छत्तीसगढ़
अवैध नीलगिरी का पर्दाफाश: वन विभाग ने 3 लाख की लकड़ी से भरा ट्रक किया जब्त
Shantanu Roy
19 Sept 2025 12:21 AM IST

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छग
Manendragarh-Chirmiri-Bharatpur. मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर। जिले के मनेंद्रगढ़ वन मंडल में वन विभाग की सतर्कता ने अवैध लकड़ी तस्करों की बड़ी साजिश को बेनकाब कर दिया। चांटी वन बैरियर पर विभागीय टीम ने गुरुवार को एक ट्रक को रोककर उसकी तलाशी ली, जिसमें बड़ी मात्रा में नीलगिरी की लकड़ी भरी हुई पाई गई। जब्ती की गई लकड़ी की अनुमानित कीमत लगभग तीन लाख रुपए बताई जा रही है। जांच के दौरान यह साफ हो गया कि लकड़ी का परिवहन पूरी तरह से नियम विरुद्ध और बिना वैध दस्तावेजों के किया जा रहा था।
फर्जी अनुज्ञा पत्र के सहारे तस्करी का प्रयास
जांच के दौरान ट्रक चालक ने ग्राम पंचायत मट्टा के सरपंच द्वारा जारी एक परिवहन अनुज्ञा पत्र प्रस्तुत किया। इस दस्तावेज़ में उल्लेख था कि लकड़ी ग्राम नगरी के एक व्यक्ति इंद्रभान भुर्तिया की निजी भूमि से काटी गई है और इसे मध्य प्रदेश के सीधी जिले भेजा जा रहा है। खरीदार के रूप में अनिल कुमार द्विवेदी, ग्राम सनोहरी, सीधी (मध्य प्रदेश) का नाम दर्ज था। हालांकि वन विभाग की गहन जांच में यह दस्तावेज फर्जी पाया गया। इसमें न तो विभागीय सत्यापन था और न ही वैध परिवहन अनुज्ञप्ति, जो कि छत्तीसगढ़ अभिवहन (वनोपज) नियम 2001 का खुला उल्लंघन है।
पीओआर दर्ज कर ट्रक और लकड़ी जब्त
वन विभाग की टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए पीओआर क्रमांक 15820/23 दर्ज किया और ट्रक समेत जब्त लकड़ी को कब्जे में ले लिया। जब्त वाहन और लकड़ी को जनकपुर स्थित वन विश्राम गृह में सुरक्षित रखा गया है। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि मामले की गहन जांच की जा रही है ताकि इस अवैध परिवहन के पीछे शामिल पूरे नेटवर्क का पता लगाया जा सके।
संगठित गिरोह की संलिप्तता की आशंका
स्थानीय लोगों ने खुलासा किया कि इस तरह की घटनाएं अक्सर सामने आती रहती हैं, और यह संभव है कि इस मामले में भी संगठित गिरोह सक्रिय हो। गिरोह फर्जी अनुज्ञा पत्रों और स्थानीय स्तर पर प्रभावशाली लोगों के नाम का सहारा लेकर नीलगिरी समेत अन्य कीमती लकड़ियों को राज्य से बाहर भेजने की कोशिश करते हैं। इस घटना ने वन विभाग की सतर्कता और निगरानी की अहमियत को और मजबूत कर दिया है।
विभाग की सख्ती और आगामी जांच
वन विभाग ने साफ किया है कि ऐसे मामलों में किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरती जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि जांच में सामने आने वाले सभी दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। वन मंडल के सूत्रों के अनुसार, ट्रक चालक और फर्जी दस्तावेज तैयार कराने वालों के बीच गहरी साठगांठ हो सकती है। संभावना यह भी जताई जा रही है कि इस नेटवर्क के तार मध्य प्रदेश तक फैले हुए हैं।
नियमों की अनदेखी पर होगी कठोर कार्रवाई
छत्तीसगढ़ अभिवहन (वनोपज) नियम 2001 के अनुसार, किसी भी प्रकार की लकड़ी या वनोपज का परिवहन केवल विभागीय अनुमति और सत्यापन के बाद ही किया जा सकता है। लेकिन इस प्रकरण में नियमों की धज्जियां उड़ाई गईं। अधिकारियों का कहना है कि यदि समय रहते यह ट्रक पकड़ में नहीं आता, तो लाखों की नीलगिरी लकड़ी अवैध रूप से राज्य की सीमा पार कर जाती। नीलगिरी की लकड़ी का उपयोग कई उद्योगों में होता है, खासकर फर्नीचर, कागज और प्लाईवुड निर्माण में। इसी कारण इसकी मांग बढ़ रही है और तस्कर अवैध तरीके से बड़ी मात्रा में लकड़ी कटवाकर बेच रहे हैं। वन विभाग ने जनता से भी अपील की है कि ऐसे मामलों की जानकारी तुरंत विभाग को दें, ताकि जंगलों को बेतहाशा कटाई से बचाया जा सके।
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