छत्तीसगढ़

गणपति स्टील संचालकों पर 78 लाख रुपये की धोखाधड़ी का आरोप, मामला दर्ज

Shantanu Roy
26 Sept 2025 10:02 PM IST
गणपति स्टील संचालकों पर 78 लाख रुपये की धोखाधड़ी का आरोप, मामला दर्ज
x
छग
Raipur. रायपुर। थाना उरला क्षेत्र में संचालित सार्थक इस्पात प्रा. लि. के संचालक सचिन गर्ग ने आर. आर. इंटरप्राईजेस के संचालक जसबीर आहलूवालिया और गणपति स्टील के संचालक खुशाल डोडेजा के खिलाफ षड्यंत्रपूर्वक धोखाधड़ी और अमानत में खयानत करने का मामला दर्ज कराया है। प्रार्थी ने अपनी शिकायत में कहा कि आरोपीगण ने उसे कुल 223.96 टन बिलेट बेचे, जिसकी कुल लागत 1,03,06,640/- रुपये है, लेकिन अब तक शेष 78,06,640/- रुपये का भुगतान नहीं किया गया।

व्यापारिक संबंध और धोखाधड़ी का मामला
सचिन गर्ग ने अपनी शिकायत में बताया कि गणपति स्टील के संचालक खुशाल डोडेजा उनके लंबे समय से परिचित रहे हैं और उन्हीं के माध्यम से आर. आर. इंटरप्राईजेस से व्यापार स्थापित हुआ। फरवरी 2024 में आर. आर. इंटरप्राईजेस ने 225 टन बिलेट का आर्डर दिया, जिसे सार्थक इस्पात प्रा. लि. ने क्रमिक रूप से पूरा किया। शुरुआती समय में आर. आर. इंटरप्राईजेस ने कुल 25,00,000/- रुपये का भुगतान किया ताकि प्रार्थी का भरोसा जीत सकें। इसके बाद शेष राशि 78,06,640/- रुपये का भुगतान करने का आश्वासन दिया गया, लेकिन भुगतान अब तक नहीं किया गया। जब प्रार्थी ने शेष राशि की मांग की, तो आरोपी टाल-मटौल करने लगे और मिलने से इंकार कर दिया। इसके बाद प्रार्थी ने 23 सितंबर 2024 को पंजीकृत मांग पत्र और ई-मेल के माध्यम से भुगतान की मांग की, लेकिन कोई उत्तर नहीं मिला।

अपराध की धाराएँ और कानूनी कार्रवाई
सचिन गर्ग ने आरोप लगाया कि आर. आर. इंटरप्राईजेस और गणपति स्टील ने षड्यंत्रपूर्वक योजना बनाई और अपनी संस्था से बिलेट प्राप्त कर भुगतान नहीं करके स्वयं को लाभांवित किया, जिससे उसकी संस्था को भारी आर्थिक हानि हुई। इसके आधार पर थाना उरला में धारा 316(5), 318(4), और 3(5) बी.एन.एस. के तहत मामला पंजीबद्ध किया गया और विवेचना प्रारंभ की गई।

आरोपियों की जानकारी
जसबीर आहलूवालिया – संचालक, मेसर्स आर. आर. इंटरप्राईजेस, वार्ड नं. 45, सिविल लाइन, जलविहार कॉलोनी, रायपुर।
खुशाल डोडेजा – संचालक, गणपति स्टील, ऑफिस नं. 16 व 17, प्रथम तल, धरम मार्केट, स्टेशन रोड, रायपुर।

साक्ष्य और दस्तावेज
सचिन गर्ग ने कहा कि आर. आर. इंटरप्राईजेस द्वारा भुगतान के लिए आश्वासन और शेष राशि का वादा किए जाने का प्रमाण उपलब्ध है। इसके अलावा उसने पंजीकृत मांग पत्र और ई-मेल पत्राचार भी प्रस्तुत किया है, जिससे स्पष्ट होता है कि आरोपीगण जानबूझकर भुगतान से बच रहे हैं।

प्रभाव और आर्थिक हानि
इस मामले में प्रार्थी की संस्था को लगभग 78 लाख रुपये की आर्थिक हानि हुई है। प्रार्थी का कहना है कि इस प्रकार की व्यापारिक धोखाधड़ी और अमानत में खयानत केवल व्यक्तिगत हानि नहीं बल्कि व्यवसायिक प्रतिष्ठा को भी प्रभावित करती है।
पुलिस कार्रवाई और आगे की प्रक्रिया
थाना उरला ने शिकायत के आधार पर अपराध दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी है। अब पुलिस आरोपीगण की व्यापारिक लेनदेन, भुगतान रिकॉर्ड और बातचीत के दस्तावेज की जांच कर रही है। इसके साथ ही यह जांच की जा रही है कि क्या अन्य व्यवसायिक लेन-देन में भी इसी प्रकार की धोखाधड़ी की गई है या नहीं।
Next Story