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Sakti सक्ती। फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र तैयार कर बीमा कंपनी से करीब 1 लाख 42 हजार रुपये की राशि हासिल करने के आरोप में सक्ती पुलिस ने बंधन बैंक के पूर्व कैशियर को गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान कमलेश सिंह के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, आरोपी पिछले करीब दो वर्षों से फरार चल रहा था। मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर पुलिस ने उसके घर पर दबिश देकर उसे गिरफ्तार किया।
लोन खाते में लगाया फर्जी डेथ सर्टिफिकेट
पुलिस के मुताबिक, शिकायतकर्ता का बंधन बैंक में लोन खाता था। इसी खाते से जुड़े दस्तावेजों में आरोपी ने कथित तौर पर फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र का इस्तेमाल किया। इसके आधार पर बीमा कंपनी से करीब 1.42 लाख रुपये की राशि प्राप्त की गई। मामले की जानकारी सामने आने के बाद शिकायतकर्ता ने पुलिस से इसकी शिकायत की। शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। जांच आगे बढ़ने पर पूर्व कैशियर कमलेश सिंह की भूमिका सामने आई।
करीब दो साल से फरार था आरोपी
मामला सामने आने के बाद पुलिस आरोपी की तलाश कर रही थी, लेकिन वह लंबे समय से पुलिस की गिरफ्त से बाहर था। पुलिस ने आरोपी की संभावित गतिविधियों और ठिकानों की जानकारी जुटाई। इसी दौरान पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली कि कमलेश सिंह अपने घर पर मौजूद है। सूचना की पुष्टि के बाद पुलिस टीम ने तत्काल दबिश दी और आरोपी को उसके घर से पकड़ लिया। पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर मामले के संबंध में पूछताछ की।
बीमा कंपनी से राशि हासिल करने का आरोप
पुलिस जांच के अनुसार, आरोपी पर आरोप है कि उसने बैंक ग्राहक के लोन खाते में फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र का इस्तेमाल कर बीमा कंपनी से राशि हासिल की। इसके बाद करीब 1 लाख 42 हजार रुपये की रकम का गबन किया गया। हालांकि इस पूरे फर्जीवाड़े में अन्य लोगों की भूमिका थी या नहीं, इसे लेकर पुलिस की जांच जारी है। पुलिस दस्तावेजों, बैंक रिकॉर्ड और बीमा से जुड़े कागजात की भी जांच कर सकती है, ताकि मामले की पूरी कड़ी सामने आ सके।
पुलिस कर रही आगे की जांच
आरोपी की गिरफ्तारी के बाद पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र कैसे तैयार किया गया और इसका इस्तेमाल किस प्रक्रिया के तहत किया गया। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि बीमा राशि प्राप्त करने में किसी अन्य व्यक्ति ने सहयोग किया था या नहीं।
पुलिस आरोपी के खिलाफ संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई कर रही है। मामले में सामने आने वाले साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
फर्जी दस्तावेजों के जरिए बैंक और बीमा व्यवस्था को नुकसान पहुंचाने वाले इस मामले ने वित्तीय संस्थानों में दस्तावेजों के सत्यापन और निगरानी की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े किए हैं। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद मामले से जुड़े अन्य तथ्यों का खुलासा हो सकता है।
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