आए थे हंसते खेलते मयखाने में फिराक़, जब पी चुके शराब तो संजीदा हो गए

ज़ाकिर घुरसेना/ कैलाश यादव
प्रदेश सरकार के पिछले दिनों आदेश निकाला कि गिलास में गन्ना रस की तरह शराब बेचा जायेगा, शासन के आदेश के बाद मदिरा प्रेमियों में उत्साह की लहर दौड़ गई थी और कुछ पल के लिए एक दूसरे को बधाई शुभकामनाओ का दौर भी शुरू हो गया था कि कम पैसे में भी शराब का आनंद लिया जा सकेगा और अब कांग्रेसियों ने भी इनको खुश कर दिया। कांग्रेसियों ने शराब दुकानों में जाकर पियक्कड़ों को फूलों की माला पहनाया , तिलक लगाया और फ्री में चखना बांटा। भले ही कांग्रेसियों ने विरोधस्वरूप बांटा या सम्मान किया , आखिर पियक्कड़ों का सम्मान तो हुआ । चखना मुफ्त में तो मिला इसी बात से शराबी गदगद थे। जनता में खुसुर फुसुर है कि कांग्रेसियो को और कुछ नहीं सूझा विरोध में ही कुछ बाँटना ही था तो शराबी ही मिले क्या ? प्रदेश में और कोई जरूरतमंद नहीं मिला। मंहगाई बढ़ी हुई है लोगों को एक महीने का राशन बाँटना था, कपड़ा बाँटना था, कापी किताब बाँटना था। लेकिन चखना बांट कर उनका पंजीयन कर दिया है। साथ ही बड़ी संजीदगी से यह भी बोल आए कि उनकी सरकार आएगी तो चेपटी देंगे। इसी बात पर मशहूर शायर फिराक़ गोरखपुरी ने ठीक ही कहा है कि आए थे हंसते खेलते मयखाने में फिराक़, जब पी चुके शराब तो संजीदा हो गए।
मेरी मर्जी चाहे -मैं ये करूं चाहे मैं वो करूं
निजी स्कूलों के शिक्षा क्षेत्र में अलग ही जलवा है। न तो वो सरकारी फरमान को मानते हैं और न ही फीस और डोनेशन में कोई अंतर मानते हैंं। आरटीई तो निजी स्कूलों में पानी भर रहा है। निजी स्कूलों का संगठित रैकेट शिक्षा विभाग और परिवहन विबाग को पूरी तरह जकड़ लिया है। मामला है ट्रैफिक पुलिस एवं परिवहन विभाग ने छात्रों का परिवहन करने वाली स्कूल बसों की जांच की। साढ़े पांच सौ बसों की जांच में 100 से ज्यादा में तकनीकी खामियां मिली है। खबर है कि कई स्कूल प्रबंधन में अपनी बसों की जांच नहीं कराई है. ऐसे स्कूलों को चेतावनी दी गई है कि संबंधित बसों को ब्लैक लिस्ट कर दिया जाएगा. परिवहन विभाग ने करीब 300 बसों की सूची भी तैयार की है. जिन्हें जांच के लिए पंडरी बस स्टैंड में नहीं लाया गया था। जनता में खुसुर-फुसुर है कि निजी स्कूल वाले अपने आप को किसी उद्योगपति से कम नहीं आंकते है। ये पब्लिक है सब जानती है। आठवीं पास डायरेक्टरों की भीड़ है जो पैसे देकर मास्टर डिग्री लेकर स्कूल संचालन कर रहे हैं। उनका मानना है कि जब हम अपने स्कूल की मान्यता के लिए स्कूल में उपलब्ध सुविधाओ का भी भौतिक सत्यापन नहीं कराते हैं तो अपने बसों की जांच कराने कैसे जा सकते हैं। हमें शिक्षा और परिवहन के कोई डर नहीं है। उनके कहने से ही हम उनके बच्चों को फ्री में पढ़ाते हैं औऱ दान दक्षिणा भी हर साल तारीख से पहले पहुंचा देते हैं। एैसे में बसों की जांच हम परिवहन विभाग वालों को बुला कर करवा सकते हैं। निजी स्कूलों के मास्टरों का कहना है कि हम तो साहब पैदाइशी मास्टर हैं। हम सिर्फ पढ़ाते है किसी के आदेश को हम नहीं पढ़ते। ये जो परिवहन विभाग के शिक्षा सत्र का चारा पानी है। जो हम डाल देंगे पर अपने बसों को जांच कराने नहीं भेज सकते ।
बधाई हो कवि बनने जद्भ रहे हो ...
छत्तीसगढ़ की धरती हमेशा से कला, संस्कृति और साहित्य की उर्वर भूमि रही है। यहां की मिट्टी में न जाने कितने कलाकारों ने जन्म लिया है और कितनी ही कविताएं जनमानस के हृदय तक पहुँची हैं। अब वक्त आ गया है कि इसी माटी से उपजे उन शब्दों, उन भावनाओं और उन रचनाकारों को एक सशक्त मंच देने का, जो अपनी कलम से समाज को नया दृष्टिकोण दे रहे हैं। इसी उद्देश्य को पूरा करने आ रहा है चाय गोविन्दम काव्यकुंभ, एक ऐसा कार्यक्रम जो सिर्फ एक आयोजन नहीं, बल्कि एक अवसर है, हर उस युवा कवि और लेखक के लिए जो अपने शब्दों से लोगों के दिलों तक पहुँचने की चाह रखते हैं। जनता में खुसुर-फुसुर है कि सोशल मीडिया में कविता और शेरों शायरी पेलने वाले को मंच मिलने जा रहा है। भावी कवियों को बधाई अब तो मंच मिलने वाला है पूरी भड़ास इस मंच के माध्यम से कहने का मौका जो मिल रहा है। चाय गोविंदम का आनंद के साथ काव्य रचना कीजिए और छत्तीसगढिय़ों की भावना को कविता के जरिए लोगों तक पहुंचाएं ।
हमने ही कब्जाया है हम ही बिकवाएंगे...
अवैध प्लाटिंग पर कार्रवाई लगातार होने के बाद भी आप कई बार सोचते होंगे, बार-बार कार्रवाई के बाद भी इस पर लगाम क्यों नहीं कसा लगता और कार्रवाई में भी बड़ी मछली नहीं फंसती। हां, अपने खून-पसीने की कमाई से ऐसी जमीन को खरीदने वाले लोग जरूर रोते हुए, व्यवस्था को कोसते हुए नजर आते हैं. तो हम आपको बताने जा रहे हैं इसके पीछे की कमीशनखोरी का खेल, जिसमें एक तरफ पटवारी, आरआई से लेकर तहसीलदार तक, तो दूसरी ओर थाना प्रभारी से लेकर सीएसपी शामिल रहते हैं। जनता में खुसुर-फुसुर है कि वो तो सरकार के ध्येय वाक्य का अनुसरण कर रहे है, हमने ही कब्जा किया फिर काटा है अब हम ही बनाएंगे के नक्शे कदम पर चल रहे हैं। शहर के आउटर में अवैध प्लॉटिंग का खेल धड़ल्ले से खेला जा रहा है. शहर के बड़े भू-माफिया किसानों से 30 से 40 लाख रुपए प्रति एकड़ में सौदा कर उसी खेत को से दो से ढाई करोड़ में बेचते हैं. इसमें से 80 लाख से एक करोड़ तक की रकम जनप्रतिनिधियों, पटवारी, आरआई, तहसीलदार, जोन अफसर, थाना प्रभारी और सीएसपी के बीच कमीशन बंटता है. इतना कमीशन बांटने के बाद भी भू- माफियाओं को लाखों की बचत होती है। ये है भू-माफियायों की कमाई का जरिया। जब सब लोग ही मिलकर काम करेंगे तो कौन उसे रोक सकता है। ये तो भू-माफियायों का अघोषित सरकार के खिलाफ ईरान इजराइल वाला युद्ध जैसा खेल है जिसके पास कूबत हो वो जमीन कब्जा ले। नहीं तो अमेरिका रूस जैसे मौके पर चौका लगाने का सोची समझी रणनीति मान लीजिए ।





