छत्तीसगढ़

समूह की महिलाएं बना रही ईंट

Shantanu Roy
14 May 2022 6:24 PM GMT
समूह की महिलाएं बना रही ईंट
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दंतेवाड़ा। स्त्री को अबला समझने वालों के लिए कुआकोंडा के समेली में नई मिसाल सामने आई है। यहां की महिलाएं सबला के रूप में तब्दील हो चुकी है। वे अब ईंट निर्माण कर रही हैं। जिला मुख्यालय से 55 किलोमीटर दूर विकासखण्ड कुआकोण्डा से 25 किमी. की दूरी पर वनाच्छादित क्षेत्र में ग्राम समेली स्थित है।

चारों तरफ से पहाडिय़ों से घिरा बेहद ही खूबसूरत ग्राम है। ग्राम समेली में मुख्यमंत्री की महत्वाकांक्षी गोधन न्याय योजना अनुरूप गौठान निर्माण किया गया है। उक्त गौठान में विभिन्न प्रकार के आजीविका संबंधित गतिविधियां संचालित की जा रही है। जिसमें से राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के मोंगरा स्व-सहायता समूह की दीदीयों द्वारा सीमेंट के बड़ी ईंटों का निर्माण किया जा रहा है।

गौठान में ही कई प्रकार के निर्माण कार्य हो रहे है। जिसमें ईंट बाहर से लाई जा रही थी। यह दीदीयों का हौसला ही है कि मात्र एक माह के भीतर बिना किसी मशीन के हस्त निर्मित सांचे से 6 हजार से अधिक पुल साईज के ईंटो का निर्माण किया है। और निर्माण कार्य अभी भी जारी है।

अब तक 37 हजार की हो चुकी है आय
स्व-सहायता की समूह की दीदीयों द्वारा 29 सौ ईंटों की बिक्री भी किया जा चुका है। जिसे दीदीयों ने 23 रूपये प्रति नग की दर से विक्रय कर 66 हजार 700 रुपए की कमाई की है। प्रत्येक ईंट में 12 से 13 रूपये तक की बचत आती है। जिसमें दीदीयों को 37 हजार 700 रूपये का शुद्ध लाभ प्राप्त हुआ है। प्राप्त लाभ और अपनी मेहनत का इतना सफल परिणाम देख समूह की दीदियों में उत्साह और बढ़ गया है। दीदीयों को वर्तमान में 6 हजार ईंटों का आर्डर 25 रूपये प्रति नग की हिसाब से प्राप्त हुआ है। जिससे इन्हें 90 हजार रूपये शुद्ध लाभ के रूप में प्राप्त होगी।
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