छत्तीसगढ़
छत्तीसगढ़ की जेलों में बंदियों को मिलेगा निशुल्क कौशल प्रशिक्षण
Shantanu Roy
17 Aug 2026 7:21 PM IST

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छग
Raipur. रायपुर। छत्तीसगढ़ की जेलों में बंद बंदियों को रोजगार से जोड़ने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में नई पहल की गई है। प्रदेश की जेलों में बंदियों को अब निशुल्क कौशल विकास प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके लिए जेल मुख्यालय और जन शिक्षण संस्थान के बीच समझौता ज्ञापन (MOU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इसके साथ ही बेमेतरा ओपन जेल में आईटीआई खोलने की तैयारी की जा रही है। वर्तमान में प्रदेश की किसी भी जेल में आईटीआई संचालित नहीं है।
रायपुर स्थित जेल मुख्यालय में हुए समझौते पर जेल महानिदेशक हिमांशु गुप्ता और जन शिक्षण संस्थान के डायरेक्टर अतुल सिंह ने हस्ताक्षर किए। इस समझौते का मुख्य उद्देश्य जेल में रहने के दौरान बंदियों को अलग-अलग रोजगारपरक क्षेत्रों में प्रशिक्षित करना है, ताकि जेल से रिहा होने के बाद वे अपने हुनर का इस्तेमाल कर रोजगार या स्वरोजगार से जुड़ सकें। कौशल विकास प्रशिक्षण के माध्यम से बंदियों को उनकी रुचि और क्षमता के अनुसार अलग-अलग ट्रेड में प्रशिक्षण देने की योजना है। प्रशिक्षण पूरी तरह निशुल्क रहेगा। इसका उद्देश्य बंदियों के समय का सकारात्मक उपयोग करने के साथ उन्हें ऐसा हुनर देना है, जिसकी मदद से वे भविष्य में आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकें।
जेल प्रशासन का प्रयास है कि सजा पूरी करने के बाद समाज की मुख्यधारा में लौटने वाले बंदियों को रोजगार के लिए परेशान न होना पड़े। कई बार जेल से बाहर आने के बाद रोजगार के अवसर नहीं मिलने से पुनर्वास में कठिनाइयां आती हैं। ऐसे में कौशल प्रशिक्षण बंदियों के पुनर्वास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इस पहल का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बेमेतरा ओपन जेल में औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान यानी आईटीआई की शुरुआत करना है। प्रदेश में वर्तमान समय में किसी भी जेल परिसर में आईटीआई संचालित नहीं है। ऐसे में बेमेतरा ओपन जेल में प्रस्तावित आईटीआई प्रदेश में अपनी तरह की महत्वपूर्ण पहल होगी।
आईटीआई शुरू होने से पात्र बंदियों को व्यवस्थित तकनीकी और व्यावसायिक प्रशिक्षण प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। प्रशिक्षण के जरिए उन्हें रोजगार के लिए उपयोगी कौशल सिखाए जा सकेंगे। इससे रिहाई के बाद रोजगार तलाशने या स्वयं का काम शुरू करने में मदद मिलने की उम्मीद है। जेलों को केवल सजा काटने के स्थान के बजाय सुधार और पुनर्वास केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में कौशल विकास को महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी उद्देश्य से जेल मुख्यालय और जन शिक्षण संस्थान के बीच यह एमओयू किया गया है।
नई व्यवस्था के तहत प्रशिक्षण कार्यक्रमों को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जा सकता है। बंदियों को प्रशिक्षण देने के साथ उनके कौशल को बेहतर बनाने और उन्हें व्यावसायिक गतिविधियों से जोड़ने पर फोकस रहेगा। इससे जेल में रहते हुए बंदियों को सकारात्मक गतिविधियों में शामिल होने का अवसर भी मिलेगा। जेल मुख्यालय की इस पहल से प्रदेश की जेलों में सुधारात्मक गतिविधियों को नई दिशा मिलने की उम्मीद है। बेमेतरा ओपन जेल में आईटीआई की शुरुआत और अन्य जेलों में निशुल्क कौशल विकास प्रशिक्षण के जरिए बंदियों को रिहाई के बाद सम्मानजनक रोजगार और बेहतर भविष्य की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर मिल सकेगा।
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