यार हमारी बात सुनो ऐसा एक इंसान चुनो, जिसने पाप न किया हो जो पापी न हो

ज़ाकिर घुरसेना/ कैलाश यादव
राजिम में आम जनता पुण्य लाभ लेने साल भर इंतजार करती है वहीं बड़े बिल्डर और ठेकेदार सरकार को चूना लगाने का इंतजार करते है। राजिम की पुण्यता आम लोगों के लिए है यह तो धन्ना सेठों के लिए कमाई का जरिया बना हुआ है जिसको मौका मिलता है भरपेट जीमता है। कोई कसर नहीं छोड़ता है। हर साल राजिम कुंभ कल्प का आयोजन शासन द्वारा किया जाता है , जिसमें स्टाल निर्माण कार्य कराने के नाम पर बड़ा घोटाला किया जाता है। उक्त स्टाल निर्माण के लिए कलेक्टर कार्यालय गरियाबंद द्वारा लगभग 2000 वर्गफीट क्षेत्र दिया गया था। इसके भुगतान के लिए विभाग को भारी-भरकम बिल प्रस्तुत किया , जिसमें अधिक मात्रा दिखाकर शासन से करोड़ों वसूला गया है। स्टाल का साईज 2000 वर्गफीट था जिसके लिए विभाग ने उक्त एजेंसी को 4 करोड़ 36 लाख 60 हजार का भुगतान किया है। जनता में खुसुर-फुसुर है कि राजिम माता धन्य है किसी का पुण्य बढ़ाता है तो किसी का पाप बढ़ा देती है। कौन किसका धोए यही सवाल हर साल उठता है। यहां समस्या ये भी है कि किसको छोड़ें किसको धरें यहां तो छोटे से लेकर बड़े अधिकारी तक रिश्वत के दलदल में फंसे है । फिर भी कोई भी पुण्य लाभ का मौका नहीं छोड़ते है। इसी बात पर एक फिल्मी गाना याद आता है, यार हमारी बात सुनो एसा एक इंसान चुनो, जिसने पाप न किया हो जो पापी न हो।
सुनो सबकी करो भी सबकी
नए महापौर को अभी सलाह देने वालों की भरमार हो गई है। अधिकतर तो समर्थक हैं जो कहते हैं कि नई महापौर जनता के उम्मीदों में खरे उतरें इसलिए सब सलाह दे रहे हैं। एक कहावत है सुनो सबकी और करो मन की लेकिन निगम में ऐसा नहीं होगा यहाँ सुनो सबकी और करो भी सबकी तभी तो नाम झंडे में चढ़ेगा एक पुराने पत्रकार महोदय ने भी अपनी कलम पर जोर देखर शहर की ट्रेफिक समस्या को लेकर महापौर जी को सुझाव दे ही दिया अब अमल करना नहीं करना उनके ऊपर है। शहर की हालत सुधरने सम्बन्ध में कहा कि स्ट्रीट वेंडर को व्यवस्थित करने से ही शहर की हालत सुधरेगी इसके लिए पूरे शहर के लिए प्लान की जरूरत है। ठेले खोमचे वालों को हटाने से समस्या नहीं खत्म होने वाली, आखिर उनका व्यवसाय है वो, रोज़ी रोटी है, कहीं और पसर जाएंगे, यही तो चल रहा है वर्षों से।जरूरत है उनके व्यवस्थापन की। नगर निगम के रिकॉर्ड में नौ हजार के लगभग स्ट्रीट वेंडर हैं, वास्तव में इनकी संख्या बीस से पच्चीस हजार के करीब है। सरकार के तीनों इंजनों को योजना बनाकर हर वार्ड में दो या तीन स्थान पर वेडिंग जोन विकसित करना चाहिए और वहां स्ट्रीट वेंडर को मासिक शुल्क, किराया आदि लेकर व्यवस्थित करना चाहिए ।
कल्पना करें सत्तर वार्ड में दो या तीन स्थान पर लगभग सौ स्ट्रीट वेंडर प्रति वेडिंग जोन व्यवस्थित करें तो हर वार्ड में दो तीन सौ के हिसाब से सत्तर वार्ड में बीस हजार वेंडर व्यवस्थित होंगे, इनसे यदि एक हजार रूपये भी किराया लिया जाता है तो राशि होती है दो करोड़ रुपए प्रति माह। पचास रुपए प्रतिदिन भी लिया जाय तो लगभग तीन करोड़ प्रति माह,ये नगर निगम का नियमित आय स्रोत होगा। आप कह सकते हैं गरीब वेंडर के लिए यह राशि अधिक है, मेरा दावा है वे अभी जहां खड़े हैं वहां खड़े रहने की इससे कहीं अधिक कीमत चुकाते हैं । जिम्मेदार विचार करें राजधानी को अभी तक अपनी गरिमा नहीं मिली है, यह एक कदम होगा व्यवस्थित राजधानी के लिए। शहर सुंदर, व्यवस्थित और साफ सुथरा होगा, ट्रैफिक की समस्या नहीं होगी। ग्राहक को एक स्थान पर सारी खरीद की सुविधा मिलेगी। जनता में खुसुर फुसुर है कि महापौर नयी हैं लेकिन निगम के लिए नयी नहीं हैं पूर्व में नेता प्रतिपक्ष रह चुकीं हैं अगर ऐसा करते हैं तो निश्चित रूप से उनका नाम स्वर्ण अक्षरों में लिखा जायेगा, परन्तु बड़े राजनीतिज्ञ उन्हें ऐसा करने फ्री हैंड दें तो बल्ले बल्ले है वरना जैसा चल रहा है चलता रहेगा।
एक्शन में महापौर.निकल पड़ी शहर सुधारने
नगर निगम की नवनिर्वाचित महापौर और सभापति ने गंगाजल से गांघी सदन का शुद्धि करण का असर देखने को मिलने लगा है। जिन क्षेत्रों में मोटे आसामी और कारोबारी का ठिकाना है वहां पर महापौर का एक्शन कारोबारियों को समझ नहीं आ रहा है। चर्चा है कि जिन कारोबारियों ने भाजपा का 15 साल सूखा खत्म किया वो ही अब निगम की जद में आ गए है। इससे अच्छा तो मिठलबरा कांग्रेसी जो ढोल पीटते आते थे अतिक्रमण हटाओ्ं और थोड़ी देर बाद खुद ही हट जाते थे। सभी को मालूम है ये राजधानी रायपुर है यहां की ट्रफिक व्यवस्था सभी सुधरने वाली नहीं है। यहां की ट्रैफिक व्य़वस्था को वाहन चालक और कारोबारी ही बनाते है और बिगाड़ते है। क्योंकि राजधानी में सामान्य जनता कम नेता ज्यादा रहते है। हर घर में दो नेता एक भाजपा एक कांग्रेस ।वो अच्छा हुआ यदि जोगी कांग्रेस सक्रिय होती तो नगर निगम वाले अभियान चलाने से पहले ही भाग जाते। जनता में खुसुर-फुसुर है कि अब नई महापौर शपथ से पहले प्रयागराज मय निगम परिवार के साथ स्नान करने गई थी वहां से जल भी लाई है जिससे गांधी सदन का शुद्धिकरण हुआ है तो योगी का असर तो रायपुर में दिखेगा ही। क्योंकि कहा जाता है कि जैसा खाओ्ं अन्न वैसा रहे मन्न । तो राजधानी में कुछ न कुछ तो होगा ही। बुलडोर चले न चले राजनीति में वर्चस्व बनाए रखने के लिए तो ये सब चलाना ही पड़ेगा।
कम से कम नाम के अनुरूप तो काम करते ...
शहर के एक बड़े अस्पताल में आयुष्मान कार्ड से मरीजों का इलाज कर करोड़ों रुपए अनाप शनाप कमाने का हश्र क्या हुआ । जनता में खुसुर फुसुर है कि नाम के अनुरूप काम होता तो जस और बढ़ता लेकिन अपयश तो अपयश होता है। लाखों मरीजों की गाढ़े खून पसीने की कमाई को इलाज के नाम पर लूटना भी पाप की श्रेणी में आता है। नाम तो नारायणा है कम से कम उसी के मार्गदर्शन में चलते तो इनकम टैक्स वालों को करोड़ों की टैक्स चोरी के दर्शन नहीं होते । जनता में चर्चा है कि अस्पतालों में कई तरह की चोरी का नाम सुना था पहली बार टैक्स चोरी यहीं सामने आया है। टैक्स तो किसी के दिल् में ट्रांसप्लांट नहीं होता फिर क्यों एसा करना पड़ा यह शोध का विषय है। फिलहाल तो इमकम टैक्स वाले शोध कर रहे है कि इतना माल आया कहां से । क्योंकि इनकम टैक्स वाले तो माल वालों के ही दर्शन के अभिलाषी होते है। फिर नारायणा में क्या देख लिया।





