छत्तीसगढ़
पति की हादसे में मौत, बीमा कंपनी ने रोके 20 लाख, अब आयोग से मिली राहत
Shubhra Nandy
20 Oct 2026 11:44 AM IST

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चार सप्ताह में भुगतान का निर्देश
रायपुर : छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले की एक महिला को पति की सड़क दुर्घटना में मौत के बाद बीमा राशि के लिए लंबी कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी। जिला और राज्य उपभोक्ता आयोग से राहत नहीं मिलने के बाद राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने महिला के पक्ष में फैसला सुनाया है। आयोग ने बीमा कंपनी को चार सप्ताह के भीतर 20 लाख रुपए की बीमा राशि और छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने का निर्देश दिया है।
1000 रुपए प्रीमियम पर कराया था 20 लाख का बीमा
अधिवक्ता राजेश कुमार भावनानी के अनुसार, मामला कबीरधाम जिले के बोड़ला तहसील अंतर्गत माराडबरा गांव निवासी तिहारो चिचाम का है। उनके पति गणेश चिचाम का छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक की बोड़ला शाखा में बचत खाता था। बैंक के माध्यम से एक हजार रुपए का प्रीमियम लेकर व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा पॉलिसी जारी की गई थी। दुर्घटना में मृत्यु होने पर पॉलिसी के तहत 20 लाख रुपए भुगतान का प्रावधान था।
सड़क हादसे में हुई थी पति की मौत
19 नवंबर 2023 को गणेश चिचाम मोटरसाइकिल से तरेगांव जंगल से अपने गांव लौट रहे थे। इसी दौरान मछलीरवां मंदिर के पास सड़क दुर्घटना में उनकी मौत हो गई। पति की मृत्यु के बाद पत्नी तिहारो चिचाम ने बीमा कंपनी से दुर्घटना बीमा राशि की मांग की, लेकिन कंपनी ने कथित लापरवाही और पुलिस की खात्मा रिपोर्ट का हवाला देकर दावा खारिज कर दिया।
जिला और राज्य आयोग से भी नहीं मिली राहत
बीमा कंपनी द्वारा भुगतान से इनकार किए जाने पर महिला ने जिला उपभोक्ता आयोग कबीरधाम में शिकायत दर्ज कराई। हालांकि, वहां से उन्हें राहत नहीं मिली। इसके बाद मामला राज्य उपभोक्ता आयोग पहुंचा, लेकिन राज्य आयोग ने भी जिला आयोग के फैसले को बरकरार रखा। आखिरकार महिला ने अधिवक्ता राजेश कुमार भावनानी के माध्यम से राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में अपील की।
राष्ट्रीय आयोग ने पलट दिया फैसला
राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग ने 8 अक्टूबर 2026 के आदेश में पाया कि मृतक की कथित लापरवाही साबित करने के लिए पर्याप्त ठोस साक्ष्य मौजूद नहीं थे। आयोग ने कहा कि केवल एफआईआर और पुलिस की खात्मा रिपोर्ट के आधार पर बीमा दावा खारिज करना उचित नहीं था। रासायनिक परीक्षण रिपोर्ट में भी विषैले पदार्थ के सेवन की पुष्टि नहीं हुई थी। इन तथ्यों को देखते हुए आयोग ने जिला और राज्य उपभोक्ता आयोग के आदेश निरस्त कर दिए।
चार सप्ताह में 20 लाख और ब्याज देने का आदेश
राष्ट्रीय आयोग ने महिला को दुर्घटना बीमा पॉलिसी के तहत 20 लाख रुपए पाने का हकदार माना। आयोग ने बीमा कंपनी को चार सप्ताह के भीतर भुगतान करने का निर्देश दिया है। साथ ही मृत्यु की तारीख से छह महीने बाद की अवधि से भुगतान तक छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा। यह फैसला बीमा दावों में साक्ष्यों के महत्व और उपभोक्ताओं के कानूनी अधिकारों को रेखांकित करता है।
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