छत्तीसगढ़

रहने दिया ना उसने किसी काम का मुझे, और खाक में भी मुझको मिला कर गया

Nil dhankar
27 Jun 2025 10:37 AM IST
रहने दिया ना उसने किसी काम का मुझे, और खाक में भी मुझको मिला कर गया
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ज़ाकिर घुरसेना/ कैलाश यादव

पिछले दिनोडोंगरगढ़ के प्रज्ञा गिरी पहाड़ी के पास एक योग गुरु बाबा कांति अग्रवाल अवैध रूप से गांजा बिक्री करते धरे गए। गांजा के अलावा अनैतिक सामान भी मिला है यानी शराब और शबाब का पूरा इंतजाम था बाबाजी के आश्रम में। थाईलैंड बैंकाक पटाया जाने वालों में कमी आने पर लोगों को अब समझ आया की जब सस्ते में सब कुछ यहीं पर सुविधा उपलब्ध है तो बबाहर क्यों जाकर पैसा खर्चा किया जाए। यह भी जानकारी मिली कि आरोपी गोवा में विदेशी पर्यटकों को योग ध्यान सिखाता था। प्रज्ञा गिरी पहाड़ी के फार्म हाउस में असामाजिक तत्वों का डेरा लगा रहता था आसपास के गुंडे मावली और बिगड़े नवाब डोंगरगढ़ की ओर आना जाना बढ़ गया था। लोगों को लगा की अब इंसान में योग करने की ललक बढ़ गई है लेकिन उन्हें क्या पता की योग नहीं भोग के नाम से लोगडोंगरगढ़ की ओर भागे जा रहे हैं। आरोपी ने बताया है कि वह बीते 20 वर्ष से गोवा में निवासरत है और विभिन्न यूनिवर्सिटी से योग की उपाधि लेकर विदेशियों को ट्रेनिंग दे रहे हैं। जनता में खुसुर फुसुर है कि छत्तीसगढ़ की धरती को सुरक्षित ठिकाना मान कर वह डोंगरगढ़ आए थे, ताकि अपने योग आश्रम और यहाँ के लोगो को डेवलप कर सके लेकिन उसके पहले ही पुलिस ने डेवलप कर जेल के हवाले कर दिया। इसी बात पर किसी ने ठीक ही कहा है- रहने दिया ना उसने किसी काम का मुझे, और खाक में भी मुझको मिला कर गया।

दोहरी नीति वाली ट्रिपल इंजन सरकार, पार्टी मस्त जनता त्रस्त

सरकार को दोहरी भेदभाव वाली नीति से आम उपभोक्ता हलाकान है। .यदि किसी आम उपभोक्ता का 230 रूपए बकाया हो तो तत्काल बिजली काट देती है औऱ यदि बिजली वितरण कंपनी की दंबग नगर निगम बकाया बिजली के 230 करोड़ रुपए दबाकर बैठा हुआ है। औऱ बिजली कंपनी कुछ नहीं कर पा रही है। करीब डेढ़ साल से बिल का एक रुपए भुगतान नहीं किया गया है. इसलिए उसमें लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है. जबकि नगर निगम शहरवासियों से हर साल टैक्स वसूलती है। ये पूरा मामला है हमारे उपमुख्यमंत्री अरूण साव जी के विधानसभा क्षेत्र बिलासपुर का। जहां भाजपा की ही परिषद होने के बाद भी लूट की छूट का लाइसेंस दे दिया है। जनता में खुसुर-फुसुर भाजपा का ये ड्रिपल इंजन का कमाल है। सुशासन की नई परिभाषा गढऩे वालों के खिलाफ विपक्ष सरकार को घेरने में कोई कोताही नहीं बरत रही है। सत्ता पक्ष के लोगों का कहना है कि हमारी सरकार सुशासन की पक्षधर है , जब तक केंद्र से भऱपेट भोजन नहीं मिलता है हम डकार तक नहीं लेते है। यही सुशासन है काम करते कम है औऱ चिल्लाचोट ज्यादा करके जनता को जोड़े रखते हैं।

जय जगन्नाथ, बिना शपथ के मंत्री जैसा पावर

प्रदेश में 13 वें मंत्री की तलाश स्थानीय विधायक की दावेदारी तय मानी जा रही है। हमारे एक माननीय राज्यपालों के खास रहे है। टिकट भी राज्यपाल कोटे से मिली थी, ऊपर से भगवान जगन्नाथ की कृपा बरस रही है। जिस सरकार की पार्टी हो और उस सरकार के पार्टी का विधायक होना वो भी राजधानी में तो किसी मंत्री से कम पावरफुल नहीं होता है। विधायक जो भी होते है वो राज्य़पाल साल में चार-पांच बार जगन्नाथ मंदिर बुला कर भगवान जगन्नाथ की दर्शन करवा देते है। अब तो सरकार के हर कार्यक्रम में मुख्य अतिथि भी बन रहे है समझा जा सकता है कि मंत्री का ओहदा मिल गया है। रथ यात्रा में ‘छेरा पहरा’ एक विशेष और पवित्र परंपरा है. रथ यात्रा से पूर्व रथ के मार्ग को स्वर्ण झाड़ू से साफ किया जाता है, जिसे भक्ति और विनम्रता का प्रतीक माना जाता है। इस परंपरा में पुरी के गजपति राजा या उनके प्रतिनिधि झाड़ू लगाकर सुगंधित जल का छिडक़ाव करते हैं और रथों को प्रणाम करते हैं. इसका उद्देश्य भगवान के मार्ग को शुद्ध और मंगलकारी बनाना होता है। जनता में खुसुर-फुसुर है कि हमारे विधायक को भगवान जगन्नाथ का भरपूर आशीर्वाद मिल रहा है। सोने की झाड़ू वो राज्यपालों से लगवा रहे हैं यही है जय जगन्नाथ की कृपा। जनता की सुनवाई में पहले नंबर है पर काम किसी का नहीं हो रहा है। ये भी जगन्नाथ की कृपा है।

मेका हारा से कोई नहीं जीत पाया

मेकाहारा प्रदेश का सबसे बड़ा अस्पताल है यो तो सर्वविदित है लेकिन इसके बड़े होने में और स्टार जुड़ गए है। अभी हाल ही में एक फरमान को लेकर बहुत जद्दोजहद हुआ । बड़े अधिकारियों की कारस्तानी पर सरकार को सीधे एक्शन लेना पड़ा। उसके बाद भी वहां की व्यवस्था में कोई सुधार नहीं हो पाया यहां जो भी आता है हार कर जाता है इसिलए लोग इसे मेकाहारा कहते है यानी मैंक्या हारा तू भी आया तू भी हारा । वो अपनी जिंदगी से हार जाता है। इलाज कराने आने वाले परिजन इसके शिकार हो रहे है। वही सिक्योरिटी गार्ड सैया भये कोतवाल की तर्ज पर किसी का भी पर्स पैसा या जरूरी सामान पार कर देते है। ऊपर से साहूकारी बताते है कि हम तो यहां चोर-उठाई गिरों को घुसने नहीं देते है तो फिर चोरी कौन कर रहा है। जनता में खुसुर-फुसुर है कि यहां के सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाने वाले ही जनता को लूट रहे है। हे भगवान तूने मेकाहारा ही क्यों बनाया जो सुरक्षा के नाम पर जनता का रूपया पैसा पर्स जेवर गहने उड़ाने का अड्डा बना दिया है।

राजधानी को इंदौर के तर्ज पर बनाने का संकल्प

मध्य़प्रदेश की औद्योगिक राजधानी इंदौर के तर्ज पर रायपुर को बनाने का संकल्प पारित हो चुका है। गांव बसने से पहले ही डकैतों ने डेरा डाल दिया है। जिस राजधानी को 15 साल तक एक पार्टी ने अपने निजी संपत्ति की तरह इस्तेमाल किया है उसका मार्डन सिटी की तरह बनना असंभव तो नहीं पर इच्छा शक्ति के साथ फाइनेंस की भी जरूरत है। जब भी नगर निगम को केंद्र की शहरीय विकास मंत्रालय से फंड मिला है । उसका सत्ताधारी दल सफाई से लेकर मल्टी पार्किंग बनाने तक भरपूर दोहन किया है। शारदा चौक चौड़ा करण के नाम पर जिस प्रकार सब्ज बाग दिखा रहे क्या इसे भी जनता सब्ज बाग माने क्योंकि शारदा चौक में निगम का पैसा खर्चा होगा औऱ होर्डिग्स में निगम को पैसा मिल रहा है। जनता में खुसुर -फुसुर है कि क्या गारंटी इंदोर की तरह बनाने के चक्कर में विकास की जगह तीन चार स्काईवाक बना दिया जाए । इंदौर में तो भाजपा के ही महापौर रहे है जो लेकिन रायपुर में तो 15 साल भाजपा शहरी सरकार की सत्ता संभाली है। जनता को खबर लगी है कि इंदौर की तरह बनाने की दौड़ में अपनों को उपकृत करने की महागठबंधन किया जा रहा है ताकि 15 साल का कसर पांच साल में निकाल लिया जाए।

इनाम पर इनाम, फिर भी नहीं बन रहे काम

तोमर बंधु पहले कर्जदारों को पकड़ कर लाने वालों को इनाम देते थे और आज इसके ठीक उलट पुलिस वाले तोमर बंधु का पता बनाने वाले को इनाम देने की घोषणा कर रहे है। माजरा जनता के समझ में नहीं आ रहा है। जनता तो चाहती है कि उनकी गाढ़ी कमाई और खून पीकर जो महल या हवेली खड़ी की है उसे बेच कर उनका पैसा लौटाया जाए ताकि सौ गुना जो ब्याज दिया है उसकी भरपाई वसूली से हो जाए। जनता में खुसुर-फुसुर है कि तोमर को संरक्षण देने वालों को पहले पकड़े तो तोमर बंधु जहां भी छुपे है वो खुद -ब- खुद बिल से बाहर आ जाएंगे। यहां तो पुलिस ने इनाम देने की घोषणा कर मामले में पेचिदा बना दिया है। इस काम की घोषणा तो बाद में भी कर सकते थे। क्योंकि तोमर बंधु तो कहीं न कहीं छुपे तो होंगे । जिस तरह संदूक में लाश मिलते ही ट्रंक वाले को पकड़ कर मामले को सुलझाया वैसी ही कुछ रणनीति पुलिस को बनानी चाहिए। जिससे तोमर बंधु बिल से बाहर आए पुलिस उसे दबोच लें।

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