छत्तीसगढ़

मिनरल वाटर के नाम पर मिल रहा स्लो पाइजन

Admin2
8 Aug 2021 5:12 AM GMT
मिनरल वाटर के नाम पर मिल रहा स्लो पाइजन
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ब्रांडेड कंपनियों के नाम पर नकली पानी, बोतलों में सादा पानी भर कर बेच रहे

बोतलबंद पानी के उत्पादक गली-मोहल्ले में बाटलिंग कर हो रहे मालामाल

बाजार में खुलेआम बिक रहा है बड़ी कंपनियों के नाम के डुप्लीकेट पानी बॉटल

खाद्य और औषधि विभाग लाइसेंस देकर अपने कर्तव्यों से कर लिया इतिश्री

बाजार में बिक रहे पानी की गुणवत्ता जांचने किसी को फुरसत नहीं

प्राय: हर विभाग की मीटिंग मेंबोतल बंद पानी का इस्तेमाल होता है लेकिन सब खामोश हैं।

ज़ाकिर घुरसेना

रायपुर। प्रदेश सहित राजधानी में मिनरल वाटर माफिया सक्रिय होकर लोगों को पानी के नाम पर स्लो पाइजन पिला रहे हैं। बोतलबंद और पानी पाऊच की लाइसेंस देने वाली खाद्य और औषधि विभाग को मिठाई और खाद्य पदार्थ की जांच में साल भर व्यस्त रहते है, पानी की गुणवत्ता जांचने की फुरसत नहीं है। दिवाली-दशहरा, राखी, होली में मिठाई की ताबड़तोड़ जांच तो होती है, लेकिन उसकी रिपोर्ट सालों नहीं आती जिसका बेजा फायदा मिठाईवाले उठाते हैं और धड़ल्ले से कृत्रिम रंग और अरारोठ से बनी मिठाई आम जनता को ऊंची कीमत पर परोसते हैं। इसी उदासीनता की देखादेखी स्थानीय वाटर पैकेजिंग करने वाली कंपनियों के संचालक खुलेआम बड़ी कंपनियों की डुप्लीकेटिंग कर बॉटल और पाऊच बेचकर लोगों को धीमा जहर देने की साजिश कर रहे है। जिसको एक बार पीने के बाद साइड इफेक्ट से शुरू होकर बीमारी शरीर में घर बना लेती है। जिसका पीछा अच्छे-अच्छे डाक्टर नहीं छुड़ा सकते। राजधानी में इन दिनों मिनरल वाटर के नाम पर नार्मल पानी तामझात से बाटलिंग के साथ बेचने का गोरखधंधा बिना बेल के फल फूल रहा है। बरसात का मौसम हो या गर्मी का दोनों मौसम में लोग बोतल बंद पानी का उपयोग बहुतायत से करते हैं। पानी से पैसा कमाने वालों की होड़ मची है जिसके शिकार आमजनता पानी पीकर हो रही है। डुप्लीकेट पानी पाउच और बॉटल बेचने का गोरखधंधे में सैकड़ों लोग शामिल है। गली-मोहल्ले में गुणवत्ताहीन पानी का उत्पादन पैकेजिंग का धंधा बड़े जोरशोर से चल रहा है। जिसका कोई मानक स्तर ही नहीं है। इन सबके बीच चौकाने वाली खबर यह है कि राजधानी में बिसलेरी, किनले, एक्वाफिना जैसे पानी के मिलते जुलते बोतलबंद पानी धड़ल्ले से बिक रहा है। जिसकी कीमत और क्वालिटी में फर्क स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। इस संबंध में जनता से रिश्ता की टीम ने पड़ताल की जिसमें सैकड़ों चौकाने वाले तथ्य सामने आए पास होने के बाद मिलता है लाइसेंस पानी की पैकेजिंग और बाटलिंग करने के लिए काफी जटिल प्रक्रिया को पूरा करना पड़ता है। पानी बनाने के लिए सबसे पहले अपना आरओ बनाना पड़ता है, साथ ही अपना स्वयं का लैब भी बनाना पड़ता है। पानी को पहले अच्छे से चेक किया जाता है। जो दिल्ली या बंगलौर के लैब में टेस्ट किया जाता है तब जाकर आईएसआई सर्टिफिकेट जारी होता है। प्लांट में कंपनी का केमिस्ट और माइक्रोबायोलाजिस्ट की भी नियुक्ति की जाती है। जिसके देखरेख में पानी टेस्ट करके ही बाटलिंग की जाती है। इसके अलावा कुछ टेस्ट ऐसे भी होते है जो यहां नहीं बल्कि आईएसए व्दारा अधिकृत लैब में ही टेस्ट किए जाते है। जो राजधानी में नहीं है। इसके अतिरिक्त हर दो साल में भाभा रिसर्च आटोनामस में पानी टेस्ट के लिए भेजा जाता है। क्योंकि कभी-कभी पानी में गैस भी निकलता है। जो शरीर के लिए घातक हानिकारक ही नहीं बल्कि ऐसे गैस युक्त पानी पीने से मौत भी हो सकती है हर 6 महीने में आईएसआई की टीम करती है जांच पानी की बाटलिंग प्लांट में हर 6 महीने आईएसआई की टीम चेक करने आती है और उनके निर्देशानुसार पानी की पैकेजिंग की जाती है। उनके व्दारा मार्केट से सैम्पल भी लिया जाता है। अगर किसी कंपनी का पानी मानक स्तर से नीचे पाया जाता है, तो उस कंपनी को वार्निंग दी जाती है और सुधार करने का मौका दिया जाकर मानक स्तर का पानी पैकेजिंग के लिए बाध्य किया जाता है। मार्केट से भी लिया जाता है सैम्प, इसी प्रकार दूसरी बार भी मार्केट से सैम्पल लिया जाता है। अगर दूसरी बार मानक स्तर से नीचे उत्पाद होने पर उस कंपनी को प्रतिबंधित कर देती है। मानक स्तर सही रहा तो वे पुन: अपना काम जारी रख सकती है। इस प्रकार देखा जाए तो छोटे स्तर पर या नकली बड़ी कंपनी के नाम से नकली पानी बाटल बनाने वाले इन सभी प्रक्रिया से नहीं गुजरते और न ही उनको इन सबकी जानकारी होती है। बोतल बंद पानी में कीड़े मिलने की जानकारी यदाकदा मिलते है। ये बड़े ब्रांड के नाम से नकली पानी बनाने वाले होते है। इतनी जटिल प्रक्रिया से गुजरने के बाद संबंधित विभाग और आईएसआई सर्टिफिकेट और लाइसेंस जारी होता है। इतनी जटिल प्रक्रिया नकली बोतल बंद पानी बनाने वाले पूरी नहीं करते जिसके लिए तगड़ी फीस भी चुकानी पड़ती है। उसमें डुप्लीकेट कंपनी कभी भी खरा नहीं उतर सकते । ये सिर्फ अंधाधुंध कमाई के लिए कुछ भी करने को तैयार हैं। बड़े ब्रांड के नाम से नकली पानी बाटल में पानी बेचना इनके लिए आसान और सरल साधन है, पानी के तस्कर मिनरल के नाम पर सादा और जहरीला पानी पिला रहे हैं । मिनरल वाटर बनाने और बेचने वाले लोगों के जीवन से खिलवाड़ कर रहे हैं। जिस पर संबंधित विभाग को संज्ञान लेकर जीवन रक्षक पानी की शुद्धता पर कार्रवाई करनी चाहिए। विश्वसनीय और शुद्धता पर खरा उतरने के साथ लोकप्रियता को भूनाने के लिए पानी माफियों ने नकली पानी की बोतल बडे ब्रांड के नाम से मार्केट में खपाने और पैसा कमाने का आसान रास्ता ढूंढा है।

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