छत्तीसगढ़

जीएसआई ने रायपुर में मनाया 175वां स्थापना दिवस समारोह

Nilmani Pal
4 March 2025 3:55 PM IST
जीएसआई ने रायपुर में मनाया 175वां स्थापना दिवस समारोह
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रायपुर। भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जी.एस.आई) ने 02 मार्च, 2025 को रायपुर में अपने राज्य इकाई कार्यालय में अपना 175वां स्थापना दिवस समारोह प्रारंभ कया। सन् 1851 में स्था पत भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जी.एस.आई) भारत के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित वैज्ञानिक संगठनों में से एक है। वर्षों से, जी.एस.आई ने भूवैज्ञानिक अनुसंधान, खनिज अन्वेषण और आपदा अध्ययन में महत्वपूर्ण भूमका निभाई है। जी.एस.आई ने कोयला, लौह अयस्क और तांबे जैसे महत्वपूर्ण खनिज संसाधनों की खोज करके भारत के औद्यो गक वकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

स्थापना दिवस का शुभारम्भ जी. एस. आई, रायपुर व क्षेत्रीय प्र शक्षण संस्थान के द्वारा संयुक्त रूप से 02 मार्च, 2025 को वाकाथॉन के आयोजन से कया गया। स्थापना दिवस समारोह का समापन 4 मार्च, 2025 को जी.एस.आई,रायपुर के उप महानिदेशक, अ मत धारवाडकर द्वारा एक दिवसीय प्रदर्शनी समारोह के उद्घाटन के साथ कया गया। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन से हुई, जिसके बाद अमत धारवाडकर ने अपने संबोधन में राष्ट्र की खनिज अन्वेषण में उपलब्धियां और भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के भू- वज्ञान क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमका को दर्शाया।


खनिज संसाधनों से समृद्ध राज्य छत्तीसगढ़, भारत की खनिज आपूर्ति को सुरक्षत करने के लए महत्वपूर्ण है। राज्य में टिन अयस्क, बॉक्साइट, लौह अयस्क, कोयला, चूना पत्थर आदि के वशाल भंडार है। 2015 के खान और खनिज ( वकास और वनियमन) संशोधन अ धनियम के तहत, जिसने खनिज ब्लॉकों के लए नीलामी प्र क्रया को लागू कया, जी. एस. आई की छत्तीसगढ़ राज्य इकाई ने जी 2 / जी 3 स्तर के 29 खनिज ब्लॉक को सौंपा जिनमें बॉक्साइट, चूना पत्थर, ग्लूकोनाइट, फॉस्फोराइट, सोना और ग्रेफाइट जैसे महत्वपूर्ण खनिज शा मल हैं। इसके अतिरिक्त, 2021 के खान और खनिज ( वकास और वनियमन) संशोधन अधनियम के तहत, जी. एस. आई की छत्तीसगढ़ इकाई ने G4 चरण के 30 संभा वत खनिज ब्लॉकों की पहचान की जिनमें ल थयम, ग्रेफाइट, ग्लूकोनाइट और फॉस्फोराइट जैसे महत्वपूर्ण खनिज शामिल है। छत्तीसगढ़ में कोरबा के कटघोरा में भारत के पहले ल थयम खदान की निलामी हुई जो क राज्य इकाई: छत्तीसगढ़, भा.भू.स की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। राज्य इकाई स्वच्छ ऊर्जा की बढ़ती मांग को देखते हुए, ल थयम और ग्रेफाइट खनन के लए संभा वत क्षेत्रों की पहचान करने में सक्रय रूप से लगी हुई है। इसके अतिरिक्त, उर्वरक खनिजों जैसे ग्लूकोनाइट और फॉस्फोराइट की पहचान में महत्वपूर्ण प्रगति की जा रही है, जो भारत के लए आवश्यक है क्यों क देश इनकी पूर्ति के लए आयात पर निर्भर है। इन अभूतपूर्व खोजों से पूरे क्षेत्र में औद्यो गक वकास और तकनीकी प्रगति का मार्ग प्रशस्त होगा ।


इस कार्यक्रम में 200 से अधिक प्रतिभा गयों ने हिस्सा लया जिसमें शासकीय दिग्विजय स्वशासी स्नातकोत्तर महावद्यालय, राजनांदगांव, शासकीय वश्वनाथ यादव तामस्कार स्नातकोत्तर स्वाशासी महावद्यालय, दुर्ग; शासकीय नागार्जुन स्नातकोत्तर वज्ञान महा वद्यालय रायपुर ; राष्ट्रीय प्रौद्यो गकी संस्थान, रायपुर और पं डत र वशंकर शुक्ल वश्व वद्यालय के भू वज्ञान के छात्र उपस्थित थे। कार्यक्रम जी.एस.आई के कर्मचारी, सेवानिवृत्त कर्मी और स्थानीय समुदाय के सदस्यों ने भी हिस्सा लया ।

डॉ. अशोकादित्य पी. धुरंधर ने तकनीकी व्याख्यान दिया, जिसके बाद डॉ. नीरज वश्वकर्मा ने एक आकर्षक व्याख्यान दिया। इस दिन भर की सार्वजनिक प्रदर्शनी में राज्य में जी.एस.आई की गति व धयों का प्रदर्शन कया गया, जिसमें व भन्न भूवैज्ञानिक मान चत्र, शैल प्रकार, अयस्क खनिज, जीवाश्म और जी.एस.आई के योगदान को दर्शाने वाली एक दृश्य-श्रव्य प्रस्तुति शा मल थे। अ मत धारवाडकर द्वारा उद्घाटन की गई प्रदर्शनी का उद्देश्य राष्ट्र निर्माण में भू वज्ञान के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाना था और यह प्रदर्शनी संध्या 6:00 बजे तक चलती रही।

इसके अतिरिक्त व भन्न महा वद्यालयों एवं संस्थानों से आये हुए छात्रों के लए कई प्रतिस्पर्धी कार्यक्रम आयोजित कए गए, जिनमें 3 डी मॉडल डस्प्ले और प्रश्नोत्तरी प्रतियो गता था मल थे। श्री अ मत धारवाड़कर ने वजेता टीम को पुरस्कृत कया और सभी प्रतिभा गयों को प्रमाण पत्र प्रदान कया ।

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