छत्तीसगढ़

एक व्यक्ति को खुश करने 70 विधायकों की बलि न लें हाईकमान!

Nilmani Pal
30 Sep 2021 5:32 AM GMT
एक व्यक्ति को खुश करने 70 विधायकों की बलि न लें हाईकमान!
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फाइल फोटो 

पंजाब मे उथल-पुथल के बीच फिर दिल्ली पहुंचे छग के 15 विधायक

जसेरि रिपोर्टर

रायपुर। पंजाब कांग्रेस की राजनीति में मची उथल-पुथल के बीच छत्तीसगढ़ में एक बार फिर ढाई-ढाई साल के मुख्यमंत्री का हल्ला तेज हो गया है। दिल्ली में शक्ति प्रदर्शन और कांग्रेस आलाकमान के हस्तक्षेप के बाद करीब 15 दिन शांत रहे विधायक फिर सक्रिय हो गए हैं। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के समर्थन में करीब 15 विधायक दिल्ली पहुंचे हैं। ये विधायक प्रदेश प्रभारी पीएल पुनिया से मुलाकात करेंगे और प्रदेश में मुख्यमंत्री को बदलने की चर्चा पर विराम लगाने की मांग करेंगे। इन विधायकों का नेतृत्व रामानुजगंज विधायक बृहस्पत सिंह कर रहे हैं। बृहस्पत ने कहा कि कुछ विधायक छत्तीसगढ़ सदन और कुछ विधायक होटल में रुके हैं। विधायक प्रदेश प्रभारी पीएल पुनिया से मुलाकात करेंगे और प्रदेश की राजनीतिक स्थिति के बारे में विस्तार से जानकारी देंगे। बृहस्पत ने कहा कि पहले भी कांग्रेस के 60 विधायकों ने लिखित और मौखिक रूप से मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पक्ष में समर्थन दिया है। आलाकमान को विधायकों ने अपने निर्णय के बारे में बताया है। मुख्यमंत्री पद की दौड़ में शामिल टीएस सिंहदेव का नाम लिए बिना बृहस्पत ने कहा कि किसी एक व्यक्ति को खुश करने के लिए कांग्रेस के 70 विधायकों का भविष्य दांव पर नहीं लगाया जा सकता है। कांग्रेस के उच्च पदस्थ सूत्रों की मानें तो मुख्यमंत्री बघेल के समर्थन में विधायकों से हस्ताक्षर अभियान चलाया गया था, जिसमें तीन मंत्रियों को छोड़कर करीब 52 विधायकों ने हस्ताक्षर करके सहमति दी है।

दिल्ली में क्या हो रहा देखने गए होंगे विधायक: सिंहदेव

स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने विधायकों के दिल्ली जाने के सवाल पर कहा कि यह प्रजातंत्र है और कांग्रेस एक खुला मंच है। शीर्ष नेतृत्व लोगों को मुलाकात का समय देते हैं। इन विधायकों को अगर समय दिया गया होगा तो मुलाकात होगी। सिंहदेव ने कहा कि हम सभी जानते हैं कि छत्तीसगढ़ की राजनीति को लेकर क्या चर्चाएं थी। इसमें छिपने-छिपाने की कोई बात नहीं है। एक बदलाव की बात थी, होगी या नहीं होगी यह बाद की बात है, लेकिन वह बात खुल गई है। पिछली बार जब विधायक दिल्ली गए थे तो इस बात पर चर्चा हो गई थी। हो सकता है कि विधायक अपनी बात रखने गए हों। दिल्ली में क्या हो रहा है, वह देखने गए हों।

राहुल गांधी आएंगे कहकर मामला टालने की कोशिश तो नहीं

करीब 1 महीने पहले छत्तीसगढ़ के विधायकों के दिल्ली कूच के बाद राहुल गांधी के घर से बाहर आए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा था- छत्तीसगढ़ के विकास पर बात हुई और उन्हें प्रदेश आने का न्योता दिया गया उन्होंने इसे स्वीकार कर लिया है और वह संभवत: अगले सप्ताह छत्तीसगढ़ आ सकते हैं। तब बघेल ने आप ष्टरू रहेंगे या नहीं इस सवाल पर पूरे आत्मविश्वास से कहा, 'मैंने तो उन्हें मुख्यमंत्री के रूप में ही छत्तीसगढ़ आने का न्योता दिया है।Ó ढाई साल के बाद दूसरे को सत्ता सौंपने के सवाल पर उन्होंने फिर कहा कि ऐसी कोई बात नहीं हुई। हालांकि एक महीना बीतने को है राहुल गांधी के छत्तीसगढ़ आने का कोई कार्यक्रम अब तक तय हुआ नहीं।

भाजपा ने भी ली चुटकी

भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता संजय श्रीवास्तव ने कांग्रेस के सियासी ड्रामे पर चुटकी ली है। उन्होंने छत्तीसगढ़ से 13 विधायकों के दिल्ली जाने का दावा किया। श्रीवास्तव ने कहा कि कहीं मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का एक और शक्ति प्रदर्शन तो नहीं? उन्होंने कहा कि सत्ता और सीएम की कुर्सी के लिए बीते दिनों 50 से ज्यादा विधायक दिल्ली में शक्ति प्रदर्शन करने गए थे, क्या कहीं कोई कमी रह गई जो विधायक बृहस्पत सिंह सहित 13 विधायक फिर से भूपेश के समर्थन में दिल्ली पहुंच गए। कहीं मुख्यमंत्री को अपनी कुर्सी बचाने 13 विधायक तो नहीं भेजने पड़े?

कांग्रेस पर सवाल उठाने वालों को सीएम भूपेश ने लिया आड़े हाथ

सीएम भूपेश बघेल ने कांग्रेस पर सवाल उठाने वाले नेताओं को लेकर ट्वीट किया है। सीएम ने कहा कि हमें सोनिया और राहुल गांधी पर पूरा भरोसा है, दोनों ने कठिन परिस्थितियों में पार्टी को संभाला है। जो लोग सवाल उठा रहे हैं, उन्हें पार्टी ने क्या-क्या नहीं दिया। सीएम ने कहा कि उनका एजेंडा समझना होगा। कांग्रेस के सीनियर नेता कपिल सिब्बल ने कहा कि लोग पार्टी को छोड़कर जा रहे हैं। ये सोचने की जरूरत है कि पार्टी को कैसे मजबूत किया जाए, उन्होंने कहा कि हमारी पार्टी में इस वक्त कोई अध्यक्ष नहीं है। नहीं पता कौन फैसले करता है? हम जानते भी हैं और नहीं भी जानते हैं। हम ऐसी परिस्थिति में क्यों हैं, इसके लिए सीडब्ल्यूसी की बैठक बुलाई जाए ताकि अंदर खुल कर बात हो जो सार्वजनिक रूप से नहीं हो सकती। अगर पार्टी में अध्यक्ष हो और चुनी गई सीडब्ल्यूसी हो तो ऐसी नौबत नहीं आती, देश हो या पार्टी, सत्ता का एकाधिकार नहीं होना चाहिए।

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