छत्तीसगढ़
किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी! अब मोबाइल से बुक होगी खाद; QR कोड से मिलेगा यूरिया, जानिए पूरा तरीका
Shubhra Nandy
6 Nov 2026 8:54 AM IST

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बालोद : छत्तीसगढ़ के किसानों को रासायनिक खाद प्राप्त करने में सुविधा देने के लिए उर्वरक वितरण व्यवस्था को डिजिटल बनाया जा रहा है। अब किसान अपने मोबाइल फोन से खाद की बुकिंग कर सकेंगे और डिजिटल टोकन या क्यूआर कोड के जरिए निर्धारित बिक्री केंद्र से उर्वरक प्राप्त कर सकेंगे। भारत सरकार और छत्तीसगढ़ शासन की इस नई व्यवस्था का उद्देश्य खाद वितरण को पारदर्शी, व्यवस्थित और किसान-केंद्रित बनाना है। बालोद जिले में कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा के निर्देश पर कृषि विभाग ने इसके क्रियान्वयन की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
नई व्यवस्था के तहत किसानों को 'फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल' (Framework for Fertilizer Sale-FFS) मोबाइल एप का उपयोग करना होगा। किसान गूगल प्ले स्टोर से एप डाउनलोड कर निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार पंजीयन और खाद की बुकिंग कर सकेंगे। इसके बाद उनके मोबाइल पर टोकन नंबर और क्यूआर कोड उपलब्ध होगा। किसान इसी टोकन के आधार पर संबंधित सहकारी समिति या अधिकृत उर्वरक बिक्री केंद्र से खाद खरीद सकेंगे।
जिले में इस डिजिटल व्यवस्था के माध्यम से खाद वितरण की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। कृषि विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, गुरुर विकासखंड के ग्राम रजोली निवासी किसान रिसन चंद्राकर, ग्राम परसदा के उदयमन लाल साहू तथा ग्राम भरदाकला के प्रहलाद निषाद को सहकारी समिति में क्यूआर कोड के माध्यम से एक-एक बोरी यूरिया उर्वरक का वितरण किया गया। नई प्रक्रिया से किसानों को खाद की बुकिंग के लिए बार-बार बिक्री केंद्र पहुंचने की जरूरत कम होने की उम्मीद है। किसान अपने मोबाइल फोन से आवश्यक उर्वरक की मांग दर्ज कर सकेंगे। हालांकि खाद प्राप्त करने के लिए उन्हें निर्धारित बिक्री केंद्र पर जाकर टोकन या क्यूआर कोड प्रस्तुत करना होगा। खाद की उपलब्धता और निर्धारित पात्रता के अनुसार उर्वरक का विक्रय किया जाएगा।
जिन किसानों के पास स्मार्टफोन नहीं है, उनके लिए भी वैकल्पिक व्यवस्था की गई है। ऐसे किसान अपने परिवार के किसी सदस्य के मोबाइल फोन से एप का उपयोग कर सकते हैं। इसके अलावा नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) की सहायता से भी खाद की बुकिंग करके टोकन या क्यूआर कोड प्राप्त किया जा सकता है। इससे डिजिटल संसाधनों की कमी वाले किसानों को भी नई व्यवस्था का लाभ मिल सकेगा। कृषि विभाग के अनुसार, डिजिटल प्रणाली के प्रभावी संचालन के लिए सहकारी समितियों के प्रबंधकों और उर्वरक विक्रेताओं को प्रशिक्षण दिया गया है। मास्टर ट्रेनर्स ने संबंधित कर्मचारियों को एप के संचालन, डिजिटल टोकन और क्यूआर कोड के जरिए उर्वरक वितरण की प्रक्रिया समझाई है।
इसके साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों को नई व्यवस्था की जानकारी देने के लिए जागरूकता गतिविधियां भी संचालित की जा रही हैं। कृषि विभाग का प्रयास है कि अधिक से अधिक किसान डिजिटल खाद वितरण प्रणाली को समझ सकें और इसका आसानी से उपयोग कर सकें।
यदि किसी किसान को एप डाउनलोड करने, पंजीयन करने या खाद की बुकिंग में परेशानी आती है तो वह अपने क्षेत्र के कृषि विकास अधिकारी अथवा ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी से संपर्क कर सहायता प्राप्त कर सकता है। केंद्र सरकार की फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल पहल को मौजूदा उर्वरक बिक्री प्रणाली से जोड़ा जा रहा है। इसका उद्देश्य किसानों की वास्तविक आवश्यकता के आधार पर खाद की मांग का बेहतर आकलन करना और वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाना है।
कृषि विभाग को उम्मीद है कि डिजिटल टोकन व्यवस्था से खाद वितरण पर बेहतर निगरानी रखी जा सकेगी। साथ ही किसानों को अपनी जरूरत के अनुसार उर्वरक लेने की प्रक्रिया आसान होगी और बिक्री केंद्रों पर अनावश्यक भीड़ कम करने में मदद मिलेगी।
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