छत्तीसगढ़
छत्तीसगढ़ में पटवारियों को अंतिम अल्टीमेटम; 48 घंटे में काम पर नहीं लौटे तो होगी सर्विस ब्रेक
Shubhra Nandy
2 Nov 2026 7:07 AM IST

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प्रशासन ने थमाया नोटिस
बिलासपुर : छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में 13 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठे 259 पटवारियों के खिलाफ जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। राजस्व कार्यों के लगातार प्रभावित होने और किसानों की परेशानियां बढ़ने के बीच प्रशासन ने सभी हड़ताली पटवारियों को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए 48 घंटे के भीतर काम पर लौटने का अल्टीमेटम दिया है। निर्धारित समय सीमा में ड्यूटी पर उपस्थित नहीं होने वाले पटवारियों के खिलाफ एकपक्षीय अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। जानकारी के अनुसार बिलासपुर, बिल्हा, मस्तूरी, तखतपुर और कोटा के अनुविभागीय अधिकारियों (एसडीएम) ने अपने-अपने क्षेत्रों में हड़ताल पर गए पटवारियों को नोटिस जारी किया है। नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि संबंधित पटवारियों को निर्धारित समय सीमा के भीतर अपने हल्का मुख्यालय में उपस्थित होकर कार्यभार ग्रहण करना होगा। ऐसा नहीं करने पर सेवा नियमों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
सर्विस ब्रेक की चेतावनी
प्रशासन ने बिना अनुमति हड़ताल पर जाने को सिविल सेवा आचरण नियम 1965 का उल्लंघन बताया है। साथ ही चेतावनी दी है कि हड़ताल के दौरान अनुपस्थिति की अवधि को सेवा में व्यवधान यानी 'ब्रेक इन सर्विस' माना जा सकता है। हालांकि, यह फिलहाल प्रशासन की चेतावनी है और अंतिम कार्रवाई नोटिस के जवाब तथा संबंधित सेवा नियमों के आधार पर होगी। पटवारियों की हड़ताल का सबसे अधिक असर राजस्व विभाग से जुड़े कार्यों पर पड़ रहा है। जिले में किसान पंजीयन, एग्रीस्टैक प्रमाणीकरण, डिजिटल फसल सर्वे और गिरदावरी जैसे महत्वपूर्ण कार्य प्रभावित हुए हैं। धान खरीदी की तैयारियों के बीच इन कार्यों में देरी से किसानों की परेशानियां बढ़ने की आशंका है।
धान खरीदी से पहले किसानों के भूमि रिकॉर्ड, फसल संबंधी जानकारी और अन्य आवश्यक दस्तावेजों का सत्यापन महत्वपूर्ण होता है। पटवारियों के सामूहिक रूप से कार्य बंद करने के कारण इन प्रक्रियाओं में बाधा उत्पन्न हो रही है। विशेष रूप से डिजिटल फसल सर्वे और गिरदावरी का काम प्रभावित होने से प्रशासन के सामने समय पर कार्य पूरा कराने की चुनौती खड़ी हो गई है। इसके अलावा चक्रवाती तूफान और खराब मौसम से प्रभावित फसलों के नुकसान का आकलन भी हड़ताल के कारण प्रभावित हुआ है। फसल क्षति का सर्वे समय पर पूरा नहीं होने से प्रभावित किसानों को राहत और मुआवजा मिलने की प्रक्रिया में देरी हो सकती है। किसानों के लिए यह चिंता का विषय बना हुआ है।
राजस्व अभिलेखों से संबंधित सभी कार्य प्रभावित
हड़ताल का असर केवल कृषि कार्यों तक सीमित नहीं है। तहसील कार्यालयों में नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन और राजस्व अभिलेखों से संबंधित कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं। जाति, आय और निवास प्रमाणपत्र के लिए आवश्यक राजस्व सत्यापन में भी लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। राजस्व पटवारी संघ के प्रदेश संयोजक ब्रिजेश राजपूत ने प्रशासन के सख्त रुख पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जब तक पटवारियों की लंबित और जायज मांगें पूरी नहीं हो जातीं, तब तक अनिश्चितकालीन आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि प्रशासन को दबाव बनाकर आंदोलन समाप्त कराने के बजाय कर्मचारियों से संवाद स्थापित करना चाहिए।
SDM ने जारी किया अल्टीमेटम
पटवारी संघ का कहना है कि आंदोलन कर्मचारियों की लंबित मांगों को लेकर किया जा रहा है। संघ ने प्रशासन से बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपेक्षा जताई है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में पटवारियों की सभी मांगों का विस्तृत विवरण नहीं दिया गया है। दूसरी ओर एसडीएम आकांक्षा त्रिपाठी ने स्पष्ट किया है कि धान खरीदी और राहत सर्वेक्षण जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण कार्य प्रभावित हो रहे हैं। इसलिए निर्धारित समय सीमा में काम पर नहीं लौटने वाले कर्मचारियों के खिलाफ सेवा नियमों के तहत कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासन की ओर से जारी नोटिस के बाद अब हड़ताली पटवारियों के अगले कदम पर नजर बनी हुई है। एक तरफ कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर आंदोलन जारी रखने की बात कह रहे हैं, वहीं दूसरी ओर प्रशासन आवश्यक राजस्व कार्यों को सुचारु करने के लिए कर्मचारियों की तत्काल वापसी चाहता है। फिलहाल यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नोटिस मिलने के बाद कितने पटवारी काम पर लौटते हैं और प्रशासन तथा कर्मचारी संघ के बीच बातचीत से कोई समाधान निकलता है या नहीं। इस बीच किसानों और आम नागरिकों को राजस्व कार्यों में हो रही देरी का सामना करना पड़ रहा है।
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