छत्तीसगढ़

45 एकड़ में नामचीन बिल्डर की अवैध प्लाटिंग, नींद में प्रशासन

Gulabi Jagat
16 Jun 2022 11:38 AM IST
45 एकड़ में नामचीन बिल्डर की अवैध प्लाटिंग, नींद में प्रशासन
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भू-माफिया सक्रिय, दतरेंगा सहित आउटर के गांवों में बड़े पैमाने पर सरकारी जमीन दबाए जा रहे.

>सरकारी संपत्ति आपकी अपनी है इस स्लोगन को बिल्डर कर रहे चरितार्थ

>सरकारी जमीन में भूमाफियाओं का कब्ज़ा
>शहर के आसपास एवं आउटर में अतिक्रमण की भरमार
जसेरि रिपोर्टर
रायपुर। राजधानी के आउटर के गांव दतरेंगा में 45 एकड़ जमीन में एक नामचीन बिल्डर द्वारा अवैध प्लाटिंग कराई जा रही है जिसकी जानकारी होने के बाद भी प्रशासनिक अमला नींद में है। जिला प्रशासन और नगर निगम कार्रवाई के नाम पर सिर्फ औपचारिकता निभा रहे हैं। एक ओर जहां निजी जमीनों पर बिना लेआउट, डायवर्सन व नक्श पास कराए अवैध प्लाटिंगकी जा रही है वहीं सरकारी जमीनों पर भी अवैध कब्जा कर प्रोजेक्ट लांच किए जा रहे हैं। दतरेंगा सहित आसपास के गांवों में किसानी जमीन के सात सरकारी जमीनों पर बिल्डर कब्जा कर धड़ल्ले से अवैध प्लाटिंग कर रहे है। निगम सिर्फ शहरी क्षेत्र में दिखावा कर रही है। नक्शा-खसरा और टाउंन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग में पड़े दस्तावेजों का सत्यापन कर बिल्डरों पर ठोस कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए । राजधानी में सरकारी जमीनों पर कब्जे का खेल इस कदर धड़ल्ले से जारी है कि सरकार का कोई भी विभाग हो, उसकी जमीन सुरक्षित नहीं है। जमीनों पर कब्जे व अतिक्रमण हटाने का काम करने वाला नगर निगम खुद अपनी जमीन बचाने में नाकाम साबित हुआ है तो सरकार में बैठे अधिकारी कहाँ ध्यान देंगे । सरकार का हर विभाग की जमीनों पर अवैध कब्जाधारियों ने कब्ज़ा जमाया हुआ है। वन विभाग हो या सिंचाई विभाग या फिर पीडब्लूडी विभाग, कोई भी ऐसा विभाग नहीं, जिस पर भूमाफियाओं की बुरी नजर न पड़ी हो। सरकारी संपत्ति आपकी संपत्ति है इस स्लोगन को कब्जाधारियों ने अपने लिए ही समझ लिया है लेकिन उन्हें पता है की नहीं कि सेन्ट्रल जेल भी अपना है। कब्जाधारियों ने इस स्लोगन को आधार मानकर करोड़ों कीमत की सरकारी जमीं पर अवैध कब्ज़ा जमा लिए हैं। खास बात यह है कि कई जगह जमीनों पर कब्जे के इस खेल में राजस्वकर्मियों की भी भूमिका संदिग्ध है। एक और हकीकत सामने आई कि जिन सरकारी विभागों की जमीनों पर कब्जे हैं, वे लंबे समय से हैं लेकिन, संबंधित विभागों ने अपनी जमीनों पर कब्जे हटवाने में दिलचस्पी नहीं दिखाई। यह हाल तब है जब सीएम खुद सरकारी जमीनों से कब्जे हटाने का निर्देश बार-बार दे चुके हैं। विभागों की लापरवाही का ही नतीजा है कि तमाम जगहों पर पक्के निर्माण तक बना लिये गए। वहीं, कई जमीनों को तो भूमाफियाओं ने प्लाटिंग करके बेच भी डाला। हालांकि, इस खेल में स्थानीय राजस्व कर्मियों की भूमिका को नकारा नहीं जा सकता। जिनकी बिना मिलीभगत के यह संभव नहीं है।
छुटभैया नेताओं के दबाव से कार्रवाई से खींच रहे हाथ
छुटभैया नेताओं का वर्चस्व और राजनीतिक घुसपैठ के चलते अधिकारी अवैध कब्जा और अवैध प्लाटिंग पर चाह कर भी कार्रवाई नहीं कर पाते है। छुटभैया नेता की मिली भगत से ही बिल्डर जमीनों पर कब्जा कर उसमें प्लाटिंग करने की हिम्मत दिखाते है। क्योंकि बिल्डरों के मिडयेटर के रूप में छुटभैया काम करते है और अवैध प्लाटिंग कराते है। उसके बदले में बिल्डर उन्हें नजराना पेश करते है। अधिकारियों को सब कुछ जानकारी होने के बाद भी रसूखदारों पर कार्रवाई करने से पीछे हट जाते है।
फ्रंट की जमीन खरीदकर कर रहे फर्जीवाड़ा
राजधानी में मुख्य मार्गों की जमीनों की खरीदी को लेकर कोई प्लानिंग करें या न करें बिल्डरों ने इस पर बहुत पहले ही प्लानिंग कर मुक्य मार्गो की ऐसी जमीन और उससे लगे जमीन तथा उसके पीछे की जमीन को खरीदने में एड़ी चोटी एक कर दी थी। इसके पीछे बिल्डरों का एक ही स्वार्थ था कि फ्रंट की जमीन कैसे भी करके खरीद लो बैक वाली जमीन तो मालिक खुद-ब-खुद बेच देगा और वहीं हो रहा है। बिल्डरों ने राजधानी के नामचीन मुक्य मार्गों की फ्रंट की जमीन को बहुत पहले खरीदने के लिए जोड़-तोड़ कर लिया था। जिससे आबादी बढऩे और शहर का विकास होने के साथ यह उनका सबसे बड़ा प्रोजेक्ट बन जाएगा। जमीन सरकारी हो या निजी बिल्डरों ने राज्य बनते ही धड़ाधड़ जमीनों की खरीदी में निवेश किया। आज राजधानी विकास मोड पर है, चारों तरफ मल्टी स्टोरी कामर्शियल काम्प्लेक्स के साथ बड़े बड़े मॉल तैयार हो रहे है। बिल्डरों ने बड़ी चतुराऊ से विवादित जमीनों की खरीदी की और उसे अपने स्तर पर निपटारा भी कर लिया। सारे रिहायशी जमीनों को कामर्शियल में बदल कर सरकार को करोड़ों का चूना लगाने का खेल में बहुत आगे निकल गए। सारे वैध-अवैध दस्तावेजों को अधिकारियों के साथ मिलीभगत कर एनओसी तक ले ली है। रजिस्ट्री भी रिहायशी मकान बनाने के लिए की है, और उस पर कामर्शियल काम्प्लेक्स बेकौप होकर बनाया जा रहा है। जिसके कारण राजधानी में धड़ाधड़ कामर्शियल काम्प्लेक्स बनते जा रहे है। बिल्डरों ने सोची समझी साजिश के तहत आत से 20 साल पहले मुख्य मार्गो की जमीनों को खरीदी कर उसे अपने एम्पायर में जोड़ लिया। जो जमीन बेचने में आनाकानी करते थे उनके पीछे दलालों को लगा दिया और सौदा कर लिया। इस खरादी में बिल्डरों ने एक खेल यह खेला कि मार्के की जमीन दलालों के माध्यम से फ्रंट की जितनी भी जमीन थी और उससे लगी जमीन का भाव दबाव बनाकर गिराकर खरीदी की। एक तरफ जिसकी जमीन थी, उस पर दो जमीनों के बीच फंसी जमीन का वास्ता देकर औने-पौने में सौदा किया। फिर उस जमीन को फ्री छोड़ दिया। मुख्य मार्ग से लगे जमीन को छोड़कर अंदर की जमीन का लेआउट पास कराया और दोनों जगह कंस्ट्रक्शन काम शुरु करवा दिया।
निगम और टाउन एंड कंट्री प्लानिंग की मिली भगत
कुछ दिनों बाद फिर बिल्डर निगम और टाउनएंड कंट्री प्लानिंग की मिली लेआउट पास कराया और उसमें कामर्शियल बिल्डिंग तान कर सरकार का करोड़ों का राजस्व नुकसान किया। इसी तरह अधिकतर उद्योग मालिकों में कुछ लोगों का कंस्ट्रक्शन का काम भी साइड बिजनेस के रूप में कर रहे है। जो अपने उद्योग के लिए रियायती दर पर जमीन खरीदी उस पर बहुमंजिला बिल्ंिडग बना कर बेच रहे है। इस तरह सरकार ने जिस मद में जमीन दी उसका खुलेआम उल्लंघन कर रहे है। उद्योगपतियों ने सरकार को दोहरा चूना लगाने के खेल चल रहा है।
क्या कहते हैं अधिकारी...
इस संबंध में जब जनता से रिश्ता ने एडीएम से बात की तो उन्होंने कहा कि यह हमारे अधिकार क्षेत्र में नहीं है इस मामले में एसडीएम को संज्ञान लेना होगा। वैसे जिस इलाके में अवैध प्लाटिंग हो रही है उसकी शिकायत कुछ राजनीतिक दलों और संगठनों ने भी की है जिसे एसडीएम को भेजा जा रहा है। वहीं एसडीएम का कहना है कि जिसकी अवैध प्लाटिंग बताई जा रही है उस बिल्डर का पहले से वहां दो प्रोजेक्ट चल रहे हैं जिसके लिए उसने आवेदन दिया हुआ है, यह प्लाटिंग उस प्रोजेक्ट का हिस्सा है या फिर नई प्लाटिंग की जा रही है। अवैध प्लाटिंग की हिस्से की खसरा लेआउट के आधार पर उसकी जांच करवाई जाएगी। दतरेंगा के 45 एकड़ के खसरे में अलग से प्लाटिंग हो रही होगी तो इसकी भी त्वरित जांच करवाऊंगा।
डीडीनगर-चंगोराभाटा में चला बुलडोजर
अवैध प्लाटिंग को रोकने के लिए निगम ने कमर कस ली है। शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई करते हुए निगम टीम ने डीडी नगर और चंगोराभाठा में हो रहे अवैध कब्जे पर बुलडोजर चलाया। यहां न केवल बनाए गए मुरूम रोड को काटकर हटाया गया बल्कि बनाई गई नाली को भी ध्वस्त किया। क्या निगम का अतिक्रमण दस्ता को दतरेंगा में हो रहे अवैध प्लाटिंग की जानकारी नहीं है या फिर रसूखदारों के दबाव में आकर कार्रवाई करने से मुंह मोड़ लिया है। शहर के आउटर बोरियाखुर्द, कांदुल, डूंडा, नवा रायपुर, कोटा में धड़ल्ले से अवैध प्लाटिंग का खेल चल रहा है। जिस पर अभी तक निगम ने मिली शिकायतों पर संज्ञान नहीं लिया है। निगम आयुक्त मयंक चतुर्वेदी के आदेश पर नगर निगम जोन क्रमांक 5 की उडऩदस्ता टीम ने डाक्टर खूबचंद बघेल वार्ड क्रमांक 68 के महादेवा तालाब चंगोराभाठा के समीप साढ़े चार एकड़ निजी भूमि और पं. दीनदयाल उपाध्याय वार्ड क्रमांक 41 में जोगी बंगला के पीछे, डीडी नगर क्षेत्र में करीब डेढ़ एकड़ निजी भूमि में की जा रही अवैध प्लाटिंग मुरुम रोड को थ्रीडी मशीन से काटने के साथ चंगोराभाठा में महादेवा तालाब के समीप बनाई गई अवैध नाली को तोड़ा।
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