छत्तीसगढ़

होली पर होटलों-क्लबों व फार्म हाउसों में जमकर हुई शराब पार्टी

Admin2
30 March 2021 5:46 AM GMT
होली पर होटलों-क्लबों व फार्म हाउसों में जमकर हुई शराब पार्टी
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नशेडिय़ों ने जमकर की मस्ती, बेरोकटोक पहुंचता रहा नशे का सामान

जसेरि रिपोर्टर

रायपुर। राजधानी में जहां एक तरफ होली के त्यौहार में लोगों के चेहरों में गुलाल और रंग लगे हुए थे। वही दूसरी तरफ वीआईपी रोड के कई फार्म हॉउसों और होटलों में नशे की होली खेली गई। होली के त्यौहार को रंगों का त्यौहार भी माना जाता है लेकिन कुछ नशेड़ी लोग इस त्यौहार को शराब और कई तरफ के नशा करने का त्यौहार ही मानते है। जिन भी होटल, रेस्टोरेंट और ढाबों पर बिना लाइसेंस के शराब परोसी जाती है। वहां पुलिस ना तो पहुंच पाती है और ना ही उन पर कोई कार्रवाई होती है। नशा का कारोबार आज के समय में बहुत बढ़ गया है। होली की एक रात पहले युवा फार्म हाउस के स्विमिंग पूल में होली खेलते है। होली के व्यवस्था में रायपुर में भारी पुलिस बल लगा था। और युवा इसी का फायदा उठाकर पुलिस की आँखो में धुल झोंककर बड़े-बड़े होटलों और फार्म हॉउसों में शराब पार्टी की गई।

होली में युवाओं का हुआ नशा : नशा शराब में होता तो नाचती बोतल मगर बोतल नाचे या नहीं, ड्रिंक तो करना है। पर ड्रिंक भी छोटे-मोटों का काम है, वाकई में जन्नत चाहिए तो अफीम, ब्राउन शुगर, विक्स जैसे बड़े नशीले पदार्थ स्वर्ग तो दिखा देते हैं और नर्क भी। जब इनकी आदत लत में तब्दील होने लगती है तो घर-परिवार वाले परेशान हो जाते हैं। किसी तरह इसका नशेड़पन छूट जाए की चिंता सताए रहती है। अस्पताल में बॉटलों पर बॉटलें चढऩे लगती हैं और एक समय ऐसा आता है, जब शरीर के पिंजरे से आत्मारूपी पंछी स्वतंत्र हो जाता है। इस बीच में नशेड़ी युवा, किशोर या युवती खुद परेशानी झेलते हैं तो ज्यादा परेशानी घर वालों को होती है। फिर भी नशे या मादक पदार्थों में पता नहीं क्या आधुनिकता देखती है युवा पीढ़ी। इनकी नजरों में नशा न करने वाले बैकवर्ड होते होंगे।

युवा पीढ़ी का नशा करना बना फैशन और स्टाइल : बदलते माहौल ने युवा पीढ़ी को नशे की ओर धकेलने में खूब मदद की है। वैेसे युवा पीढ़ी में नशे की शुरूआत फैशन और स्टाइल से शुरू होती है और धीरे धीरे युवा इसका गुलाम बनता चला जाता है पता ही नहीं चलता। शराब और सिगरेट पीना युवा पीढ़ी का शौक है। उन्हें लगता है हम समाज में उच्च स्तर के दिखते हैं यदि पार्टी में एक हाथ में शराब का गिलास और दूसरे हाथ में धुआं उछालती सिगरेट हो। कभी कभी ये नशे युवाओं को इतनी दूर ले जाते हैं वहां से वापिस लौटना उनके लिए मुश्किल हो जाता है।

शनिवार और रविवार को होती है नाईट पार्टी

शनिवार और कल यानि रविवार को युवा पीढ़ी वीआईपी रोड स्थित सभी होटलों और बार, रेस्टोरेंटो कैफे, और हुक्काबारों को बुक कर चुकी हैं। आज के समय में युवा पीढ़ी नशे में लिप्त होती जा रही हैं। युवा पीढ़ी अपने भविष्य के साथ खुद खिलवाड़ कर रहे हैं। राजधानी रायपुर में अपराध थमने का नाम नहीं ले रहा है, वही देर रात बड़े होटलों में हुक्का से लेकर चरस, अफीम के साथ तमाम तरह की नशे की सामग्री परोसी जा रही है। राजधानी के युवक-युवतियां पूरी तरह नशे की आगोश में समा गए है। कोई रोकने-टोकने वाला नहीं है। इस तरह के नए फार्मूेले वाले ऑफरों का खेल राजधानी के वीआईपी और नामचीन होटलों में शुरू हो गया है, वीकेंड पर होने वाले शराब-शबाब पार्टी के लिए फ्राइडे से सटरडे की शाम तक सोशल मीडिया पर एक मेसेस लगातार चलता है, जिसमें जश्न ए पार्टी के लिए युवक-युवतियां अपने फ्रेंड और न्यूकमर्स को सोशल मीडिया में मेसेस भेजकर इनवाइट करते है। जिसे पढ़कर कोई भी युवक-युवतियां अपने आप को रोक नहीं पाते है। राजधानी के बड़े होटलों में इस तरह की पार्टियों का आर्गेनाइज चलन बढ़ गया है, जिसमें कई तरह की ऑफर भी दिए जा रहे है। जिसमें खासकर युवतियों को ऑफर दिया जाता है कि दो सहेलियों के साथ चार लोगों को फ्री इंट्री और युवकों को आफर दिया जाता है कि एक के साथ एक फ्री।

नशा बना होली की शान

शहर की क्लब संस्कृति, डिस्कोथेक कल्चर को अपनाती आधुनिक युवा पीढ़ी, जिनके परिवार में लाखों की कमाई है, इसे शौकियाना लेती है तो मिडिल क्लास के लिए नशाखोरी जरूरत बन जाती है। दु:ख का कारण यह है कि आज नारी जगत के लिए अनेक योजनाएं चल रही हैं और कार्य किए जा रहे हैं। अफसोस यह कि यह वर्ग भी नशाखोरी में पीछे नहीं रहा है। शहरों में आकर फ्रेंड सर्कल में चलते जाम या मादक पदार्थ के सेवन से बच पाना असंभव ही होता है। जो मां-बाप अपने बच्चों, विशेषकर लड़कियों को उच्च शिक्षा के लिए शहरों में भेजते हैं, वहां इनका नशीले पदार्थों से जुड़ाव उनके अरमानों को मसान बना देता है। मादक पदार्थों का असर जब युवा पीढ़ी के युवक-युवती या किशोरों में काफी रम जाता है तो इसे पाने के लिए नीच से नीच कर्म करने में भी कोई कोताही नहीं की जाती है।

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