छत्तीसगढ़
अरपा नदी प्रदूषण पर हाईकोर्ट सख्त, 70 नालों और STP को लेकर मांगी विस्तृत कार्ययोजना
Shantanu Roy
6 Oct 2026 5:40 PM IST

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छग
Bilaspur. बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बिलासपुर शहर में सीवेज प्रबंधन और अरपा नदी में हो रहे प्रदूषण को लेकर गंभीर रुख अपनाया है। चीफ जस्टिस कृष्ण राम महापात्र की डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार, नगर निगम और मुख्य सचिव से शपथ पत्र के साथ विस्तृत कार्ययोजना पेश करने को कहा है। कोर्ट ने सवाल उठाया कि क्या मौजूदा सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट शहर के 70 नालों से निकलने वाले गंदे पानी को प्रभावी ढंग से साफ करने के लिए पर्याप्त हैं। सुनवाई के दौरान डिवीजन बेंच ने राज्य शासन से पूछा कि क्या केवल चार संचालित एसटीपी के जरिए 70 नालों का पानी पूरी तरह साफ किया जा सकता है। कोर्ट ने इस संबंध में विस्तृत जानकारी शपथ पत्र के साथ प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। साथ ही नगर निगम से कहा गया कि यदि अतिरिक्त एसटीपी की जरूरत है तो उनकी प्रस्तावित क्षमता, स्थान, निर्माण की समय-सीमा और अरपा नदी में पानी छोड़े जाने से पहले ट्रीटमेंट सुनिश्चित करने की पूरी व्यवस्था बताई जाए।
मुख्य सचिव की ओर से पेश शपथ पत्र में बताया गया कि वर्तमान में चल रहे निर्माण कार्य अंतिम चरण में हैं। सभी एसटीपी पूरे होने के बाद यह समीक्षा की जाएगी कि शहर से निकलने वाले कुल सीवेज का कितना हिस्सा इन प्लांटों के माध्यम से ट्रीट किया जा सकता है। कोर्ट ने इस जवाब को पर्याप्त नहीं मानते हुए नया एफिडेविट दाखिल करने का निर्देश दिया है। इसमें साफ करना होगा कि चार एसटीपी 70 नालों से निकलने वाले सीवेज को संभालने के लिए पर्याप्त हैं या नहीं। मुख्य सचिव विकासशील ने हाईकोर्ट में शपथ पत्र पेश कर बताया कि निर्माणाधीन एसटीपी जल्द पूरे होने वाले हैं और उनके चालू होने के बाद वास्तविक ट्रीटमेंट क्षमता की समीक्षा की जाएगी। मामले की अगली सुनवाई 17 नवंबर 2026 को तय की गई है।
बिलासपुर नगर निगम क्षेत्र की आबादी करीब 6 लाख 68 हजार 540 बताई गई है। शहर से प्रतिदिन करीब 72.20 MLD सीवेज निकलता है। यह सीवेज नेटवर्क और 70 नालों के जरिए बहता है। यही कारण है कि कोर्ट ने यह जानना जरूरी माना कि इन सभी नालों का गंदा पानी वास्तव में एसटीपी तक पहुंच भी रहा है या नहीं। डिवीजन बेंच ने अतिरिक्त मुख्य सचिव, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग को भी शपथ पत्र के साथ विस्तृत जानकारी देने का निर्देश दिया है। इसमें यह स्पष्ट करना होगा कि नगर निगम क्षेत्र के सभी 70 नाले उपलब्ध छह एसटीपी से जुड़े हुए हैं या नहीं। इनमें चार चालू एसटीपी और दो निर्माणाधीन एसटीपी शामिल हैं।
कोर्ट ने यह भी पूछा है कि प्रत्येक नाले से निकलने वाले सीवेज को प्रभावी तरीके से इंटरसेप्ट, डायवर्ट और ट्रीट किया जा रहा है या नहीं। इसके अलावा यदि किसी नाले का गंदा पानी सीधे अरपा नदी में पहुंच रहा है तो उसे रोकने के लिए क्या व्यवस्था की गई है, इसकी भी जानकारी देनी होगी। वर्तमान में शहर में चार सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट संचालित हैं, जिनकी कुल क्षमता 78 MLD है। हालांकि इनका वास्तविक उपयोग करीब 43.90 MLD बताया गया है। इसके अलावा 16 MLD क्षमता के दो और एसटीपी निर्माणाधीन हैं। जानकारी के अनुसार, इनमें से एक एसटीपी ट्रायल रन प्रक्रिया में है, जबकि दूसरा एसटीपी 31 दिसंबर 2026 तक पूरा होने की संभावना है। दोनों एसटीपी चालू होने के बाद शहर की कुल सीवरेज ट्रीटमेंट क्षमता बढ़कर 94 MLD हो जाएगी। यह क्षमता वर्तमान अनुमानित 72.20 MLD सीवेज उत्पादन से अधिक होगी। हालांकि हाईकोर्ट ने साफ किया है कि केवल कुल क्षमता का आंकड़ा पर्याप्त नहीं है। जरूरी यह भी है कि शहर के सभी नालों का सीवेज वास्तव में एसटीपी तक पहुंचे और पूरी तरह ट्रीट होने के बाद ही अरपा नदी में छोड़ा जाए। अब अगली सुनवाई में राज्य सरकार और संबंधित विभागों को यह बताना होगा कि 70 नालों की वास्तविक कनेक्टिविटी क्या है, कितने नालों का पानी उपचारित हो रहा है और भविष्य में सीवेज प्रबंधन को लेकर क्या ठोस योजना बनाई गई है।
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