
आज के समय में जहां खेती की बढ़ती लागत किसानों के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है, वहीं त्रिशा फार्म्स फुंडा के संचालक कुणाल वर्मा ने केवल 5 एकड़ भूमि पर टिकाऊ एवं कम लागत वाली खेती अपनाकर सफलता की नई मिसाल पेश की है।
यह जानकारी छत्तीसगढ़ कृषि महाविद्यालय, धनोरा के बी.एससी. (कृषि) चतुर्थ वर्ष के छात्र हिमांशु वर्मा द्वारा कृषि पत्रकारिता एवं व्यवहार कौशल (Agricultural Journalism and Behavioral Skills) विषय के अंतर्गत किए गए शैक्षणिक सर्वेक्षण एवं संवाद के दौरान प्राप्त हुई। हिमांशु वर्मा ने किसान कुणाल वर्मा से उनके खेती के अनुभव, तकनीकी ज्ञान तथा टिकाऊ कृषि पद्धतियों के बारे में विस्तार से चर्चा की।
कुणाल वर्मा ने अपने खेत में समेकित कीट प्रबंधन (IPM - Integrated Pest Management) मॉडल को अपनाया है, जिससे रासायनिक कीटनाशकों पर निर्भरता कम हुई है और उत्पादन लागत में उल्लेखनीय कमी आई है। उन्होंने अपने खेत में विविध सब्जी फसलों (Diverse Vegetable Cropping) का समावेश किया है, जिससे जोखिम कम होने के साथ-साथ वर्षभर आय के विभिन्न स्रोत भी बने रहते हैं। मृदा एवं नमी संरक्षण के लिए खेत में मल्चिंग तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। इससे मिट्टी की नमी लंबे समय तक बनी रहती है, खरपतवार नियंत्रण में सहायता मिलती है तथा सिंचाई की आवश्यकता भी कम हो जाती है।
जल संरक्षण के क्षेत्र में भी कुणाल वर्मा ने सराहनीय कार्य किया है। उन्होंने अपने खेत में वर्षा जल संचयन (Rainwater Harvesting System) की व्यवस्था विकसित की है, जिससे वर्षा के पानी का प्रभावी उपयोग किया जा सके और भूजल पर निर्भरता कम हो। कीट एवं रोग नियंत्रण के लिए वे मुख्य रूप से नीम तेल और गोमूत्र आधारित जैविक कीटनाशकों का प्रयोग करते हैं। वहीं पोषक तत्वों की पूर्ति हेतु गोबर की सड़ी खाद (FYM - Farm Yard Manure) का उपयोग किया जाता है। इन प्राकृतिक संसाधनों के प्रयोग से खेत की उर्वरता बनी रहती है और पर्यावरण पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। कुणाल वर्मा का कहना है कि, “यदि किसान स्थानीय संसाधनों का सही उपयोग करें और टिकाऊ कृषि तकनीकों को अपनाएं, तो कम भूमि और कम निवेश में भी अच्छा लाभ कमाया जा सकता है।” हिमांशु वर्मा ने बताया कि इस सर्वेक्षण का उद्देश्य किसानों के सफल एवं टिकाऊ कृषि मॉडलों को समझना तथा उनके अनुभवों को अन्य किसानों और विद्यार्थियों तक पहुंचा कर उनको प्रेरित करना है ! कुणाल वर्मा से हुई इस बातचीत से उन्हें आधुनिक एवं पर्यावरण-अनुकूल खेती के व्यावहारिक पहलुओं को समझने का अवसर मिला।
आज उनकी यह खेती न केवल आर्थिक रूप से लाभदायक साबित हो रही है, बल्कि आसपास के किसानों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन चुकी है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि कुणाल वर्मा का यह मॉडल भविष्य में सतत एवं लाभकारी कृषि का उत्कृष्ट उदाहरण बन सकता है।





