुनी कमाई, सरकारी योजनाओं का उठाया लाभ

Shantanu Roy
24 March 2026 8:42 PM IST
एकीकृत मछली-सह-मुर्गी पालन से दोगुनी कमाई, सरकारी योजनाओं का उठाया लाभ
x
छग
Raipur. रायपुर। छत्तीसगढ़ के ग्रामीण क्षेत्रों में खेती को लाभकारी बनाने के लिए किसान अब पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़कर आधुनिक और बहुआयामी मॉडल अपना रहे हैं। इसी कड़ी में जशपुर जिले के ग्राम रतबा के युवा किसान अंकित लकड़ा ने एक अनोखा प्रयोग कर खेती को नई दिशा दी है। उन्होंने तालाब के ऊपर मुर्गी पालन कर न केवल उत्पादन बढ़ाया, बल्कि आय के नए स्रोत भी तैयार किए हैं। अंकित लकड़ा पहले केवल बरसात के मौसम में धान की खेती करते थे, जिससे सीमित आय होती थी। लेकिन समय के साथ उन्होंने खेती में बदलाव का निर्णय लिया और मत्स्य पालन विभाग से जानकारी लेकर अपने खेत में तालाब का निर्माण कराया। इसके बाद उन्होंने तालाब के ऊपर शेड बनाकर मुर्गी पालन शुरू किया और नीचे मछली पालन को जोड़ा।

यह मॉडल “एकीकृत मछली-सह-मुर्गी पालन” के रूप में जाना जाता है। इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि मुर्गियों का अपशिष्ट सीधे तालाब में गिरता है, जो मछलियों के लिए प्राकृतिक आहार का काम करता है। इससे मछलियों के लिए अलग से चारा खरीदने की जरूरत कम हो जाती है, जिससे लागत घटती है और मुनाफा बढ़ता है। अंकित के अनुसार, उन्होंने दो तालाबों के ऊपर शेड बनाए हैं, जिनमें 1000 से 1200 मुर्गियां पाली जाती हैं। तालाब के आसपास उन्होंने आम और लीची के पौधे भी लगाए हैं, जिससे बागवानी के जरिए अतिरिक्त आय हो रही है। इसके साथ ही ये पेड़ तालाब की मेड़ को मजबूत बनाए रखते हैं और मिट्टी के कटाव को रोकते हैं। गर्मी के मौसम में तालाब का पानी इन पेड़ों की सिंचाई के काम आता है, जिससे सालभर उत्पादन संभव हो पाता है।

अंकित लकड़ा ने बताया कि उन्हें प्रधानमंत्री मत्स्य योजना के तहत करीब 8 लाख रुपये का अनुदान मिला, जिसमें पॉन्ड लाइनर, मोटर, फीड और अन्य सामग्री शामिल है। सरकारी योजनाओं का सही उपयोग कर उन्होंने अपनी खेती को आत्मनिर्भर और लाभकारी बना लिया है। इसी मॉडल को अपनाने वाले अन्य किसान भी इसे फायदेमंद मान रहे हैं। मछली पालक नंदकिशोर पटेल का कहना है कि शुरुआत में थोड़ी लागत जरूर लगती है, लेकिन एक बार व्यवस्था तैयार हो जाने के बाद हर महीने स्थिर आय मिलने लगती है। इस तरह का एकीकृत मॉडल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभा सकता है। इससे किसानों की आय बढ़ने के साथ-साथ संसाधनों का बेहतर उपयोग भी संभव होता है। अंकित लकड़ा की सफलता कहानी यह दर्शाती है कि यदि किसान नई सोच और आधुनिक तकनीकों को अपनाएं, तो खेती को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाया जा सकता है। ऐसे नवाचार अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन रहे हैं।
Tagsजशपुर किसानएकीकृत खेतीमुर्गी पालनमछली पालनतालाब मॉडलग्रामीण आयप्रधानमंत्री मत्स्य योजनाखेती में नवाचारछत्तीसगढ़ कृषिबहुआयामी खेतीपोल्ट्री फार्मिंगफिश फार्मिंगकृषि सफलता कहानीकिसान इनकमआधुनिक खेतीग्रामीण विकासआत्मनिर्भर किसानखेती से मुनाफाकृषि तकनीकबागवानीतालाब उपयोगपशुपालनमत्स्य पालनछत्तीसगढ़ किसान मॉडलJashpur farmerintegrated farmingpoultry farmingfish farmingpond modelrural incomePrime Minister Matsya Yojanainnovation in farmingChhattisgarh agriculturemulti-faceted farmingagriculture success storyfarmer incomemodern farmingrural developmentself-reliant farmerprofit from farmingagricultural technologyhorticulturepond useanimal husbandryfisheriesChhattisgarh farmer modelछत्तीसगढ़ न्यूज हिंदीछत्तीसगढ़ न्यूजछत्तीसगढ़ की खबरछत्तीसगढ़ लेटेस्ट न्यूजछत्तीसगढ़ न्यूज अपडेटछत्तीसगढ़ हिंदी न्यूज टुडेछत्तीसगढ़ हिंदीन्यूज हिंदी न्यूज छत्तीसगढ़छत्तीसगढ़ हिंदी खबरछत्तीसगढ़ समाचार लाइवChhattisgarh News HindiChhattisgarh NewsNews of ChhattisgarhChhattisgarh Latest NewsChhattisgarh News UpdateChhattisgarh Hindi News TodayChhattisgarh HindiNews Hindi News ChhattisgarhChhattisgarh Hindi NewsChhattisgarh News Liveजनता से रिश्ता न्यूज़जनता से रिश्ताआज की ताजा न्यूज़हिंन्दी न्यूज़भारत न्यूज़खबरों का सिलसिलाआज की ब्रेंकिग न्यूज़आज की बड़ी खबरमिड डे अख़बारहिंन्दी समाचारजनताJanta Se Rishta NewsJanta Se RishtaToday's Latest NewsHindi NewsIndia NewsKhabron Ka SilsilaToday's Breaking NewsToday's Big NewsMid Day Newspaperjantasamachar newssamacharHindi news
Next Story