छत्तीसगढ़
गांवों में पादरी और पास्टर के प्रवेश पर रोक लगाने वाले होर्डिंग विवाद पर हाईकोर्ट का फैसला
Shantanu Roy
28 Oct 2025 11:22 PM IST

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Bilaspur. बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में मंगलवार को उस जनहित याचिका पर सुनवाई हुई, जिसमें कुछ गांवों में पादरी और पास्टर के प्रवेश पर लगाए गए प्रतिबंधात्मक होर्डिंग्स को लेकर ईसाई संगठनों ने आपत्ति जताई थी। अदालत ने इस मामले में राज्य शासन के पक्ष को स्वीकार करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता पहले निचले स्तर — ग्राम सभा या एसडीएम — के समक्ष आवेदन दें, उसके बाद ही उच्च न्यायालय में आ सकते हैं। इस आधार पर कोर्ट ने मामले को निराकृत (disposed) कर दिया।
🌾 गांवों में लगे हैं प्रतिबंध वाले होर्डिंग्स
मामला कांकेर जिले के भानुप्रतापपुर ब्लॉक के ग्राम घोटिया सहित आसपास के कुछ गांवों से जुड़ा है। यहां ग्रामीणों ने कुछ समय पहले गांव के प्रवेश द्वार पर बड़े-बड़े होर्डिंग लगाकर यह चेतावनी दी थी कि “गांव में ईसाई धर्म के पादरी, पास्टर एवं धर्मांतरण के लिए आने वाले व्यक्तियों का प्रवेश वर्जित है।” इन बोर्डों में यह भी लिखा गया है कि “गांव में किसी भी प्रकार के धार्मिक आयोजन या धर्मांतरण से संबंधित कार्यक्रम पर सख्त प्रतिबंध रहेगा।” इस तरह के होर्डिंग लगाए जाने के बाद ईसाई समाज के संगठनों ने इसे धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन बताते हुए जनहित याचिका दायर की थी।
⚖️ ईसाई संगठनों की दलील
याचिकाकर्ताओं ने कहा कि भारत का संविधान हर नागरिक को धर्म मानने, पालन करने और प्रचार करने की स्वतंत्रता देता है। ऐसे में किसी भी समुदाय या व्यक्ति को किसी धर्म के अनुयायियों को गांव में प्रवेश से रोकने का अधिकार नहीं है। उन्होंने अदालत से यह भी आग्रह किया कि इस तरह के होर्डिंग्स को तुरंत हटाने के आदेश दिए जाएं। ग्राम पंचायत या ग्रामीणों पर कानूनी कार्रवाई की जाए।
🏛️ राज्य शासन का पक्ष
राज्य शासन की ओर से पेश अधिवक्ता ने कहा कि याचिकाकर्ताओं ने सीधे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है, जबकि इस मामले में पहले ग्राम सभा या एसडीएम स्तर पर शिकायत करना जरूरी है। यह भी कहा गया कि शासन को ऐसी किसी घटना की सीधी जानकारी नहीं दी गई थी। इसलिए बिना निचले स्तर पर प्रक्रिया अपनाए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करना नियम विरुद्ध है।
📜 हाईकोर्ट का निर्णय
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायालय ने राज्य शासन की दलील से सहमति जताते हुए कहा कि “याचिकाकर्ता पहले संबंधित ग्राम सभा, एसडीएम या जिला प्रशासन के समक्ष शिकायत दर्ज करें। यदि वहां से उचित कार्यवाही नहीं होती है, तभी वे उच्च न्यायालय का रुख करें।” कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रशासन को इस तरह की शिकायतों पर संवेदनशीलता से कार्रवाई करनी होगी ताकि किसी भी समुदाय की धार्मिक स्वतंत्रता प्रभावित न हो।
🕊️ विवाद ने उठाए कई सवाल
गांवों में पादरी और पास्टर के प्रवेश पर रोक लगाने वाले होर्डिंग्स ने राज्य में धर्मांतरण और धार्मिक स्वतंत्रता के मुद्दे को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। एक ओर ग्रामीण धर्मांतरण के भय की बात करते हैं, वहीं दूसरी ओर अल्पसंख्यक संगठन इसे संवैधानिक अधिकारों का हनन मान रहे हैं। फिलहाल, हाईकोर्ट के निर्देश के बाद अब मामला निचले स्तर पर जाएगा, जहां से इसकी वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
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