छत्तीसगढ़

हाईकोर्ट ने लापता छात्र रोहित कुमार की हेबियस कॉर्पस याचिका खारिज की

Shantanu Roy
29 March 2026 9:48 PM IST
हाईकोर्ट ने लापता छात्र रोहित कुमार की हेबियस कॉर्पस याचिका खारिज की
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Bilaspur. बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने डॉ. सी.वी. रमन विश्वविद्यालय के लापता छात्र रोहित कुमार के संबंध में दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण (हेबियस कॉर्पस) याचिका को खारिज कर दिया। याचिका छात्र के पिता अमरेन्द्र कुमार द्वारा प्रस्तुत की गई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि उनका पुत्र विश्वविद्यालय प्रशासन की गैरकानूनी हिरासत में हो सकता है। सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवीन्द्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने कहा कि हेबियस कॉर्पस याचिका तभी मान्य होती है, जब प्रथम दृष्टया गैरकानूनी हिरासत का ठोस आधार मौजूद हो। मामले में ऐसा कोई ठोस प्रमाण नहीं पाया गया, इसलिए याचिका खारिज की गई।

याचिकाकर्ता ने कोर्ट से अनुरोध किया था कि मामले की जांच सीबीआई या सीआईडी जैसी एजेंसी को सौंपी जाए, ताकि शीघ्र और प्रभावी जांच हो सके। साथ ही, प्रतिवादी अधिकारियों की कथित लापरवाही के कारण हुई मानसिक पीड़ा के लिए 5 लाख रुपये मुआवजे की मांग की गई थी। कोर्ट ने देखा कि पहले से ही गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज है और पुलिस द्वारा जांच जारी है। हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय कानू सान्याल बनाम डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट, दार्जिलिंग (1973) का हवाला देते हुए कहा कि हेबियस कॉर्पस याचिका तभी स्वीकार्य होती है, जब यह स्पष्ट हो कि व्यक्ति गैरकानूनी हिरासत में है। यदि कोई ठोस साक्ष्य नहीं है और एफआईआर दर्ज है तथा जांच चल रही है, तो याचिका न्यायालय में विचार योग्य नहीं होती।

कोर्ट ने याचिकाकर्ता को यह सुझाव भी दिया कि इस चरण पर अपने असाधारण अधिकार क्षेत्र का प्रयोग करने की आवश्यकता नहीं है। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता अन्य कानूनी उपायों का सहारा ले सकते हैं। इस आदेश से यह स्पष्ट हुआ कि हाईकोर्ट ने गैरकानूनी हिरासत के ठोस सबूत की आवश्यकता पर जोर दिया और मौजूदा जांच प्रक्रिया में किसी बाधा की संभावना न होने के कारण याचिका खारिज की। इससे यह भी संदेश गया कि मामलों में अगर पुलिस एफआईआर दर्ज कर और जांच कर रही है, तो ऐसे मामलों में असाधारण अधिकार क्षेत्र का प्रयोग याचिकाकर्ता द्वारा सीधे हाईकोर्ट में नहीं किया जा सकता। इस प्रकार, लापता छात्र के मामले में जांच पहले से जारी है और कोर्ट ने याचिकाकर्ता को वैकल्पिक कानूनी उपाय अपनाने की छूट दी है। पुलिस जांच, एफआईआर और अन्य प्रमाण जुटाने की प्रक्रिया अभी जारी है।
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