अपने पंखों पर भरोसा रख, हवाओं के भरोसे तो पतंगे उड़ा करती हैं

कैलाश यादव/ज़ाकिर घुरसेना
कहीं खुशी कहीं गम का दौर
धड़ाधड़ निगम -आयोग-मंडलों में नियुक्ति से भाजपाई खेमें में कही खुशी कही गम का दौर देखा जा रहा है । एक तरफ मंत्रिमंडल के विस्तार में रोक लगने के साथ भावी मंत्री मायूस है तो दूसरी तरफ नए निगम- मंडलों-आयोगों में थोक में नियुक्ति से पुराने और वरिष्ठ सक्रिय कार्यकर्ता अपनों से ही पूछ रहे हैं कि निगम मंडलों में नियुक्ति की सूची भी ऊपर से आई है क्या । जनता में खुसुर-फुसुर है कि एक तरफ तो सरकार छत्तीसगढ़ में सरगुजा से लेकर बस्तर तक पर्यटन की अपार संभावनाएं देख रही है वही दूसरी ओर जो पार्टी के लिए तन-मन-धन से वर्षो से सेवा दे रहे हैं उनकी अनदेखी हो रही है। राज्य में डबल इंजन की सरकार के प्रभावी है फिर भी जो इंजन पार्टी में चलते-चलते थक गए हैं उनके तेल पानी का इंतजाम तक नहीं हो रहा है। नक्सलवाद के खात्मे के बाद वहां पर्यटन के नए द्वार खुलेंगे ये भी सच है पर जो वरिष्ठ कार्यकर्ता उपेक्षा का दंश झेल रहे वो अभी भी पार्टी के लिए अबूझमाड़ बने हुए हैं उनके प्रोत्साहन की सरकार के पास कोई योजना नहीं है। वो तो सबका साथ सबका विकास के मायने पूछ रहे है क्या हमारे हिस्से में सत्ता सुख का विकास आएगा या नहीं इस पर रोने के लिए मजबूत कंधा ढूंढ रहे हैं ताकि अपनी पीड़ा बता सके। अब वो हमने ही बनाया है हम ही संवारेंगे के भी मतलब निकालने में जुट गए हैं।
‘मोर दुआर साय सरकार’
प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत ‘आवास प्लस 2.0’ सर्वेक्षण पखवाड़ा के अंतर्गत छूटे हुए पात्र ग्रामीण परिवारों को लाभान्वित करने हेतु महासमुंद जिले में विशेष सर्वेक्षण पखवाड़ा की शुरुआत की गई है। यह कार्य ‘मोर दुआर साय सरकार’ अभियान के तहत किया जा रहा है यह अभियान 15 अप्रैल से 30 अप्रैल 2025 तक चलेगा, जिसका उद्देश्य स्थायी प्रतीक्षा सूची एवं पूर्ववर्ती आवास प्लस सूची में छूटे हुए पात्र ग्रामीण परिवारों की पहचान कर उन्हें पक्के आवास का लाभ दिलाया जाएगा ऐसा माना जा रहा है। जनता में खुसुर-फुसुर है कि साय सरकार की पहल तो बहुत अच्छी है पर अधिकारियों के भरोसे सर्वे होने है और पक्के मकान मिलने है तो समझ लीजिए उन हितग्राहियों का सपना सपना ही बना रहेगा कभी यथार्थ में नहीं बदलेगा। क्योंकि अधिकारी तो सुशासन तिहार के आवेदन लेने में आना कानी कर रहे थे, तो मकान दिलाने की जिम्मेदारी सौंप दी गई तो वे अगले चुनाव तक कच्चे मकान में ही रहने की सोच ले क्योंकि सर्वे का सच सभी जानते है जिन लोगों को अभी हितग्राही मानकर मकान दिए है उनके पास राजनीतिक अस्त्र है जो नेतागिरी करके वास्तिवक हितग्राहियों के हक छीन लिए हैं। जनता में खुसुर-फुसुर है कि सर्वे के नाम पर राजनीति करने के बजाय जो वास्तविक में कच्चे मकान में रह रहे है उनको पक्का मकान देने का इरादा पक्का करना चाहिए सरकारी योजना के पीछे राजनीति जुड़ी होती है। इसमें भी गरीब वंचित देखने के बजाय भाजपा -कांग्रेस देखते ही योजना पर ग्रहण लग जाता है।
सुनियोजित साजिश का हिस्सा है कलेक्टोरेट को उड़ाने की धमकी
अयोध्यया में रामलला मंदिर को बम से उड़ाने की धमकी के बाद कवर्धा में उस समय हड़कंप मच गया, जब जिला कलेक्टर कार्यालय को आरडीएक्स से उड़ाने की धमकी भरा एक ईमेल मिला। यह धमकी भरा मेल कथित तौर पर कश्मीर से भेजा गया है। मेल में तमिलनाडु में एआईएडीमके नेता एडप्पादी के. पलानीस्वामी की हत्या की साजिश का भी जिक्र है। धमकी में कहा गया है कि यह हमला तमिलनाडु से ध्यान हटाकर छत्तीसगढ़ की ओर मोड़ने की एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा है। मेल के अनुसार, यह साजिश अंतरराष्ट्रीय संगठन कार्टेल और तमिलनाडु के कुछ भ्रष्ट अधिकारियों द्वारा रची गई है, जिसमें आरएक्स-एस गैलीलियो रिमोट कंट्रोल सिस्टम के जरिए विस्फोट को अंजाम देने की बात कही गई है। जनता में खसुर-फुसुर है कि बम तो बम होता भाई वो किसी को पहचानती थोड़ी है उसका काम तो फूटना है भले ही आप निर्दोष हो उसका काम चोट पहुंचाना है। बस के बजाय सोशल मीडिया में बम फेंककर देश में तो दहशत तो बना दिया है। जनता में खुसुर-फुसुर है कि भले ही कोई नुकसान नहीं पहुंचाया है पर दहशत में डाल कर किसी नए मिशन के ध्यान भटकाने की साजिश भी हो सकती है। सरकार औऱ पुलिस प्रशासन को अलर्ट रहने की जरूरत है ताकि समय पर विघ्न संतोषियों से निपटा जा सके।
बगावत का नाम ही कांग्रेस
कहा जाता है कि कांग्रेस में बगावत पीछा छोड़ती ही नहीं है बगावत चाहे जिला स्तर पर हो या हाई कमान स्तर का हो। पिछले दिनों गुजरात अधिवेशन में राहुल गाँधी ने फूल छाप कांग्रेसियों को निकल बाहर करने की घोषणा कर सबको सकते में डाल दिया था। देश भर में प्रतिक्रिया हुई थी कांग्रेसी एक दूसरे का मुंह ताकने लगे थे। अब रायपुर नगर निगम में बगावत के सुर दिखने लगा है होगा क्यों नहीं काम ही ऐसा हुआ है। पहले नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष संदीप साहू को बनाया गया था अब कुछ ही दिनों में उन्हें हटाकर निर्दलीय पार्षद बने आकाश तिवारी को नेता प्रतिपक्ष बना दिया गया। जनता में खुसुर फुसुर है कि ये कांग्रेस है बाबू पैसा फेक तमाशा देख।
तू डाल डाल मैं पात पात
राजधानी पुलिस को अब सट्टा स्क्वाड भी बना चाहिए। रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस विभाग में अभी भी कई रिक्तियां है और ऊपर से महादेव सट्टा बुक के कर्ताधर्ताओं ने नाक में दम कर रखा है कितने लोगों को पकड़ लिए लेकिन कम होने का नाम ही नहीं ले रहा। ऐसा लग रहा है कि सट्टा तो कम होने का नाम ही नहीं ले रहा है तो क्रिकेट को ही बंद कर दें। सारे सटोरिये अब यहाँ से भागकर बंगाल और असम पहुंच कर वहीं से खेल चालू कर दिए और धरे भी गए। जनता में खुसुर फुसुर है कि पुलिस को एक सट्टा स्क्वाड भी बना देना चाहिए जो केवल सटोरियों पर नज़र रखे।
समय समय का खेल है भाई
पिछले दिनों कद्दावर पूर्व मंत्री और रायपुर पश्चिम विधायक राजेश मूणत काफी नाराज दिखे। मामला राजीव अग्रवाल के शपथ ग्रहण के अवसर का था एक पुलिस अधिकारी ने उन्हें सुरक्षा कारणों से अंदर जाने से रोक दिया परिचय देना भी काम नहीं आया आखिरकार मूणत ने कार्यकम में जाना मुनासिब नहीं समझा और उलटे पैर वापस आ गए। इसी बात पर पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी की बात याद आती है जिसमें उन्होंने कहा था कि राजनीतिज्ञ घुड़सवार की मानिंद होते हैं और ब्यरोक्रेट घोड़े के सामान। यानी लगाम खींच कर रखना पड़ेगा वर्ना घोड़ा पटकने में देरी नहीं करेगा. कल के इस वाकिये से जनता में यही खुसुर फुसुर हो रही थी कि अजित जोगी जी ने सही कहा था, ब्यूरोक्रेट को टाइट करके रखना जरुरी है तभी सुशासन होगी।
नकली को असली बनाने की जिद
नकली पनीर बाजार में धड़ल्ले से बिक रहा है। क्योंकि ऐसा खाद्य पदार्थ है जिसमें किसी को भी पहचान नहीं कि पनीर नकली है या असली है, बस खाने से काम है. इसका फायदा पनीर माफिया उठ रहे है। राजधानी रायपुर अपने जन्म के साथ ही माफियाओ्ं का दंश झेल रहा है जिसका खात्मा आज तक नहीं हो पाया । मजेदार बात यह है कि सट्टा, गांजा, नकली दवाई ,अफीम की तस्करी का देश का सबसे बड़ा कारिडोर बना हुआ है। इन 25 सालों में छत्तीसगढ़ नकली उत्पादों के जद में ही रहा है। मप्र का पनीर माफिया ने छत्तीसगढ़ को सुरक्षित ठिकाना मान कर यहां धड़ल्ले से नकली पनीर खिला कर पूरे छत्तीसगढ़ को बीमार कर दिय़ा है। मध्यप्रदेश में मिलावटखोरों के खिलाफ रासुका कानून लगने के कारण वहां के मिलावटखोर छत्तीसगढ़ की ओर आ रहे है। क्योंकि यहां मिलावट के लिए सख्त कानून नहीं और यदि पकड़े गए तो अधिकारी भगवान के रप में आकर बचा लेते हैं। यानी छग मिलावटखोरों को लिए स्वर्ग हो गया है। जनता में खुसुर-फुसुर है कि लोग मरने के बाद स्वर्ग जाने की बात करते है यहां तो मिलावटी जीते जी लोगों को स्वर्ग का रास्ता दिखा रहे हैं।





