छत्तीसगढ़
झोलाछाप डॉक्टरों और अवैध क्लिनिकों पर स्वास्थ्य विभाग की दबिश
Shantanu Roy
29 Aug 2025 12:02 AM IST

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छग
Gariaband. गरियाबंद। जिले के मैनपुर ब्लॉक में अवैध क्लिनिक और झोलाछाप डॉक्टरों पर स्वास्थ्य विभाग ने बुधवार को कार्रवाई की। हाल ही में पेंड्रा में झोलाछाप डॉक्टर की लापरवाही से युवक की मौत के बाद प्रशासन हरकत में आया और कलेक्टर के निर्देश पर स्वास्थ्य अमले की टीम ने छापेमारी की। टीम को कई ठिकानों पर दवाएं, इंजेक्शन और उपचार उपकरण मिले, लेकिन बड़ी कार्रवाई करने के बजाय सिर्फ नोटिस थमाकर वापस लौट गई।
पहले सरकार क्लिनिक और मल्टी स्पेशलिटी क्लिनिक पर छापा
नर्सिंग एक्ट के नोडल डॉक्टर हरीश चौहान के नेतृत्व में पांच सदस्यीय टीम ने छापेमारी की शुरुआत मैनपुर मुख्यालय से 100 मीटर दूर स्थित सरकार क्लिनिक से की। यहां बिना अनुमति के क्लिनिक संचालित किया जा रहा था। इसके बाद टीम अमलीपदर मुख्य मार्ग स्थित भाठीपारा पहुंची, जहां एक कमरे में मल्टी स्पेशलिटी क्लिनिक चल रहा था। यहां भी संचालक बिना पंजीयन इलाज करते पाए गए। दोनों जगह से दवाएं, ओपन नीडल और अन्य उपकरण बरामद किए गए।
मास्टर ने स्कूल में छुपाए उपकरण
टीम ने इसके बाद सरना बहाल में दबिश दी। यहां एक स्कूल शिक्षक द्वारा इलाज करने की जानकारी मिली थी। छापा मारने पर उसके ठिकाने से दवा और इलाज के प्रमाण मिले। बताया जा रहा है कि जैसे ही उसे टीम की भनक लगी, उसने अपने क्लिनिक से उपकरण हटाकर स्कूल की लैब में छुपा दिए। जब टीम पहुंची तो आरोपी शिक्षक ने उन्हें निजी उपयोग की सामग्री बताकर बचने की कोशिश की।
छापेमारी की भनक मिलते ही झोलाछाप दुबके
अमलीपदर क्षेत्र में 30 से ज्यादा झोलाछाप डॉक्टर सक्रिय बताए जाते हैं। इनमें कुछ बड़े स्तर पर और कुछ छोटे स्तर पर अवैध रूप से उपचार करते हैं। कई को राजनीतिक संरक्षण भी मिला हुआ है। गोहरापदर क्षेत्र में कुछ मेडिकल संचालक झोलाछाप को बैकअप देकर दुकानें चलवाते हैं। जैसे ही उन्हें कार्रवाई की भनक लगी, कई ठिकाने बंद कर भाग गए। खडारीपारा का एक वेटरनरी डॉक्टर, जो इंसानों का इलाज करता था, वह भी छिप गया। अमलीपदर के अंजना क्लिनिक पर भी ताला लटका मिला।
पेंड्रा की घटना ने बढ़ाई सख्ती
हाल ही में गरियाबंद के पेंड्रा इलाके में झोलाछाप डॉक्टरों संजू मंडल और बबलू तांडी ने एक युवक का बवासीर का इलाज किया था। 20 अगस्त को उन्होंने 30 हजार रुपए में सौदा किया था। इलाज बिगड़ने पर पीड़ित पुरुषोत्तम ध्रुव की तबीयत गंभीर हो गई। आरोपियों ने इलाज बीच में छोड़कर उसे लहूलुहान हालत में बंद कमरे में छोड़ दिया, जिससे उसकी मौत हो गई। 26 जुलाई को पुलिस ने दोनों आरोपियों पर आपराधिक प्रकरण दर्ज कर उनकी तलाश शुरू कर दी। इस घटना के बाद कलेक्टर ने जिलेभर में झोलाछापों पर कार्रवाई तेज करने के निर्देश दिए थे।
सिर्फ नोटिस, लाइसेंस लेने की दी सलाह
टीम का नेतृत्व कर रहे डॉक्टर हरीश चौहान ने बताया कि जिन जगहों पर अवैध संचालन के प्रमाण मिले हैं, वहां नोटिस जारी किया गया है। अगर संचालक इलाज जारी रखना चाहते हैं तो उन्हें नर्सिंग एक्ट के तहत पंजीयन कराना होगा। बिना अनुमति के क्लिनिक संचालन पूरी तरह प्रतिबंधित है। उन्होंने कहा कि इस तरह की कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी और शिकायत मिलने पर तत्काल छापेमारी की जाएगी।
सवालों के घेरे में कार्रवाई
हालांकि, लोगों का कहना है कि जब ठोस सबूत और दवाएं जब्त की गईं, तो सिर्फ नोटिस थमाकर छोड़ देना पर्याप्त नहीं है। कई झोलाछाप मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे हैं। प्रशासन की यह नरमी उन पर अंकुश लगाने में कारगर साबित नहीं होगी।
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