छत्तीसगढ़
पति को मां से दूर करने की जिद क्रूरता की श्रेणी में हाईकोर्ट का अहम फैसला
Shantanu Roy
4 Sept 2026 6:39 PM IST

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छग
Bilaspur. बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने वैवाहिक विवाद से जुड़े एक मामले में अहम टिप्पणी करते हुए पति की तलाक याचिका मंजूर कर ली है। कोर्ट ने कहा कि बीमार और बुजुर्ग माता-पिता से अलग रहने का दबाव बनाना और पति के खिलाफ झूठा आपराधिक मामला दर्ज कराना मानसिक क्रूरता की श्रेणी में आता है। जस्टिस एनके चंद्रवंशी की एकलपीठ ने इस मामले में पेंड्रा रोड की निचली अदालत के फैसले को रद्द करते हुए पति को तलाक की मंजूरी दी है। इससे पहले लोअर कोर्ट ने पति की तलाक की अर्जी को खारिज कर दिया था।
मामला उत्तर प्रदेश के इटावा निवासी विवेक अग्रवाल और पेंड्रा रोड निवासी उनकी पत्नी से जुड़ा है। दोनों की शादी 12 दिसंबर 2014 को हुई थी। दंपती का एक बेटा भी है। पति विवेक अग्रवाल ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि पत्नी अक्सर छोटी-छोटी बातों को लेकर विवाद करती थी। वह उसकी बुजुर्ग और बीमार मां से अलग रहने का दबाव बनाती थी। पति का कहना था कि वह अपनी बीमार मां को अकेला छोड़ने के लिए तैयार नहीं था, जिसके कारण दोनों के बीच विवाद बढ़ता गया। आरोप के मुताबिक, 11 अगस्त 2019 को पत्नी बिना सहमति के गहने और नकदी लेकर मायके चली गई और बच्चे को इटावा में ही छोड़ दिया।
पत्नी के वापस नहीं लौटने के बाद पति ने वैवाहिक संबंध खत्म करने के लिए तलाक की याचिका दायर की थी। उसने मानसिक क्रूरता के आधार पर तलाक की मांग की थी। पति ने साल 2022 में पेंड्रा रोड की अदालत में तलाक के लिए आवेदन लगाया था। मामले की सुनवाई के बाद निचली अदालत ने 18 फरवरी 2025 को फैसला सुनाते हुए तलाक की अर्जी खारिज कर दी थी। निचली अदालत ने अपने फैसले में कहा था कि पति पत्नी के खिलाफ लगाए गए क्रूरता के आरोपों को साबित नहीं कर सका है। इसके बाद पति ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी। मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि शादी एक नया परिवार बनाती है, लेकिन इससे व्यक्ति की अपने वृद्ध और बीमार माता-पिता के प्रति जिम्मेदारियां खत्म नहीं हो जातीं।
हाईकोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि पति का अपनी बीमार मां को छोड़ने से इनकार करना पूरी तरह स्वाभाविक है। बिना किसी उचित कारण के पति को उसकी मां से अलग करने की जिद करना पति के प्रति मानसिक क्रूरता मानी जा सकती है। कोर्ट ने यह भी कहा कि लगातार विवाद, पति के खिलाफ आपराधिक शिकायतें और लंबे समय तक अलग रहने के कारण दोनों के बीच विश्वास और वैवाहिक संबंध पूरी तरह समाप्त हो चुके हैं। हाईकोर्ट ने पूरे मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए पति की तलाक याचिका स्वीकार कर ली और निचली अदालत के आदेश को रद्द कर दिया। इस फैसले को वैवाहिक संबंधों में पति-पत्नी की जिम्मेदारियों और बुजुर्ग माता-पिता के प्रति कर्तव्यों को लेकर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी भी पक्ष पर अनुचित दबाव बनाना वैवाहिक रिश्ते में मानसिक प्रताड़ना का कारण बन सकता है।
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