छत्तीसगढ़

मैं जहां की सारी खुशियां तेरे नाम पर लुटा दूं, तुझे कोई गम न आये तू हमेशा मुस्कुराए

Nil dhankar
7 Nov 2025 11:23 AM IST
मैं जहां की सारी खुशियां तेरे नाम पर लुटा दूं, तुझे कोई गम न आये तू हमेशा मुस्कुराए
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ज़ाकिर घुरसेना/ कैलाश यादव

कांग्रेस नेता एवं पूर्व विधायक बृहस्पत सिंह ने नई राष्ट्रीय पार्टी बनाने का ऐलान कर दिया है। उन्होंने कहा कि आदिवासी नेताओं को लेकर पार्टी बनाएंगे। इसके लिए कई राज्यों के आदिवासी नेताओं से सहमति ली गई है। कांग्रेस से ज्यादा बीजेपी के नेता पार्टी ज्वाइन करने संपर्क कर रहे हैं। कांग्रेस के पूर्व विधायक बृहस्पत सिंह ने कहा, बीजेपी, कांग्रेस राज्य और देश हित के लिए नहीं है। छत्तीसगढ़ में कांग्रेस कुछ लोगों के घर की पार्टी हो गई है. कांग्रेस चार भागों में बंटी हुई है और अपने अपनों से लड़ रहे हैं। पिछले चुनाव में 22 विधायकों का टिकट काट दी गई थी. कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा। जनता में खुसुर-फुसुर है कि जब दोनों प्रमुख पार्टी देश हित में नहीं है तो फिर कौन देश हितैषी है जो जनता के हित में त्याग करेगी। आपको नई पार्टी बनाने में कितने आदिवासी नेता समर्थन दे रहे, आपकी पार्टी का क्या नाम होगा इसका खुलासा भी कर दीजिए । क्या राष्ट्रीय आदिवासी फेडरेशन होगा या छत्तीसगढ़ आदिवासी कांग्रेस होगा। जनता का हित अब सभी नेताओं के मन में हिलोरें मार रही है और सब के सब मशहूर कव्वाल असलम साबरी की कव्वाली को ताली पीटपीट कर गाने लगे हैं कि मैं जहां की सारी खुशियां तेरे नाम पर लुटा दूं, तुझे कोई गम न आये तू हमेशा मुस्कुराए। अब नई पार्टी बनने के बाद लोग इनको भी देखेंगे पुरानी को तो देख ही रहे हैं।

अद्भुत राज्योत्सव का रोमांच..

जिस तरह हम 25 साल से संघर्ष करते रहे और 25 साल बाद भी संघर्ष करते रहेंगे, यही संदेश वायु सेना के जवानों ने आकाश का सीना चीरकर जय जोहार औऱ सबले बढिय़ा छत्तीसगढिय़ा अंकित कर हमारा मान बढ़ाया है। वायुसेना के जवानों को साधुवाद । सेना के जवानों ने छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना की 25वीं वर्षगांठ पर नवा रायपुर के सेंध जलाशय के ऊपर भारतीय वायु सेना की प्रतिष्ठित एरोबेटिक "सूर्यकिरण" की टीम ने रोमांचक एयर शो का प्रदर्शन किया। विमानों के माध्यम से जब आकाश में तिरंगा लहराया तो सेंध जलाशय भारत माता की जय के नारे से गूंज उठा। जनता में खुसुर-फुसुर है कि पूरा 25 साल राजनीतिक प्रतिव्दंदिता की भेंट चढ़ गया।

राजनेता अपनी -अपनी पार्टी के लिए काम किया जनता के लिए कोई काम ही नहीं हुआ, छत्तीसगढिय़ा सबले बढिय़ा बोल कर अपना उल्लू सीधा करते रहे, जनता के हिस्से में लिखी बेरोजगारी, महंगाई, भ्रष्टाचार,घोटाले,बढ़ते अपराध, नशे के सौदागरों ने छत्तीसगढ़ को बर्बादी के कगार पर लाकर खड़ा कर दिया उसे रोकने में कोई हवाबाज नेताओ्ं ने प्रयास ही नहीं किया। ये तो भला हो वायुसेना के जवानों का जो आकाश में सबले बढिय़ा छत्तीसगढिय़ा लिखकर हमारा मान बढ़ाया।

राजहठ की आग में झुलस गया राज्योत्सव

राज्योत्सव के दौरान जिन घटनाओं को नहीं होना था, वही हुआ। सरकार ने राज्योत्सव के लिए हर जिले में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए लेकिन इसे नेताओं ने राजनीतिक लाभ उठाने के लिए अधिकारियों का कालर पकड़ कर राज्योत्सव को तमाशा बना दिया। विश्व की सबसे बड़े अनुशासित पार्टी होने का दावा करने वाली पार्टी के नेता के सम्मान के ठेस पहुंचाने में कार्यकर्ताओं ने कोई कोर कसर नहीं छोड़ी, बेमेतेरा में राज्योत्सव के दौरान मंच पर कुर्सी में बैठने के लिए सत्ताधारी दल के नेताओं ने कलेक्टर का कालर पकड़ कर देख लेने की धमकी तक दे दी, अभी ये मामला ठंडा नहीं हुआ था कि कवर्धा में पार्टी के कार्यकर्ताओं ने टीआई के साथ वही बात दोहराई जो बेमेतरा में घटित हुआ था। जनता में खुसुर-फुसुर है कि ये कैसा राज्योत्सव है जिसमें प्रशासनिक अधिकारियों के सरकारी काम में बाधा डालने का काम कर राज्योत्सव की किरकिरी कर दी। क्या सत्ता में रहने का पावर एसे सुखद अवसर पर दिखाना की हम कुछ भी कर सकते है, कहां का राजधर्म है। सत्ताधारी दल के नेता सरकार कामकाज को भी पार्टी का कार्यक्रम मानकर मनमानी करने में उतारू होकर अपने वरिष्ठों के सम्मान को चोट तो पहुंचाया ही पार्टी को भी बदनाम करने की कोशिश की है। यदि इसी तरह राज्योत्सव की परिपाटी चलती रही तो आने वाले सालों में राज्योत्सव जनता के लिए उत्सव न होकर नेताओ के राजहठ औऱ प्रतिव्दंदिता की भेंट चढ़ जाएगा।

रतनलाल डांगी साहब पुलिस राजनीति की शिकार हो गए ...

पुलिस विभाग जो करे सो कम है, लांछन की सफाई देने के बाद भी डांगी जी को शायद माफी नहीं मिली, एैसा लगता है। कमिश्नरी की दौड़ में आगे सीनियर आईपीएस रतनलाल डांगी को चंदखुरी ट्रेनिंग अकादमी के निदेशक पद से हटाकर पुलिस मुख्यालय अटैच किया गया है। वहीं आईपीएस अजय यादव को चंदखुरी ट्रेनिंग अकादमी की जिम्मेदारी दी गई है। हाल ही में एक सब इंस्पेक्टर की पत्नी ने 2003 बैच के आईपीएस अधिकारी रतनलाल डांगी पर बीते सात सालों से उत्पीडऩ का आरोप लगाते हुए कई आपत्तिजनक डिजिटल साक्ष्य के साथ उच्च पदस्थ अधिकारियों से शिकायत की थी। इस शिकायत को गंभीरता से लेते हुए विभाग जांच कर रही है। जिस पर आईपीएस डांगी ने इस पूरे विवाद को एक बड़ी साजिश करार देते हुए कहा था कि उनकी साफ सुथरी छवि को उच्च पदों पर संभावित नियुक्तियों के समय निशाना बनाया जा रहा है। जनता में खुसुर-फुसुर है कि सरकार अपनी पुलिसिंग को दागदार होने से बचाने के लिए यह कदम उठाई है। खबरदारों का कहना है कि डांगी साहब राजनीति के शिकार हो गए है। हो सकता है उनके आरोप के पीछे ही उनके ही साथियों का हाथ हो जो नहीं चाहते कि पुलिस कमिश्नरी की रेस में डांगी साहब बाजी मार लें। इस कारण उन्हें पीएचक्यू अटैच कराकर कमिस्नरी का रास्ता साफ कर लिया है। अब दो नाम इस दौड़ में कवायद करते दिखाई देंगे।

स्कूल शिक्षा विभाग पर ध्यान दो सरकार ...

शिक्षा विभाग हमेशा कोई न कोई विवाद को लेकर सुर्खियों में आ ही जाता है। शिक्षा विभाग में युक्तियुक्तकरण विभागीय समन्वय औऱ अपनों को उपकृत करने की साजिश की शिकार हो गई है। आज तक एकल शिक्षक स्कूलों में युक्तियुक्तकरण के जरिए समायोजित नहीं हो पाया है। प्रदेश के हजारों स्कूल आज भी एकल शिक्षकीय आंसू बहा रहा है औऱ शिक्षा विभाग अपने करीबियों युक्तियुक्तकरण का लाभ पहुंचाने में मस्त है। जिसका खामियाजा बच्चों को उठाना पड़ रहा है। जिसके फलस्वरूप स्कूलों में तालाबंदी की खबरें थम नहीं पाई है। तुरसानी स्कूल के अभिभावकों का आरोप है कि स्कूल कई महीनों से एकल शिक्षक के भरोसे छोड़ दिया गया है, जिससे प्राथमिक शिक्षा बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं. अभिभावकों के कई बार लिखित शिकायतों के बाद भी अधिकारियों ने कोई ध्यान नहीं दिया. बच्चे पढ़ाई से वंचित हो रहे हैं, स्कूल परिसर में ताला लगाने के बाद दर्जनों पालक और बच्चे सडक़ पर उतर आए. उन्होंने नारेबाजी करते हुए बीईओ कार्यालय का घेराव किया, जहां चाबी सौंपते हुए मांग दोहराई कि शिक्षकों की कमी दूर न होने पर प्रदर्शन जारी रहेगा। जनता में खुसुर-फुसुर है कि सरकार को सबसे पहले शिक्षा विभाग में असमानता पर ध्यान देना चाहिए ताकि स्कूलों में पर्याप्त शिक्षक हो औऱ बच्चों की पढ़ाई सुचारू रूप से संचालित होता रहे।

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