छत्तीसगढ़
कैरेक्टर पर शक के चलते पति ने पत्नी को जिंदा जलाया, हाईकोर्ट ने उम्रकैद बरकरार रखी
Shantanu Roy
9 April 2026 1:13 PM IST

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छग
Bilaspur. बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले के पांडातराई में 18 नवंबर 2019 को आरोपी पति संतोष उर्फ गोलू श्रीवास्तव ने पत्नी लता श्रीवास्तव पर केरोसीन डालकर उसे जिंदा जला दिया। पत्नी ने घर के पास तालाब में कूदकर अपनी जान बचाने की कोशिश की, लेकिन करीब 21 दिनों तक इलाज के बाद 9 दिसंबर 2019 को ''सेप्टिक शॉक'' के कारण उसकी मौत हो गई। पीड़िता ने जिला अस्पताल में कार्यपालिक मजिस्ट्रेट के सामने बयान दर्ज कराया, जिसमें उसने पति पर मिट्टी का तेल डालकर आग लगाने का आरोप लगाया। पुलिस ने महिला के बयान और जांच के आधार पर आरोपी के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया और उसे गिरफ्तार कर जेल भेजा।
निचली अदालत ने ट्रायल के दौरान पति को दोषी पाया और उम्रकैद की सजा सुनाई। आरोपी ने सजा के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की, लेकिन छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच, चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की अध्यक्षता में, ने अपील खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि मरने से पहले दिए गए बयान अपने आप में दोषसिद्धि का ठोस आधार होते हैं, क्योंकि मरते समय व्यक्ति का बयान सत्य होता है। कोर्ट ने यह भी कहा कि पीड़िता ने बयान देते समय मानसिक रूप से पूरी तरह फिट थी और पड़ोसियों सावित्री बाई व सुशीला बाई ने पीड़िता को जलती हुई हालत में घर से बाहर निकलते और तालाब में कूदते देखा। घटना स्थल से जले हुए कपड़े और आरोपी की टी-शर्ट पर मिट्टी का तेल मिला।
सुनवाई में यह तथ्य भी सामने आया कि पति घटना के दौरान बाहर खड़ा तमाशा देख रहा था और पत्नी को बचाने की कोई कोशिश नहीं की। कोर्ट ने आरोपी की सभी दलीलों को खारिज करते हुए उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा। जिला प्रशासन और पुलिस ने इस मामले में न्याय सुनिश्चित करने के लिए जांच पूरी की और सभी सबूतों को कोर्ट में प्रस्तुत किया। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि पीड़िता का मृत्यु से पहले दिया गया बयान विश्वसनीय हो, तो बिना अन्य गवाह के भी दोषी को सजा दी जा सकती है। यह मामला छत्तीसगढ़ में घरेलू हिंसा और महिला सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। कोर्ट के फैसले से यह संदेश गया कि ऐसे मामलों में न्याय की प्रक्रिया सख्ती से लागू होगी और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।
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