छत्तीसगढ़

अचानकमार के साप्ताहिक बाजार में ‘पहल अभियान’ के तहत स्वास्थ्य शिविर

Shantanu Roy
28 Oct 2025 7:43 PM IST
अचानकमार के साप्ताहिक बाजार में ‘पहल अभियान’ के तहत स्वास्थ्य शिविर
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Mungeli. मुंगेली। वनांचल क्षेत्र अचानकमार में सोमवार को एक अद्भुत नज़ारा देखने को मिला। जहां आमतौर पर पुलिस की गश्ती गाड़ियां कानून व्यवस्था संभालने के लिए जाती हैं, वहीं इस बार पुलिस के साथ चिकित्सक और जनसेवा की भावना भी साथ थी। पुलिस अधीक्षक भोजराम पटेल (भा.पु.से.) के निर्देशन में आयोजित ‘पहल अभियान’ के तहत पुलिस टीम अचानकमार टाइगर रिजर्व के ग्राम अचानकमार में आयोजित साप्ताहिक बाजार पहुँची और वहां ग्रामीणों के लिए एक विशेष स्वास्थ्य शिविर और शिकायत निवारण शिविर का आयोजन किया। इस पहल ने न केवल ग्रामीणों के स्वास्थ्य की चिंता की बल्कि उनके दिलों में पुलिस के प्रति नया भरोसा भी जगाया।

🌿 वनांचल में पहुंची पुलिस की ‘पहल’
अचानकमार का इलाका घने जंगलों और दुर्गम पहाड़ियों से घिरा हुआ है। यहां के कई गांव अब भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। ऐसे में जब पुलिस प्रशासन खुद इस इलाके में स्वास्थ्य सेवाएं लेकर पहुँचा, तो ग्रामीणों के चेहरों पर आश्चर्य और खुशी दोनों झलक उठी। ग्राम छपरवा, लमनी, काटामी, बिंदावल, दानावखार, बम्हनी, बिरारपानी, रंजकी समेत करीब 15 गांवों के सैकड़ों लोग इस साप्ताहिक बाजार में जुटे थे। इसी दौरान मुंगेली पुलिस की टीम ने स्वास्थ्य शिविर लगाया, जहाँ ग्रामीणों की नि:शुल्क जांच की गई और जरूरी दवाएं वितरित की गईं।

🩺 स्वास्थ्य सेवा के साथ संवेदना की डोर
शिविर में चिकित्सकों ने ग्रामीणों का ब्लड प्रेशर, शुगर, बुखार, जोड़ों का दर्द, त्वचा रोग, और अन्य बीमारियों की जांच की। कई मरीज ऐसे भी मिले जो वर्षों से किसी न किसी बीमारी से पीड़ित थे, लेकिन इलाज की सुविधा नहीं मिल पाई थी। उन्हें प्राथमिक उपचार के साथ आगे की चिकित्सा के लिए सलाह दी गई। पुलिस अधिकारियों ने भी मौके पर ग्रामीणों से सीधे संवाद किया। महिलाओं, बुजुर्गों और युवाओं से उनकी समस्याएं जानीं — चाहे वो सड़क, बिजली, राशन कार्ड या स्वास्थ्य केंद्र की कमी से जुड़ी हों। कई शिकायतों का मौके पर ही समाधान किया गया।

💬 ग्रामीणों की प्रतिक्रिया — “पुलिस अब हमारी साथी बन गई है”
ग्राम बम्हनी के गंगाराम मरकाम ने कहा “हमने पुलिस को हमेशा अपराध रोकने के लिए देखा था, लेकिन आज वे हमारे इलाज के लिए आए हैं। यह देखकर बहुत अच्छा लगा। ऐसा लगा जैसे सरकार हमारे पास खुद आई हो।” वहीं ग्राम अचानकमार की मीना सकत ने बताया “पहले तो पुलिस वालों से डर लगता था, लेकिन आज उन्होंने हमारे बच्चों का इलाज कराया, हमारी बातें सुनीं। अब लगता है पुलिस हमारी अपनी है।” इन बयानों से स्पष्ट था कि पुलिस और जनता के बीच की दूरी अब कम हो रही है और भरोसे का रिश्ता मजबूत हो रहा है।

👮‍♂️ एसपी भोजराम पटेल का जनसेवा दृष्टिकोण
पुलिस अधीक्षक भोजराम पटेल ने कहा “पुलिस का काम सिर्फ अपराधियों को पकड़ना नहीं, बल्कि समाज की सेवा करना भी है। हम चाहते हैं कि जनता हमें अपना साथी समझे। ‘पहल अभियान’ इसी सोच का विस्तार है, जिसके तहत हम हर उस व्यक्ति तक पहुँच रहे हैं जो सरकारी सुविधाओं से वंचित है।” उनकी इस पहल ने पुलिसिंग की पारंपरिक छवि को मानवीय संवेदना के रंगों से भर दिया है।

📢 स्वास्थ्य सेवा के साथ जागरूकता का अभियान
शिविर में पुलिस ने ग्रामीणों को नशामुक्ति, महिला सुरक्षा, साइबर अपराध, सड़क सुरक्षा और सरकारी हेल्पलाइन नंबरों की जानकारी भी दी। महिलाओं को महिला हेल्पलाइन 1091, साइबर शिकायत के लिए 1930, नशामुक्ति हेल्पलाइन 1933, और आपातकालीन नंबर 112 के बारे में बताया गया। बच्चों को उनके बाल अधिकार समझाए गए और उन्हें नियमित शिक्षा के लिए प्रेरित किया गया। युवाओं को रोजगार योजनाओं की जानकारी दी गई, जिससे वे अपने गांव के विकास में योगदान दे सकें।

❤️ ग्रामीणों की भावनाएँ और पुलिस की जिम्मेदारी
ग्राम बिरारपानी की बुजुर्ग दुर्गावती बाई ने कहा “हमारे गांव में कभी डॉक्टर नहीं आता, लेकिन आज पुलिस डॉक्टर लेकर आई। अब लगता है सरकार हमारी सुन रही है।” इस बयान ने पूरे शिविर के उद्देश्य को सार्थक कर दिया — जनता और प्रशासन के बीच सीधा और भरोसेमंद जुड़ाव।

🌟 जनपुलिसिंग की एक मिसाल
‘पहल अभियान’ ने साबित कर दिया कि पुलिस सिर्फ वर्दी या कानून का प्रतीक नहीं, बल्कि सेवा, संवेदना और सहानुभूति का भी प्रतीक है। मुंगेली पुलिस ने जिस तरह अचानकमार जैसे वनांचल में जाकर सेवा का कार्य किया, उसने जनपुलिसिंग की अवधारणा को नई दिशा दी है। यह कार्यक्रम सिर्फ एक स्वास्थ्य शिविर नहीं था, बल्कि विश्वास की बहाली का उत्सव था — जहां ग्रामीणों ने पुलिस को अपने परिवार का हिस्सा माना और पुलिस ने भी यह दिखा दिया कि “वर्दी का मतलब डर नहीं, भरोसा है।”
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