छत्तीसगढ़
पहाड़ों और जंगलों के बीच पहुंची शासन की योजना, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता कुन्तला बनीं बदलाव की वाहक
Shantanu Roy
6 Jun 2026 12:14 AM IST

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छग
Raigarh. रायगढ़। विकास की असली तस्वीर अक्सर उन दूरस्थ बस्तियों में दिखाई देती है, जहां सुविधाएं सीमित होती हैं, लेकिन सेवा का संकल्प असीमित। रायगढ़ जिले के आदिवासी बाहुल्य धरमजयगढ़ विकासखंड के दुर्गम वनांचल क्षेत्र में कार्यरत आंगनबाड़ी कार्यकर्ता श्रीमती कुन्तला तिर्की ने ऐसा ही उदाहरण प्रस्तुत किया है। कठिन पहाड़ी रास्तों, सीमित संसाधनों और परिवहन सुविधाओं के अभाव के बावजूद उन्होंने महतारी वंदन योजना के हितग्राहियों तक पहुंचकर न केवल उन्हें योजना की जानकारी दी, बल्कि उनकी ई-केवाईसी प्रक्रिया भी पूरी कराई। उनके अथक प्रयासों से 84 में से 83 महिलाओं की ई-केवाईसी सफलतापूर्वक पूर्ण हो सकी।
धरमजयगढ़ के कापू परियोजना अंतर्गत आने वाला खम्हार सेक्टर जिला मुख्यालय से लगभग 120 किलोमीटर दूर स्थित है। इसी सेक्टर के रामपुरिया आंगनबाड़ी केंद्र तक पहुंचना किसी चुनौती से कम नहीं है। पहाड़ी और वन क्षेत्र से गुजरते हुए तीन से चार किलोमीटर तक पैदल चलना पड़ता है। विशेष पिछड़ी जनजाति पण्डो और कोरवा समुदाय की आबादी वाले इस गांव में महतारी वंदन योजना के 84 हितग्राही पंजीकृत थे। योजना के तहत ई-केवाईसी पूर्ण करना आवश्यक था, लेकिन दूरस्थ भौगोलिक परिस्थितियों और तकनीकी सुविधाओं की कमी के कारण यह कार्य आसान नहीं था। ऐसे समय में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता कुन्तला तिर्की ने जिम्मेदारी को केवल सरकारी दायित्व नहीं माना, बल्कि इसे महिलाओं तक शासन की योजना पहुंचाने का मिशन बना लिया।
उन्होंने गांव-गांव जाकर महिलाओं से संपर्क किया, उन्हें ई-केवाईसी की आवश्यकता समझाई और योजना के लाभों की जानकारी दी। कई बार उन्हें हितग्राहियों के साथ पैदल लंबी दूरी तय करनी पड़ी। अनेक महिलाओं को वे स्वयं अपने साथ लेकर लगभग दस किलोमीटर दूर खम्हार तक पहुंचीं, ताकि उनकी ई-केवाईसी प्रक्रिया पूरी हो सके। जिन महिलाओं की प्रक्रिया तत्काल पूरी नहीं हो पाई, उन्हें बाद में धरमजयगढ़ ले जाकर आवश्यक औपचारिकताएं पूर्ण कराईं। लगातार प्रयासों, धैर्य और समर्पण का परिणाम यह रहा कि 84 में से 83 हितग्राहियों की ई-केवाईसी समय पर पूरी हो गई। शेष एक हितग्राही के संबंध में भी आवश्यक प्रक्रिया जारी है। उन्होंने अपनी समर्पण भाव ने महतारी वंदन योजना के क्रियान्वयन को गति ही नहीं दी, बल्कि दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों में शासन की योजनाओं के प्रति लोगों का विश्वास को भी मजबूत किया है। विशेष रूप से पण्डो और कोरवा समुदाय की महिलाओं में योजना के प्रति जागरूकता बढ़ी है। महिलाओं ने स्वयं आगे आकर योजना से जुड़ने में रुचि दिखाई, जिससे महिला सशक्तिकरण के उद्देश्य को भी बल मिला है। कुन्तला तिर्की की यह कहानी दुर्गम पहाड़ियों और कठिन रास्तों के बीच उनकी यह सेवा भावना आज पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणा बन गई है।
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