
कोरबा। शारदीय नवरात्रि का समापन हो गया है। अश्विन शुक्ल नवमी को हसदेव नदी में जवारा कलशों का विसर्जन किया गया, जिसके साथ ही मां सर्वमंगला देवी मंदिर में नौ दिवसीय उत्सव संपन्न हुआ। इससे पहले, अष्टमी तिथि पर ज्योति कलशों का हवन-पूजन कर नवरात्रि को विराम दिया गया था।
राजपुरोहित नमन पाण्डेय (नन्हा महाराज) ने अपनी मां और धर्मपत्नी के साथ कलश को सिर पर रखकर विसर्जित करने वाली नारी शक्ति की पूजा-अर्चना की। इसके बाद उन्हें सम्मानपूर्वक हसदेव घाट की ओर रवाना किया गया। पाण्डेय परिवार ने इस दौरान बैगाओं को शांत कराया।
जवारा कलशों को चुनरी द्वार से हसदेव नदी तक ले जाया गया। इस शोभायात्रा में रक्षक दल के रूप में हनुमान और उनकी वानर सेना आगे-आगे चल रही थी। ढोल-मंजीरा और जसगीत के साथ जवारा विसर्जन किया गया।
विसर्जन के दौरान मां सर्वमंगला देवी मंदिर से लेकर हसदेव घाट तक 'मां' के जयकारे गूंजते रहे। ढोल-मंजीरा और जसगीत की धुन पर भजन-कीर्तन करने वाले भक्त रास्ते भर मां की भक्ति में झूमते रहे।





