छत्तीसगढ़
नकटी विवाद पर हाउसिंग बोर्ड अध्यक्ष का बयान, कहा- विधायक कॉलोनी का कोई प्रस्ताव नहीं
Shantanu Roy
6 July 2026 12:15 AM IST

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छग
Raipur. रायपुर। राजधानी रायपुर के माना क्षेत्र स्थित नकटी गांव में हुई प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर जारी विवाद के बीच नया राजनीतिक मोड़ सामने आया है। प्रस्तावित विधायक कॉलोनी को लेकर चल रही चर्चाओं पर विराम लगाते हुए छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड के अध्यक्ष अनुराग सिंह ने स्पष्ट किया है कि नकटी क्षेत्र में विधायक कॉलोनी का कोई प्रस्ताव नहीं है। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि जिस जमीन को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ है, वह हाउसिंग बोर्ड के अधीन नहीं है, बल्कि राजस्व विभाग के अंतर्गत शासकीय भूमि है। उनके अनुसार, संबंधित भूमि पर अतिक्रमण का मामला लंबे समय से चला आ रहा है और प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई भी की गई है।
अनुराग सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि वर्ष 2022 में इस क्षेत्र में लगभग 3 हेक्टेयर भूमि पर अतिक्रमण पाया गया था, जबकि 2023 और 2024 के दौरान शेष भूमि पर भी अवैध कब्जे किए गए। उन्होंने कहा कि यह पूरा मामला शासकीय भूमि पर अवैध कब्जे से जुड़ा है और इस संबंध में हाईकोर्ट भी पहले ही इसे शासकीय भूमि मान चुका है। उनके अनुसार, अतिक्रमणकारियों ने कई स्थानों पर लगभग 29 हजार वर्गफीट जमीन पर अवैध रूप से कब्जा कर रखा था। हाउसिंग बोर्ड अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि नकटी गांव की भूमि से हाउसिंग बोर्ड का कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है और न ही वहां किसी प्रकार की विधायक कॉलोनी बनाने का कोई आधिकारिक प्रस्ताव तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि इस विषय को लेकर सोशल मीडिया और कुछ राजनीतिक हलकों में भ्रम फैलाया जा रहा है, जबकि वास्तविक स्थिति अलग है।
प्रेसवार्ता के दौरान अनुराग सिंह ने कांग्रेस पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि विपक्ष इस मुद्दे को राजनीतिक रंग देने की कोशिश कर रहा है और जनभावनाओं को भड़काने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस का उद्देश्य ऐसी घटनाओं के माध्यम से माहौल को प्रभावित करना है। उन्होंने बलौदाबाजार की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि पूर्ववर्ती सरकार के समय भी अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान विरोध प्रदर्शन हुए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय छेड़ीखेड़ी क्षेत्र में लगभग 150 कब्जाधारियों को हटाया गया था और बाद में 61 विधायकों को जमीन आवंटित की गई थी। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि उस आंदोलन के दौरान एक किसान की मृत्यु भी हुई थी, जिसे लेकर उस समय भी राजनीतिक विवाद हुआ था। नकटी गांव विवाद को लेकर प्रशासनिक और राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। जहां एक ओर प्रशासन इसे शासकीय भूमि पर अतिक्रमण का मामला बता रहा है, वहीं दूसरी ओर राजनीतिक दल इस कार्रवाई को लेकर सवाल उठा रहे हैं। फिलहाल मामले को लेकर स्थिति स्पष्ट होने के बावजूद विवाद और बयानबाजी जारी है।
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