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छत्तीसगढ़

खुद औरों को दर्द दिए फिरते हैं और कहते हैं सुकून की तलाश है हमें

Admin2
11 Jun 2021 5:35 AM GMT
खुद औरों को दर्द दिए फिरते हैं और कहते हैं सुकून की तलाश है हमें
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ज़ाकिर घुरसेना/कैलाश यादव

कोरोना की दूसरी लहर से निपटने में केंद्र सरकार पूरी तरह नाकाम रही। सब कुछ होने के बावजूद व्यवस्थित अंजाम देने में सरकार पीछे रही। वेक्सीन के मामले में भी हम पीछे रहे इस बारे में कोर्ट ने भी नाराजगी दिखाई थी। जबकि केंद्र सरकार 35 हजार करोड़ खर्च वेक्सीन के लिए कर दिए फिर भी वेक्सीन की किल्लत दूर नहीं हो पायी है। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी ने भी केंद्र सरकार को इस हेतु आगाह कर चुकी हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गृहप्रदेश गुजरात मे कोरोना की दूसरी लहर से हुई मौतों को सरकार छुपा रही थी। लाशो के ढेर को लोगो ने देखा था। सरकार का दावा था कि एक माह में कोरोना से 3578 लोगो की जान गई है जबकि अहमदाबाद के सिर्फ एक अस्पताल में 3416 लोगों की कोरोना से मौत हुई है। प्रधानमंत्री जी के निर्वाचन क्षेत्र वाराणसी में भी कमोबेश यही स्थिति रही है पिछले साल जितनी मौते हुई थी उतनी मौते तो सिर्फ दो माह अप्रैल और मई में हुई है। ये सब कोरोना की दूसरी लहर के कारण था। क्या सरकार का गुजरात मॉडल और वाराणसी मॉडल यही था। अब बिहार सरकार ने भी माना कि कोरोना से 5424 मौतें नहीं बल्कि 9375 मौतें हुई है। जनता में खुसुर-फुसुर है कि भ्रस्टाचार, झूठे अहंकार, जातिवादी राजनीति, स्वयं को श्रेष्ठ मानने की राजनीति से देश की छवि सिर्फ खऱाब हो रही है, अब सरकार को नाकामी छुपाने के बजाय स्वास्थ्य के क्षेत्र में ज्यादा से ज्यादा सुधार करने की जरुरत है। गांव -गांव में अस्पताल खोलने की अभी भी जरुरत है स्वास्थ्य सेवाओं के मामले में हम अभी भी पीछे है। जनता में खुसुर-फुसुर है कि-क्या गुजरात मॉडल और वाराणसी मॉडल यही था।

बाबा रामदेव फुल फार्म में

बाबा रामदेव कोरोना काल में फुलफार्म में चल रहे हैं। पिछले दिनों एलोपैथी को लेकर चर्चा में थे। अब उनका निशाना नजूमी यानि ज्योतिषी हैं। उनका कहना था कि ज्योतिषी सिर्फ लोगो को बेवकूफ बनाते हैं। घर बैठे किस्मत चमकाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि मोदी जी ने एक हजार और पांच सौ के नोट बंद किये तो भी किसी ज्योतिष ने नहीं बताया और कोरोना आने वाला है इसकी जानकारी भी इन्होने देश वासियो को नहीं दी। वे सिर्फ लोगो को बहकाते हैं। वैसे बाबा अब वेक्सीन लगवाने तैयार हो गए हैं। जनता में खुसुर-फुसुर है कि लगता है ऊंट पहाड़ के नीचे आ ही गया।

राहुल गाँधी के बयान में दम है

कांग्रेस सांसद राहुल गाँधी ने कोरोना ने जब भारत में दस्तक दी थी तभी प्रधानमंत्री जी को आगाह किया था कि सतर्क हो जाएं, और सुझाव भी दिया था। लेकिन उनकी बातो को हलके में ले लिया गया और देखते देखते पूरे देश में कोरोना फ़ैल गया। जब कोरोना भारत में चरम पर था तब प्रधानमंत्री को सभी दलो से अपील भी करना पड़ा था कि कोरोना एक आपदा है इसे सबको मिलकर हराना होगा। जैसे-तैसे अभी कोरोना संक्रमण कुछ कम हुआ है। अब शिवसेना सांसद ने माना कि राहुल गाँधी द्वारा अतीत में कही गई कई बातें तथ्यात्मक रूप से सही थी, इतना ही नहीं केंद्र सरकार ने बाद में उनकी बातो पर अमल किया था। जनता में खुसुर-फुसुर है कि सलाह अगर सही हो तो विरोधी की भी माननी चाहिए।

गुड़ खाएंगे गुलगुले से परहेज करेंगे

उत्तरप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव कोरोना संक्रमण रोकने लगाए जा रहे टीके को भाजपा का टीका कह कर लगवाने से इंकार कर दिया था। उनके पापा मुलायम सिंह यादव ने टीका लगवा लिया है. ऐसे में अब अखिलेश यादव कह रहे हैं कि वे भारत सरकार का वेक्सीन लगवाएंगे। इसे कहते हैं गुड़ खाएंगे गुलगुले से परहेज करेंगे।

गोधन न्याय योजना पूरे देश में

भूपेश बघेल सरकार की बहुचर्चित छत्तीसगढ़ गोधन न्याय योजना का अब पूरे देश में चर्चा होगी। स्वछता व् पेयजल मंत्रालय ने भूपेश सर्कार की इस योजना की जमकर तारीफ की है। दरअसल स्वच्छ भारत मिशन के तहत गोधन न्याय योजना में छत्तीसगढ़ ने पूरे देश में बेहतर प्रदर्शन किया है, इससे प्रभावित होकर केंद्र की मोदी सरकार अब इसी तजऱ् पर इस योजना को पूरे करने का मन बना चुकी है। निश्चित रूप से यह छत्तीसगढिय़ों के गर्व की बात है। बधाई हो दाऊ जी छत्तीसगढिय़ों का मान बढ़ाया आपने ।

21 वी सदी के डाक्टर

आगरा में एक अस्पताल संचालक ने अजीबोगरीब हरकत की। आज हम इक्कीसवी सदी में खड़े हुए है और अस्पताल संचालक मरीजों का मजऱ् मालूम करने आदम ज़माने में चले गए। दरअसल हुआ ये कि आगरा में अस्पताल संचालक ने सिर्फ ये जानने ऑक्सीजन की सप्लाई बंद कर दी थी कि किस मरीज को ऑक्सीजन की जरूरत है और किसे नहीं। जिन मरीजों को ऑक्सीजन की जरुरत थी वो सभी चल बसे और जिन्हे ऑक्सीजन की जरुरत नहीं थी वो बच गए। जनता में खुसुर-फुसुर है कि एक समय में डाक्टरों को भगवान का रूप माना जाता था कोरोना ने सब कुछ साफ कर दिया। जिस प्रकार डाक्टरों ने दोनों हाथो से लूटा शैतान भी शरमा जाये। भला हो भूपेश बघेल सरकार का जिसने डाक्टरों पर अंकुश लगाया वर्ना मरीज कोरोना से कम और डाक्टरों के फ़ीस से ज्यादा मरते। उदाहरण के तौर पर डाक्टर ने दस लाख का बिल बनाया सरकार की सख्ती के कारण माफ़ी मांगते हुए सही बिल दो लाख तक का बनाया, यानि आठ लाख रूपये ज्यादा कैसे लिया समझ से परे।

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