छत्तीसगढ़
जमीन की फर्जी रजिस्ट्री कर 24.28 लाख की ठगी, दो आरोपी गिरफ्तार
Shantanu Roy
31 Oct 2026 9:54 PM IST

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छग
Durg. दुर्ग। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में जमीन खरीदी-बिक्री और मकान निर्माण के नाम पर लाखों रुपये की धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। आरोपियों ने दूसरे की जमीन को अपनी बताकर फर्जी दस्तावेज तैयार किए और रजिस्ट्री कराकर शिकायतकर्ता से 24 लाख 28 हजार रुपये की धोखाधड़ी की। मामले में पुलिस ने दो आरोपियों अवतार सिंह और मनोज कुमार सोनी को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि जमीन का सौदा करने के बाद शिकायतकर्ता को पता चला कि जिस भूमि पर मकान निर्माण कराया जा रहा था, वह किसी अन्य महिला के नाम पर दर्ज है। इसके बाद रकम वापस करने के लिए आरोपियों ने तीन चेक दिए, लेकिन बैंक खाते में पर्याप्त राशि नहीं होने के कारण तीनों चेक बाउंस हो गए। शिकायत के आधार पर स्मृतिनगर चौकी और सुपेला थाना पुलिस ने धोखाधड़ी एवं आपराधिक षड्यंत्र का अपराध दर्ज कर जांच शुरू की है। पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, एलआईजी 491/492, हाउसिंग बोर्ड कोहका, भिलाई निवासी मोहन लाल देवांगन ने पुलिस अधीक्षक दुर्ग के समक्ष लिखित शिकायत प्रस्तुत की थी। शिकायतकर्ता ने बताया कि वर्ष 2016 में मकान निर्माण के लिए जमीन खरीदने के सिलसिले में उसकी मुलाकात अवतार सिंह से हुई थी। अवतार सिंह ने अपने साथी के साथ जमीन खरीदी-बिक्री का कारोबार करने की जानकारी दी और उसे कोहका क्षेत्र में जमीन दिखाकर खरीदने का प्रस्ताव दिया।
1200 वर्गफीट जमीन दिखाकर कराया था सौदा
शिकायत के अनुसार, आरोपी ने मौजा कोहका स्थित खसरा नंबर 1704/88 की भूमि में से 1200 वर्गफीट का प्लॉट दिखाया था। जमीन पसंद आने के बाद दोनों पक्षों के बीच सौदा तय हुआ। इसके बाद आरोपी के माध्यम से 30 सितंबर 2016 को शिकायतकर्ता मोहन लाल देवांगन के पक्ष में जमीन की रजिस्ट्री कराई गई। शिकायतकर्ता का आरोप है कि उसने जमीन खरीदने और उस पर मकान निर्माण कराने के लिए अलग-अलग किस्तों में कुल 23 लाख 28 हजार रुपये आरोपियों को दिए थे। रकम देने के बाद उसे विश्वास था कि जमीन का स्वामित्व वैध रूप से उसके नाम हो चुका है और वह उस पर अपना मकान बना सकेगा। हालांकि, कुछ समय बाद उसे जमीन के वास्तविक स्वामित्व को लेकर जानकारी मिली, जिससे पूरे सौदे पर सवाल खड़े हो गए।
दूसरी महिला की निकली जमीन, रकम वापस करने का किया वादा
शिकायतकर्ता को बाद में पता चला कि जिस जमीन पर मकान निर्माण कराया जा रहा था, वह वास्तव में माया सिंह नामक महिला की भूमि है। इसके बाद उसने आरोपियों से संपर्क कर अपनी रकम वापस करने की मांग की। पुलिस के अनुसार, इस विवाद के बाद 22 सितंबर 2018 को आरोपियों ने एक इकरारनामा निष्पादित किया। इसमें जमीन खरीदी और मकान निर्माण के लिए प्राप्त 23 लाख 28 हजार रुपये तथा रजिस्ट्री खर्च के एक लाख रुपये सहित कुल 24 लाख 28 हजार रुपये वापस करने की बात कही गई। रकम लौटाने के लिए आरोपियों ने भारतीय स्टेट बैंक की सुपेला शाखा के तीन चेक शिकायतकर्ता को दिए। लेकिन जब इन चेकों को भुगतान के लिए बैंक में प्रस्तुत किया गया तो संबंधित खाते में पर्याप्त राशि नहीं होने के कारण तीनों चेक अनादरित हो गए। इससे शिकायतकर्ता को अपनी रकम वापस नहीं मिल सकी।
फर्जी व्यक्ति खड़ा कर दोबारा रजिस्ट्री कराने का आरोप
मामला यहीं समाप्त नहीं हुआ। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि 16 मार्च 2021 को आरोपियों ने मौजा कोहका स्थित खसरा नंबर 1704/2 की 1200 वर्गफीट भूमि की रजिस्ट्री कराने के लिए चिरंजीवन कोनार नामक व्यक्ति को फर्जी रूप से प्रस्तुत किया। आरोप है कि वास्तविक भूमि स्वामी को किसी प्रकार का भुगतान किए बिना कूटरचित दस्तावेजों के माध्यम से रजिस्ट्री कराई गई। इस तरह आरोपियों ने आपसी षड्यंत्र के तहत जमीन के दस्तावेजों में हेरफेर कर धोखाधड़ी की। शिकायत में इन सभी घटनाओं और संबंधित दस्तावेजों की जांच कराने की मांग की गई थी।
धोखाधड़ी और आपराधिक षड्यंत्र की धाराओं में मामला दर्ज
पुलिस ने शिकायत मिलने के बाद मामले की प्रारंभिक जांच की। जांच में सामने आए तथ्यों और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर प्रथम दृष्टया धोखाधड़ी और आपराधिक षड्यंत्र का मामला पाया गया। इसके बाद चौकी स्मृतिनगर, थाना सुपेला में अपराध क्रमांक 1635/2026 के तहत भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 120बी और 34 में अवतार सिंह, मनोज कुमार सोनी तथा अन्य के विरुद्ध अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना शुरू की गई। पुलिस ने मामले से जुड़े जमीन के दस्तावेजों, रजिस्ट्री और रकम के लेनदेन से संबंधित तथ्यों की जांच शुरू की है। साथ ही इस पूरे प्रकरण में अन्य व्यक्तियों की भूमिका का भी पता लगाया जा रहा है।
दो आरोपी गिरफ्तार, न्यायिक रिमांड पर भेजे गए
विवेचना के दौरान पुलिस टीम ने आरोपी अवतार सिंह और मनोज कुमार सोनी को अभिरक्षा में लेकर पूछताछ की। पुलिस के मुताबिक, पूछताछ में आरोपियों द्वारा अपराध स्वीकार किए जाने की जानकारी सामने आई। उपलब्ध साक्ष्यों और जांच के आधार पर दोनों को विधिवत गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है। गिरफ्तार दोनों आरोपी भिलाई, जिला दुर्ग के निवासी हैं। पुलिस का कहना है कि मामले में अन्य आरोपियों की संलिप्तता, जमीन के वास्तविक स्वामित्व और रजिस्ट्री दस्तावेजों की वैधानिकता की विस्तृत जांच अभी जारी है। इस कार्रवाई में थाना सुपेला और चौकी स्मृतिनगर पुलिस की महत्वपूर्ण भूमिका रही। पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि फर्जी रजिस्ट्री और जमीन के लेनदेन में अन्य किन व्यक्तियों की भूमिका रही है।
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