छत्तीसगढ़

मैं हूं प्रेम रोगी मेरी दवा तो कराओ, जाओ-जाओ किसी वैद्य को बुलाओ...

Nilmani Pal
12 Dec 2025 11:26 AM IST
मैं हूं प्रेम रोगी मेरी दवा तो कराओ, जाओ-जाओ किसी वैद्य को बुलाओ...
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ज़ाकिर घुरसेना/ कैलाश यादव

डीएसपी कल्पना वर्मा और दीपक टंडन को लेकर इन दिनों छत्तीसगढ़ में खबरें खूब सुर्खियां बटोर रही है। सोशल मीडिया अभी सिर्फ ये ही दिख रहे हैं। . होटल कारोबारी दीपक टंडन ने ये दावा किया कि डीएसपी कल्पना वर्मा पर उन्होंने करीब 2 करोड़ रुपए बतौर गिफ्ट्स दिए। जबकि इसके पहले टंडन मीडिया में खुद 2 करोड़ के गिफ्ट के दावे करते हुए सुने जा सकते हैं। मीडिया में वे अपने आप को प्यार में धोखा मिलने या डीएसपी द्वारा अपने प्यार में फंसाने जैसे कथित दावे कर रहे हैं। जनता में खुसुर-फुसुर है कि इश्क हर इंसान के लिए इतना आसान नहीं है जितना वो समझते हैं । इस पर फिल्म प्रेम रोग का गीत सटीक बैठता है, मैं हूँ प्रेम रोगी दवा तो कराओ, जाओ-जाओ किसी वैद्य को बुलाओ। अब सभी को उस वैद्य का इंतजार है जो इश्क और मुश्क की इस अदावत के मसले को हल कर सके।

रायपुर साहित्य उत्सव 2026: उमड़ेे नए आंसू कवि और लेखक ..

2026 कवियों औऱ लेखकों के लिए बड़ा खुशखबरी लेकर आ रही है। छत्तीसगढ़ को तमाम लिक्खाड़ों को सरकार मौका देकर साहित्य की महफिल को सजाने का अवसर प्रदान करने वाली है। देस भर के पत्र पत्रिकाओं में लिखने वाले कापी पेस्ट स्वयंभू- कवि लेखक और मेहनती कवि लेखक भी गदगद हैं । संस्कृति विभाग में अपनी तो जमकर चलती है। अब मंच साझा करने पर भी पारिश्रमिक मिलने की गुंजाइश सरकार ने बढ़ा दी है। पुराने से पुराने अपने लेखों और कविताओ को धोकर सूखाने के जद्दोजहद में लेकर पसीना बहा रहे हैं साहित्य पुरस्कार न मिल जाए इस जुगाड़ में अपने लेखों को तेल पानी पिला रहे ताकि धार दार बनी रहे। और मंच में वाहवाही हमारे हिस्से में ही रहे। नवा रायपुर में अगले महीने होने वाले साहित्य उत्सव के पहले प्रदेश के सभी जिलों में महाविद्यालयीन छात्र-छात्राओं के लिए कहानी एवं कविता प्रतियोगिताएं आयोजित होगी। इन दोनों प्रतियोगिताओं में जिला स्तर पर विजेताओं को पुरस्कार भी मिलेंगे। जिले के विजेताओं को राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में शामिल किया जायेगा और सर्वोत्कृष्ठ कहानी तथा कविता को रायपुर साहित्य उत्सव में पुरस्कृत किया जायेगा। जनता में खुसुर-फुसुर है कि छत्तीसगढ़ी की कहानी, कविता के साथ राजनीतिक कविता पाठ करने वाले कवियों के साथ युवा लेखकों की भीड़ को देखते हुए सभी आर्टिकल्स की मौलिकता का परीक्षण करने वाली जिसके लिए नोडल अधिकारी भी नियुक्त किया जा चुका है। प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने के इच्छुक छात्र-छात्राएं अपनी स्वरचित कविता और कहानी 30 दिसंबर 2025 तक जिले के नोडल अधिकारी कार्यालय में जमा करा सकते हैं। प्रदेश की समृद्धशाली साहित्यिक विरासत को लोगों तक पहुंचाने और साहित्य लेखन में युवाओं की सहभागिता बढ़ाने के लिए नवा रायपुर में 23-25 जनवरी 2026 तक रायपुर साहित्य उत्सव का आयोजन होगा। पत्रकारों में खुसुर फुसुर है कि चलिए अब हमारे भी बिरादरी के लोगों को सम्मान मिलेगा

अटैचमेंट के सवाल पर बेहोशी के जुगाड़ बच गए बीईओ

सरकारी नौकरी में यह माना जाता था कि मनमानी करने के बाद यदि नोटिस मिले तो जवाब देने मोहलत मिलती है यहां तो अटैचमेंट के सवाल औऱ मंत्री के फटकार से बीईओ अचेत हो गए। शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव की अध्यक्षता में कलेक्टोरेट के मंथन सभा कक्ष में आयोजित संभाग स्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान एक बड़ी घटना हो गई। अटैचमेंट से जुड़े मुद्दे पर पूछताछ के दौरान कोटा के बीईओ एन.के. मिश्रा को मंत्री की कड़ी फटकार लगाई। जिसके बाद बीईओ अचानक बेहोश होकर कुर्सी से गिर पड़े। मंत्री यादव से कड़ी फटकार मिलने के बाद बीईओ का अचानक बीपी बढ़ गया और वे कुर्सी से नीचे गिर पड़े। मौके पर अफरा-तफरी मच गई। अधिकारियों ने तुरंत उन्हें अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उनकी स्थिति को स्थिर बताया है। जनता में खुसुर-फुसुर है कि बीईओ को पता नहीं था कि यह सबका साथ सबका विकास वाली सरकार है, बीईओ् अपने ही विकास में लगे रहे औऱ फटकार मिलते ही बचने के लिए बेहोशी का स्वांग रचकर मंत्री की फटकार से बचने का जुगाड़ कर लिया। इसे कहते है नहले पर दहला।

नए साल के पहले मुख्य सचिव ने प्रशासनिक सुस्ती मिटाने लगाई फटकार

आने वाला साल अधिकारियों के लिए कुछ अच्छा नहीं होने वाला है, उसकी एक झलक सीएम ने समीक्षा बैठक में लेकर दिखा दी है। राज्य में पूंजीगत व्यय की धीमी रफ्तार और लंबित प्रशासनिक स्वीकृतियों पर मुख्य सचिव विकासशील ने सभी विभागों की गहन समीक्षा कर उन मामलों में फोकस किया जहां अधिकारी बजट होने के बाद भी योजना को धरातल पर उतारने में असफल रहे। । बैठक में एक बात सामने आया कि कई विभाग बजट जारी होने के बावजूद एक से दो वर्ष तक स्वीकृति प्रक्रियाओं में अटके रहे, जिससे योजनाएं समय पर जमीन पर नहीं उतर सकीं। मुख्य सचिव ने इसे गंभीर प्रशासनिक कमी बताते हुए विभागों से जवाब तलब किया और कहा कि योजनाएं उतनी ही बनें, जिन्हें निर्धारित समय सीमा में पूरा किया जा सके। मुख्य सचिव ने अधिकांश प्रश्न सचिवों की बजाय विभागीय डायरेक्टरों और एमडी से पूछे। एसएनए-स्पर्श प्रणाली में ऑनबोर्डिंग और भुगतान की स्थिति कई विभागों में अधूरी पाई गई, जिस पर अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई गई। बैठक में कुछ अधिकारियों ने आंकड़ों का हवाला देकर देरी को उचित ठहराने की कोशिश की, लेकिन मुख्य सचिव पूरी तैयारी के साथ बैठक ले रहे थे। ऐसे अफसरों को उन्होंने फटकार लगा दी। जनता में खुसुर-फुसुर है कि ये अभी अभी ट्रेलर है बाबू पिक्चर तो अभी बाकी है, 2026 की जश्न की तैयारी करने वालों को सीएस का साफ संदेश है कि सुधर जाओ् नहीं तो सुधार दिया जाएगा, यानी एसी से निकल कर अब धरातल में उतर कर अंतिम व्यक्ति तक सरकार की योजना का लाभ मिले नहीं तो अपना बोरिया बिस्तर बांध लो।

बधाई हो हीराबाई झरेका

छत्तीसगढ़ की पारंपरिक धातुकला को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने वाली सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले की प्रसिद्ध ढोकरा–बेलमेटल शिल्पकार हीराबाई झरेका बघेल को नई दिल्ली में आयोजित समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रीय हस्तशिल्प पुरस्कार से सम्मानित किया। इस गौरवपूर्ण उपलब्धि पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रदेशवासियों की ओर से उन्हें बधाई देते हुए कहा कि यह पूरे छत्तीसगढ़ के लिए अत्यंत गर्व का क्षण है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि यह सम्मान केवल हीराबाई झरेका बघेल का नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के हर शिल्पकार का सम्मान है। हमारा राज्य अपनी कला, संस्कृति और हस्तशिल्प पर गर्व करता है। राज्य सरकार कला-संरक्षण, प्रशिक्षण, कौशल उन्नयन और बाजार विस्तार के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है, ताकि ग्रामीण व वनवासी क्षेत्रों की प्रतिभाएं लाभान्वित हों और विश्व मंच पर अपनी पहचान बना सकें। छत्तीसगढ़ की पहचान को नई ऊंचाइयां देने वाली हीराबाई झरेका बघेल की उपलब्धि हमारे प्रदेश की समृद्ध लोककला, परंपरा और ग्रामीण प्रतिभा की अद्भुत चमक को राष्ट्रीय मंच पर पुनर्स्थापित करती है। ढोकरा कला सदियों पुरानी धरोहर है और बघेल जैसी शिल्प कलाकार इन परंपराओं को आधुनिक समय के अनुरूप जीवंत बनाए रखने का कार्य कर रही हैं। जनता में खुसुर-फुसुर है कि छत्तीसगढ़ में एैसे बहुत से विश्व स्तरीय कलाकार है जिस पर सरकार को फोकस करने की जरूरत है। अधिकारी उसी काम को आगे बढ़ाते है जिसमें पर्याप्त फंड हो, जिसके लिए कागजी कार्रवाई औऱ माथाफोड़ी करनी पड़ती हो उस कला और कलाकार आगे बढ़ाते ही नहीं है। नहीं तो पूछ लीजिए संस्कृित विभाग से।

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