
ज़ाकिर घुरसेना/कैलाश यादव
भगवान देता है तो छप्पर फाड़ के एैसा ही कुछ हुआ कौन बनेगा करोड़पति में । अमिताभ बच्चन का शो ‘कौन बनेगा करोड़पति 17’ अब अपने अंतिम पड़ाव पर है। शो को दूसरा करोड़पति मिल गया है। रांची के बिप्लव बिस्वास ने 1 करोड़ रुपये के सवाल का सही जवाब दिया है। बिप्लव ने चंद सेकंड में सवाल का जवाब दिया, जिससे सिर्फ अमिताभ बच्चन ही नहीं बल्कि शो देखने वाले दर्शक भी हैरान रह गए। बिप्लव सीआरपीएफ में इंस्पेक्टर हैं और छत्तीसगढ़ के बीजापुर में पोस्टेड हैं।पहले फास्टेस्ट फिंगर राउंड जीतकर बिप्लब बिस्वास हॉटसीट पर बैठे। उन्होंने कहा कि वो शो शुरू करने से पहले अमिताभ बच्चन से गले मिलना चाहते हैं। बिग बी ने उन्हें गले लगाया। इस दौरान बिप्लव ने बताया कि कैसे वे जंगल में काम करते हुए सर्वाइव करते हैं। शो के दौरान उन्होंने अपने सहयोगियों के बलिदानों का भी जिक्र किया। जनता में खुसुर-फुसुर है कि विप्लव ने अपने ज्ञान के बल पर करोड़पति बनकर यह बता दिया कि ज्ञान से बढक़र दुनिया में कोई शक्ति नही जो आपको सपने पूरा करने की ताकत देता है। इसी बात पर किसी ने ठीक ही कहा है कि हारने का डर न हो तो जीतने के कई रास्ते मिल जाते हैं।
पुलिस कमिश्नरी की दौड़ में कौन-कौन
सरकार ने नए साल में एक शानदार फैसला लेकर वरिष्ठ पुलिस की टेंशन बढ़ा दी है। जनता में खुसुर-फुसुर है कि काश सरकार साल के आखिरी कैबिनेट बैठक ये फैसला नहीं लेती तो अच्छा होता। 31 दिसंबर की रात भर बड़े -बड़े पुलिस अधिकारी जो कमिश्नरी की दौड़ में शामिल साहब को परफारमेंस दिखाते रहे। जो इंतजाम न्यू ईयर्स के लिए किया था, उसे केंसिल कर सहपाठियों में बांटना पड़ा.। इसमें भी बड़ा खेल हो गया दोस्तों ने पहले कमिश्नर की बधाई देकर रात में ही रशियन वोदका औऱ सारे लेग पीस हजम कर गए। सुबह उठेतो पता चला कि औऱ भी दावेदार है जो दौड़ में आगे निकलने के लिए दिल्ली तक दौड़ लगा चुके है.। अब अपना दु:ख किसे सुनाए , हमने ही बनाया हम ही संवारेंगे के चक्कर में हमारे संवरने के दिन में कोई आइना बार-बार दिखा रहा है। अब समझ में आ रहा है कि सरकार सरकार ने क्यों 31 दिसंबर को कैबिनेट रखी और क्यों कमिश्नरी का राग अलाप दिया। 23 जनवरी दूर नहीं है पर इसमें जो नंबर है 2 और 3 उसमें बड़ा चक्कर है, इसका जोड़ 5 होता है, यदि हमारे अलावा औऱ चार कौन है इस बात को लेकर हम पांचों कमिश्नरों के दावेदार टेंसन में रात भर गम गलत करते रहे। पर नशा काफूर होता रहा. एसा नया साल पहली बार देखा जब बिना पिए ही नशे में झूमते रहे औऱ कमिश्नर तक पहुंचने की जुगाड़ में यहां वहां भटकते रहे।
पर्यटन के नाम पर दलालों की चांदी
साल 2025 की विदाई और 2026 के स्वागत ने बस्तर के पर्यटन को नई रफ्तार दी लोग रात भर जश्न मनाते रहे। सरकार ने पर्यटन को बढ़ावा देने सारे सरकारी होटल, मोटलों को कंसेशन कर दिया जिसके कारण चित्रकोट, तीरथगढ़, कोटमसर और पिकनिक स्पॉट्स पर रिकॉर्ड भीड़ देखी गई। कई पर्यटक देर रात तक जोड़ी बनाकर नववर्ष के स्वागत में डटे रहे। नाइट कैंपिंग का ट्रेंड इस बार सबसे ज्यादा आकर्षण का केंद्र रहा। चित्रकोट के आसपास नाईट स्टे और कैम्पिंग फुल बुक रहे। होटल और टूरिज्म रिसॉर्ट पश्चिम बंगाल, तेलंगाना, आंध्र और ओडिशा के पर्यटकों से खचाखच भरे रहे। बस्तर पुलिस ने सभी पर्यटन स्थलों पर अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए थे। चित्रकोट और तीरथगढ़ जलप्रपात के आसपास विशेष निगरानी रखी गई। पर्यटन विभाग के अनुसार दिसंबर-जनवरी में सबसे ज्यादा पर्यटक आते हैं। 1 जनवरी को मंदिरों और पार्कों में भी भारी भीड़ उमड़ी। प्रशासन ने नववर्ष के पहले दिन के लिए भी सुरक्षा और व्यवस्थाएं पुख्ता की है। जनता में खुसुर-फुसुर है कि पर्यटन को इसी तरह बढ़ावा देते रहे हैं हर रोज नया साल होगा लोग वहां से जाने का ही नाम नहीं लेंगे क्योंकि बस्तर में आदिवासियों को शराब बनाने की छूट है जो अपने उपयोग के लिए बनाते है पर यहीं तो यह देखने मिला की उसे कमाई का जरिया बनाने में दलाल लोग लालच देकर आदिवासियों लूट रहे हैं। औऱ उनके बनाए शराब को अपने ब्रांड नेम देकर कमाई कर रहे हैं।
बस्तर नए दौर में प्रवेश कर रहा...
खबर है कि बस्तर नए दौर में प्रवेश कर रहा है अब यहां नक्सली नहीं कारोबारी आएंगे औऱ विकास की गंगा बहाएंगे। मिशन 2026 ने नक्सलियों की कमर तोड़ दी है।।बस्तर के आधे से ज्यादा इलाके नक्सलमुक्त। अब सिर्फ साउथ बस्तर डिवीजन में बचे नक्सली। हथियारबंद नक्सलियों की संख्या 120=150 के बीच। ज्यादातर या तो मारे गए या सरेंडर कर चुके। चार बड़े डिवीजन पूरी तरह मुक्त हो चुके हैं। पहले बड़े कैडर पर प्रहार, फिर सरेंडर नीति। गलियारा लगातार सिमट रहा है। जल्द ही बचे नक्सलियों का भी आत्मसमर्पण। शांति और विकास की राह मजबूत। बस्तर नए दौर में प्रवेश कर रहा है। जनता में खुसुर-फुसुर है कि विकास की गंगा में कौन -कौन डूबकी लगाएगा। यह तो 2028 की चुनावी वैतरणी है भाई इसमें हर कोई नहीं तैर सकता इसके लिए साहब से पूछना पड़ेगा कि क्या हम भी तैर सकते हैं?
रेल से खुलेगा विकास का रास्ता
नए साल में बस्तर को रेल कनेक्टिविटी की सौगात के साथ रावघाट–जगदलपुर रेललाइन का काम 2026 में शुरू होगा। 140 किमी का दूसरा चरण शुरू होने जा रहा है। 3513 करोड़ रुपए की केंद्र से मंजूरी। 2028 तक प्रोजेक्ट पूरा करने का लक्ष्य। पहला चरण दल्ली राजहरा–रावघाट लगभग पूरा। 12 स्टेशन, 10 क्रॉसिंग और 2 हॉल्ट प्रस्तावित। 776 हेक्टेयर में से 264 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहित। पर्यटन, व्यापार और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा। खनिज और स्थानीय उत्पादों को बाजार। लागत 5 साल में 975 करोड़ बढ़ी। रेलमार्ग बस्तर की तस्वीर बदलेगा। जनता में खुसुर-फुसुर है कि बस्तर की तस्वीर बदले या न बदले पर छोटे मोटे भाइयों की तस्वीर तो बदल ही जाएगी। क्योंकि सारे भाई लोग आत्मसमर्पण कर जीआरडी हो गए है। यानी जिंदगी रास्ता दिखाता है। कल कहां थे और आज कहां आ गए ये है बस्तर की ताकत ।





