छत्तीसगढ़
आदिवासी कन्या आश्रम पिरदा में स्वच्छता, शिक्षा और अनुशासन से सशक्त हो रहीं बालिकाएं
Shantanu Roy
4 Oct 2026 6:09 PM IST

x
छग
Mahasamund. महासमुंद। जिले के विकासखंड पिथौरा से लगभग 40 किलोमीटर दूर स्थित आदिवासी कन्या आश्रम पिरदा प्राथमिक स्तर की बालिकाओं के लिए आवासीय संस्था है। जहां लगातार किए गए प्रयासों और कर्मचारियों की सहभागिता से आश्रम की व्यवस्थाओं में सुधार हुआ है और बालिकाओं के सर्वांगीण विकास के लिए बेहतर वातावरण तैयार किया जा रहा है। आश्रम में लंबे समय से पानी की समस्या बनी हुई थी। उपलब्ध संसाधनों से वैकल्पिक व्यवस्था करते हुए दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति की जाती रही। इसी बीच मार्च 2026 की शुरुआत में नवीन बोर खनन होने से आश्रम की सबसे बड़ी समस्या का समाधान हो गया। पानी की उपलब्धता बढ़ने से साफ-सफाई, बागवानी, किचन गार्डन और वृक्षारोपण जैसे कार्यों को भी गति मिली। कर्मचारियों के सहयोग से बालिकाओं को प्रकृति से जोड़ते हुए बागवानी और किचन गार्डन के लिए प्रेरित किया गया, जिससे उनमें जिम्मेदारी और स्वावलंबन की भावना भी विकसित हो रही है। आश्रम में बालिकाओं को बेहतर और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने के साथ-साथ उनके रहन-सहन, व्यक्तिगत स्वच्छता और परिसर की साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
नियमित दिनचर्या विकसित करने के साथ बालिकाओं को अपने कमरे, सामान और आसपास के स्थान की स्वयं देखभाल करने के लिए प्रेरित किया जाता है। इन प्रयासों से छात्राओं में अनुशासन, स्वच्छता और आत्मनिर्भरता की आदत विकसित हो रही है। बालिकाओं के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए पढ़ाई के साथ खेलकूद को भी दिनचर्या का हिस्सा बनाया गया है। छात्राएं खो-खो, कबड्डी सहित विभिन्न खेलों में उत्साहपूर्वक भाग लेती हैं। आश्रम में उपलब्ध शतरंज, लूडो, सांप-सीढ़ी, कैरम और बैडमिंटन जैसे खेलों के साथ पारंपरिक खेलों गोटी, पिठ्ठल, बिल्लस और फुगड़ी में भी बालिकाएं पूरे उत्साह से शामिल होती हैं। खेलों के माध्यम से उनमें टीम भावना, आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है। आश्रम में बालिकाओं की सुबह योगाभ्यास और प्रार्थना से शुरू होती है। इसके बाद विद्यालयीन समय में शिक्षक उन्हें पाठ्यक्रम आधारित शिक्षा के साथ ज्ञानवर्धक जानकारी प्रदान करते हैं। शाम के समय अधीक्षिका और कर्मचारियों के सानिध्य में बालिकाओं के साथ प्रेरणादायी कहानियों एवं उपयोगी विषयों पर संवाद किया जाता है। इससे उनमें अच्छे संस्कारों के साथ अपने लक्ष्य के प्रति सकारात्मक सोच विकसित हो रही है।बालिकाओं की रचनात्मक प्रतिभा को निखारने के लिए समय-समय पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है, जिसमें छात्राएं बढ़-चढ़कर हिस्सा लेती हैं। ड्राइंग, पेंटिंग, रंगोली जैसी गतिविधियों के माध्यम से उनकी कला और सृजनात्मक क्षमता को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इस तरह आश्रम में शिक्षा के साथ खेल, योग, कला, संस्कार और व्यवहारिक जीवन-कौशल को भी बालिकाओं की दिनचर्या का हिस्सा बनाया गया है।
Next Story





