छत्तीसगढ़

अपने लीडरों को सुरक्षा देने वाली महिला नक्सली मारी गई

Nilmani Pal
28 Sept 2025 5:40 PM IST
अपने लीडरों को सुरक्षा देने वाली महिला नक्सली मारी गई
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कांकेर। ग्राम छिंदखडक़ जंगल पहाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ हुई। मुठभेड़ में सुरक्षा बलों ने 3 नक्सली को मार गिराया, इसमें एक महिला नक्सली भी शामिल है। मारे गए नक्सलियों पर 14 लाख रूपये का ईनाम था। नक्सलियों का शव जवानों ने बरामद कर लिया है। घटनास्थल से एक एसएलआर, एक 303 रायफल, एक 12 बोर बरामद एवं अन्य नक्सल सामान मिला है। कांकेर व गारियाबंद डीआरजी के साथ बीएसएफ जवानों की संयुक्त कार्रवाई में यह सफलता मिली।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कांकेर आई.के.एलेसेला ने बताया कि 28 सितंबर को थाना कांकेर क्षेत्र के मध्य जंगल में डीआरजी एवं बीएसएफ की संयुक्त पार्टी के द्वारा सर्चिंग अभियान प्रारंभ किया गया। अभियान के दौरान 28 सितंबर को थाना कांकेर के ग्राम छिंदखडक़ जंगल पहाड़ी क्षेत्र में पुलिस नक्सली मुठभेड़ हुई। मुठभेड़ पश्चात् घटना स्थल की सर्चिंग के दौरान घटना स्थल से 2 पुरुष व 1 महिला नक्सली का शव बरामद हुआ, वहीं बड़ी मात्रा में अन्य नक्सली सामग्री बरामद किया गया।

सुन्दरराज पी. पुलिस महानिरीक्षक बस्तर रेंज, अमित तुकाराम कांबले उप महानिरीक्षक कांकेर रेंज कांकेर, विपुल मोहन बाला उप महानिरीक्षक बीएसएफ सेक्टर कन्हारगांव भानुप्रतापपुर, आई.के.एलिसेला उप महानिरीक्षक/वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, कांकेर, निखिल राखेचा पुलिस अधीक्षक गरियाबंद ने संयुक्त रूप से जानकारी दी कि मुठभेड़ में मारे गए माओवादियों की प्रथम दृष्टिया सरवन मडकम उर्फ विश्वनाथ उर्फ बुधराम पुनेम एसीएम, सीतानदी/रावस समन्वय एरिया कमेटी- सचिव ईनाम 8 लाख रूपये, राजेश उर्फ राकेश हेमला, एसीएम, नगरी एरिया कमेटी/गोबरा एलओएस कमाण्डर ईनाम 5 लाख रूपये और बसंती कुंजाम उर्फ हिडमें पीएम, समन्वय/प्रोटेक्शन टीम मैनपुर-नुआपाड़ा सदस्य ईनाम 1 लाख रूपये के रूप मे इनकी पहचान हुई। इन पर उपरोक्तानुसार ईनाम भी घोषित था। बस्तर के आईजी सुन्दरराज पी.ने कहा कि विषम भौगोलिक परिस्थितियों और कठिन मौसम के बावजूद बस्तर में तैनात पुलिस एवं सुरक्षा बल भारत सरकार तथा छत्तीसगढ़ शासन की मंशा के अनुरूप और बस्तरवासियों की आकांक्षाओं के अनुरूप जनजीवन और संपत्ति की सुरक्षा हेतु पूर्ण निष्ठा के साथ कार्य कर रहे हैं। आईजी ने माओवादी कैडरों से अपील की कि वे यह यथार्थ स्वीकार करें कि माओवाद समाप्ति के कगार पर है। अब समय आ गया है कि वे हिंसा का मार्ग त्याग कर सरकार की पुनर्वास नीति का लाभ उठाते हुए मुख्यधारा से जुड़ें। यदि वे अवैध और हिंसक गतिविधियाँ जारी रखते हैं तो उन्हें कठोर परिणाम भुगतने होंगे।


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