हाईकोर्ट ने SECL को लगाई फटकार, अनुकंपा नियुक्ति का मामला

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति के एक मामले में सुनवाई करते हुए कहा है कि आश्रित महिला की इच्छा सबसे महत्वपूर्ण है। उसे नौकरी की जगह जबरन आर्थिक मुआवजा लेने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।
एसईसीएल चिरमिरी में कार्यरत संतोष कुमार के निधन के बाद उकी पत्नी ललिता ने एसईसीएल में अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया था। लेकिन प्रबंधन ने 1 नवंबर 2021 को पत्र जारी कर उन्हें नौकरी देने के बजाय नकद मुआवजे का विकल्प दे दिया, जबकि ललिता ने नौकरी की मांग की थी। प्रबंधन के इस फैसले को ललिता ने हाईकोर्ट में चुनौती दी। सुनवाई के दौरान बताया गया कि राष्ट्रीय कोल वेज एग्रीमेंट के तहत 45 वर्ष से कम आयु की महिला आश्रित को नौकरी या मुआवजा चुनने का अधिकार है।
न्यायमूर्ति पार्थ प्रतीम साहू की एकल पीठ ने कहा कि जब महिला आश्रित स्पष्ट रूप से नौकरी चाहती है, तो उसे केवल मुआवजा देने का विकल्प थोपना नियमों के खिलाफ है। अदालत ने एसईसीएल द्वारा जारी 2021 का पत्र रद्द कर दिया और निर्देश दिया कि ललिता के आवेदन पर नियमों के अनुसार दोबारा विचार किया जाए।





