छत्तीसगढ़

गांजा तस्करी करने वाले रवि शंकर लोढी और मनु केउंट को मिली 10 साल की जेल

Shantanu Roy
8 Sept 2025 3:54 PM IST
गांजा तस्करी करने वाले रवि शंकर लोढी और मनु केउंट को मिली 10 साल की जेल
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छग
Raipur. रायपुर। छत्तीसगढ़ की अदालत ने विशेष दांधिक प्रकरण (एन.डी.पी.एस.) क्र. 71/2023 में रायपुर में पंकज सिन्हा की अदालत में आज उन्होंने ये फैसला सुनाया है कि आरोपी रवि शंकर लोढी और मनु केउंट उर्फ सोनू को दोषी ठहराते हुए दस-दस वर्ष के कठोर कारावास और एक-एक लाख रूपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। यदि अर्थदंड का भुगतान नहीं किया गया तो प्रत्येक आरोपी को अतिरिक्त दो वर्ष का कारावास भुगतना होगा। अदालत में प्रस्तुत दस्तावेज़ों और कांडिकाओं (3, 4 और 5) के अनुसार, आरोपी ने कई महत्वपूर्ण पंचनामा तैयार किए, जिनमें रायपुर जीआरपी पुलिस को मुखबिर सूचना और तलाशी वारंट प्राप्त न कर पाने का विवरण शामिल था। जांच में यह स्पष्ट हुआ कि आरोपी ने बिना तलाशी वारंट के पावती तैयार की और इसका रिकॉर्ड न्यायालय में प्रस्तुत किया गया।

संबंधित दस्तावेज़ों के अनुसार, पंचनामा, पावती और रोजनामचा दिनांक 02.03.2023 को तैयार और सत्यापित किए गए। इन्हें रायपुर के आयुक्त कार्यालय को भेजा गया और रेलवे सुरक्षा बल तथा मंडल सुरक्षा आयुक्त कार्यालय से पावती प्राप्त की गई। दस्तावेज़ में विभिन्न अधिकारियों द्वारा सत्यापन और पावती प्राप्त करने की पूरी प्रक्रिया का विवरण मौजूद है। अदालत ने कहा कि यह प्रक्रिया मामले की जांच और प्रशासनिक कार्रवाई में पारदर्शिता और कानूनी प्रक्रिया का पालन सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण है। आरोपीगण के द्वारा तैयार किए गए दस्तावेज़ों से यह भी स्पष्ट हुआ कि अपराध की गंभीरता को देखते हुए कानूनी कार्रवाई अपरिहार्य थी।


अभियोजन पक्ष ने बताया कि अभियुक्तगण को दिनांक 03.03.2023 को गिरफ्तार किया गया। अदालत ने कहा कि न्यायिक अभिरक्षा में बिताया गया समय उनकी सजा की अवधि में शामिल किया जाएगा। यह आदेश भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 468 के तहत किया गया। अदालत ने स्पष्ट किया कि दोषसिद्धि के आधार पर अभियुक्तगण को स्वापक औषधि एवं मन: प्रभावी पदार्थ अधिनियम की धारा 985 के तहत दंडित किया गया। अर्थदंड के भुगतान में असफल होने की स्थिति में प्रत्येक आरोपी को दो-दो वर्ष अतिरिक्त कठोर कारावास भुगतना होगा।
अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि न्यायिक अभिरक्षा में बिताए गए समय को सजा की अवधि में शामिल किया जाए, जिससे अभियुक्तगण की गिरफ्तारी से लेकर दोषसिद्धि तक का पूरा समय न्यायिक रिकॉर्ड में दर्ज हो। इस कदम से यह सुनिश्चित होगा कि जांच और कार्यवाही में पूरी पारदर्शिता बनी रहे। इस मामले में पुलिस और न्यायालय ने पंचनामा, पावती और रोजनामचा सहित सभी दस्तावेज़ न्यायालय में प्रस्तुत किए। जांच में यह सामने आया कि आरोपी ने कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना पावती तैयार की। यह तथ्य अदालत ने गंभीरता से लिया और अपराध की गंभीरता को देखते हुए सख्त सजा सुनाई।
छत्तीसगढ़ पुलिस और न्यायालय ने इस प्रकरण में यह उदाहरण प्रस्तुत किया कि मन: प्रभावी पदार्थों और स्वापक औषधियों के अपराध में कठोर कार्रवाई की जाएगी और कानूनी प्रक्रिया का पूर्ण पालन सुनिश्चित किया जाएगा। अदालत ने यह भी कहा कि अभियुक्तगण की गिरफ्तारी, न्यायिक अभिरक्षा और दस्तावेज़ सत्यापन की पूरी प्रक्रिया का पालन किया गया। यह निर्णय यह स्पष्ट करता है कि कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया का पालन करते हुए अपराधियों को न्याय दिलाना प्राथमिकता है। इस फैसले से स्पष्ट संदेश गया है कि प्रदेश में एन.डी.पी.एस. जैसे गंभीर अपराधों में दोषियों को कानूनी दंड और आर्थिक दंड के माध्यम से कठोर कार्रवाई का सामना करना होगा।
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