छत्तीसगढ़

देश में नकली दवा तस्कर-माफिया सक्रिय

Nil dhankar
26 Dec 2025 12:04 PM IST
देश में नकली दवा तस्कर-माफिया सक्रिय
x

उत्तर भारत-छत्तीसगढ़ में नक़ली दवाओं के खेल में रेलमपेल, प्रमुख होलसेल मंडी दिल्ली-रायपुर में नक़ली दवाओं का खेल

पटना, लखनऊ, मुंबई, वापी, सूरत, दिल्ली एनसीआर, डुप्लीकेट मेडिसीन के जकड़ में, तस्करी और नकली दवाई फैक्ट्री का फैला कारोबार

नई दिल्ली (जसेरि)। नक़ली दवाओं का खेल देश सहित छत्तीसगढ़ में रेलमपेल मचा हुआ है। दिल्ली के हलसेल मार्केट और मुंबई मंडी लखनऊ, अहमदाबाद, पटना सहित छत्तीसगढ़ के प्रमुख होलसेल मंडी रायपुर से नक़ली दवाओं का खेल निरंतर जारी है। नक़ली दवाइयों के खेल से जनता परेशान हो रही है और बीमार मरीज के स्वास्थ्य में सुधार के बजाय उसकी तबीयत औऱ ज़्यादा खराब हो रही है । सर्दी जुकाम से लेकर पैरासिटामोल की दवाई तक और जख्म मिटाने वाली क्रीम से लेकर इंजेक्शन का सब नक़ली मिल रहा है। बड़े- बड़े ब्रांड की दवाई भी कम रूद्दवाली दवाई भी मार्केट में उपलब्ध है जो MRP रेट से सत्तर-अस्सी पर्सेंट डिस्काउंट में मिलती है। पूरे छत्तीसगढ़ सहित भारत में इसी स्तर की दवाइयों की बिक्री हो रही है। दवा माफिय़ाओं का सिंडिकेट नकली दवाओ को पूरे देश में फैला चुकी है । आम जनता को दवाइयां लेने के बाद भी राहत नहीं मिलती और तीन दिन का खुराक लेने से ठीक होने वाली बीमारी भी एक हफ़्ता तक चलता है और ज़बरन दवाई ज़्यादा खऱीदनी पड़ती है। डॉक्टर बार-बार दवाई बदल कर देते हैं और इलाज को लंबा करते हैं ताकि पैसे और फ़ीस के नाम पर कमाई करते रहे। ऊपर से डॉक्टरों के बढ़ी हुई फ़ीस और अलग अलग तरह की जाँच करवाई जाती है जिसमें जनता का पैसा इलाज के नाम पर पानी की तरह बहता है बड़े ब्रांड एंटीबायटिक क्रीम बेटोंनोवेऐसी, बेटानिल एवं अन्य एंटीबायटिक क्रीम डुप्लिकेट और या मिलती जुलती क्रीम मार्केट में आसानी से उपलब्ध है जिसमें मेडिकल स्टोर वालों को 1सौ रुपये में सौ रुपया की कमाई होती है यानी की हंड्रेड परसेंट आम दानी पूरे भारत में लगातार नक़ली मेडिकल सामानों का जीवन उपयोगी दवाइयों का जख़़ीरा फैला हुआ है जाँच एजेंसियां कभी कभार अलग अलग जगह में कार्रवाई ज़रूर करती है उत्तराखंड वापी गुजरा, पटना, दिल्ली, मुंबई, पुणे, इंदौर और एनसीआऱ दिल्ली के आस पास इलाकों में नक़ली दवाइयों की या मिलते जुलते बड़े ब्रांडों के नक़ल वाली दवाई बड़े पैमाने में बनायी जा रही है।

हिमाचल के 30 दवा उद्योगों में कम मानक (एमजी) की दवाईयां उपयोग के कारण जांच एजेंसी ने फैक्ट्री बंद की

हिमाचल में दवा निर्माण में गुणवत्ता मानकों से समझौता करने वाले उद्योगों के खिलाफ नियामक एजेंसियों की सख्ती लगातार और निर्णायक रूप लेती जा रही है। निर्धारित दवा निर्माण नियमों और गुणवत्ता मानकों की अनदेखी पाए जाने पर प्रदेश के 30 से अधिक दवा उद्योगों में उत्पादन पूरी तरह ठप कर दिया गया है। यह कार्रवाई राज्य दवा नियंत्रक प्राधिकरण और सीडीएससीओ द्वारा दिसंबर 2022 से शुरू रिस्क बेस्ड इंस्पेक्शन (आरबीआई) व्यवस्था के तहत की गई है, जिसे दवा निर्माण में लापरवाही रोकने के उद्देश्य से नियमित निगरानी प्रणाली के रूप में लागू किया गया था। दिसंबर 2022 से अक्तूबर 2025 तक राज्य दवा नियंत्रक प्राधिकरण और सीडीएससीओ की संयुक्त टीमों द्वारा प्रदेश के करीब 150 दवा निर्माण उद्योगों का निरीक्षण किया जा चुका है। इन निरीक्षणों के दौरान गंभीर तकनीकी और गुणवत्ता संबंधी खामियां सामने आने पर 30 से अधिक इकाइयों में उत्पादन पूरी तरह बंद करने के आदेश जारी करने पड़े, जबकि 35 अन्य उद्योगों में कुछ विशेष उत्पादों या उत्पादन लाइनों पर आंशिक रूप से रोक लगाई गई है। चिंताजनक तथ्य यह है कि जिन इकाइयों पर पूर्ण रूप से स्टॉप मैन्युफैक्चरिंग के आदेश लागू किए गए थे। चालू वर्ष में ही लगभग 70 दवा निर्माण इकाइयों का निरीक्षण किया गया, जिनमें से 30 से अधिक इकाइयों में गुणवत्ता मानकों के गंभीर उल्लंघन पाए जाने पर उत्पादन बंद करने के आदेश जारी करने पड़े।

छत्तीसगढ़ में नकली दवाइयों की हो रही है बेखौफ सप्लाई! विभाग ने की कड़ी कार्रवाई, अलर्ट जारी

छत्तीसगढ़ खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग द्वारा बाजार में संदिग्ध और गैर कानूनी रूप से आवागमन हो रहे नकली-अवमानक औषधियों के ऊपर बड़ा प्रहार किया गया है। विभाग ने कड़ा एक्शन लेते हुए तीन दवा निर्माता कंपनियों पर कार्रवाई की है। दरअसल विभाग को सूचना मिली थी कि नागपुर गोल्डन ट्रांसपोर्ट गोगांव, रायपुर (छ।ग।) में एक दवा की डाक को किसी व्यक्ति या दुकान द्वारा प्राप्त नहीं किया जा रहा है और दवा के नकली होने का संदेह है। इस सूचना को गंभीरता से लेते हुए औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 के प्रावधानों के अंतर्गत निरीक्षण दल गठित किया गया। निरीक्षण के दौरान बिल्टी एवं इंदौर से प्रेषित दवा की डाक का अवलोकन कराया गया, जिसमें पाया गया कि बिल में जिन दवाओं का उल्लेख था, वे डाक में उपलब्ध नहीं थीं। डाक में अन्य तीन प्रकार की औषधियां पाई गईं। बरामद दवाओं का विधिवत रूप से चार-चार भागों में नमूना संकलित कर शेष मात्रा को जब्त किया गया। संकलित नमूनों को औषधि परीक्षण प्रयोगशाला, कालीबाड़ी, रायपुर परीक्षण के लिए भेजा गया। प्रकरण में आगे की विस्तृत विवेचना जारी है। दवाओं के वास्तविक स्रोत, आपूर्ति श्रृंखला एवं संभावित अवैध गतिविधियों की जांच की जा रही है। जांच के दौरान बीते 16 दिसंबर को राज्य औषधि परीक्षण प्रयोगशाला द्वारा जारी रिपोर्ट में तीनों औषधियां निर्माता मेसर्स जी बायोटेक प्राइवेट लिमिटेड, नहान रोड, सोलन, हिमाचल प्रदेश , निर्माता मेसर्स जी।सी हेल्थ केयर, सोलन, हिमाचल प्रदेश तथा निर्माता मेसर्स लार आक्स फार्मास्युटिकल्स गोपालकृष्णन चेन्नई की दवाएं अवमानक व नकली पाई गई। खाद्य एवं औषधि प्रशासन, छत्तीसगढ़ द्वारा केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन नई दिल्ली एवं छत्तीसगढ़ के समस्त जिलों में अधिकारियों को इस सम्बन्ध में अलर्ट जारी कर दिया गया है। अवमानक औषधियों के परिवहन व बाजार में संभावित उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए नियमानुसार कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश जारी किये गए हैं।

इस नंबर पर कर सकते हैं शिकायत

आम जनता, दवा विक्रेताओं और परिवहन एजेंसियों से अपील की गई है कि वे संदिग्ध दवाओं या किसी भी अनियमित गतिविधि की सूचना तुरंत विभाग के हेल्पलाइन नंबर 9340597097 पर प्रदान करें। केवल लाइसेंस प्राप्त एवं विश्वसनीय स्रोतों से ही दवाओं की खरीद एवं आपूर्ति करें। विभाग राज्य में सुरक्षित, गुणवत्तापूर्ण एवं प्रामाणिक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए पूर्णत: प्रतिबद्ध है।

आगरा में 72 करोड़ की नकली दवाएं सीज: पुडुचेरी के फर्मो से हुई थी सप्लाई

नकली दवा सिंडिकेट पर शिकंजा कसने के लिए औषधि विभाग की टीम ने 28 नमूनों में से 27 नमूने पास होने के बाद जांच तेज कर दी है। हे मां मेडिको और बंसल मेडिकल एजेंसी पर पकड़ी गईं दवाएं पुडुचेरी की फर्मों से सप्लाई की गईं थी, केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन और पुडुचेरी के औषधि नियंत्रण विभाग की संयुक्त टीम ने पुडुचेरी में नकली दवा की फैक्ट्री पकड़ी है, औषधि विभाग की टीम नकली दवा सिंडिकेट के विरुद्ध सुबूत जुटाने के लिए पुडुचेरी जाएगी। औषधि विभाग और स्पेशल टास्क फोर्स की टीम ने 22 अगस्त को फव्वारा दवा बाजार में हे मां मेडिको और बंसल मेडिकल एजेंसी और उनकी सहयोगी फर्म पर छापा मारा था। पांच फर्म और गोल्डन ट्रांसपोर्ट कंपनी से 28 दवाओं के नमूने लिए थे। 72 करोड़ की दवाएं सीज और जब्त की गईं थी। जिन 28 दवाओं के नमूने लिए गए थे उसमें से अधिकांश दवाएं पुडुचेरी की श्री अमान फार्मा, मीनाक्षी फार्मा और परम हाउस से खरीदने के बिल मिले थे। 28 नमूनों में से 27 दवाओं में जो साल्ट और मात्रा (दवा) दर्शाई गई थी जांच में वही मात्रा मिली। जबकि माक्स सीवी 625 दवा अधोमानक निकली है। सहायक औषधि आयुक्त अतुल उपाध्याय ने बताया कि सनोफी, सन फार्मा, यूएसवी, एमएसडी सहित अन्य फार्मा कंपनियां ने दवाओं को नकली बताया है। बंसल मेडकोज से एंटी एलर्जिक एलेग्रा टैबलेट बड़ी मात्रा में मिली थी इतनी अधिक मात्रा में कंपनी ने दवा उत्तर प्रदेश में सप्लाई ही नहीं की थी। वहीं, पुडुचेरी की जिन फर्मों से दवाएं खरीदी गईं थी उस स्थान पर वे कंपनी नहीं मिली, नोटिस भी वापस आ गए। आगरा में हुई कार्रवाई के बाद सितंबर में पुडुचेरी में दवा माफिया ए राजा की मीनाक्षी फार्मा पर केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन और पुडुचेरी के औषधि नियंत्रण विभाग की संयुक्त टीम ने छापा मारा। बंद फैक्ट्री से दो करोड़ की दवाएं और उपकरण जब्त किए हैं।

इसके बाद नवंबर में भी सीडीएससीओ ने तीन फार्मा कंपनियों पर कार्रवाई की है। मुख्यालय स्तर से औषधि विभाग की टीम पुडुचेरी भेजी जाएगी। नकली दवा फैक्ट्री से हे मां मेडिको, बंसल मेडिको सहित किन फर्मों को पिछले कुछ वर्षों में दवाओं की सप्लाई की गई, इसके सुबूत जुटाए जांएगे।

कारोबारी के घर एफडीए की रेड, 50 लाख की दवाइयों जब्त

सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में दवाओं के एक बड़े अवैध कारोबार का खुलासा हुआ है। खाद्य एवं औषधि प्रशासन की टीम ने सरस्वती मेडिकल स्टोर के संचालक खेमराज बानी के घर पर छापेमारी कर करीब 50 लाख रुपये की एलोपैथिक और आयुर्वेदिक दवाइयां जब्त की हैं। जब्त दवाओं की मात्रा लगभग 200 कार्टून बताई जा रही है, जिन्हें ट्रक में भरकर ले जाया गया। FDA के अनुसार, कारोबारी ने ये दवाइयां अपने घर के तीन अलग-अलग कमरों में छिपाकर रखी थीं।

जांच के दौरान कारोबारी के बेटे के मोबाइल फोन से अहम सुराग मिले, जिसके बाद छिपाकर रखे गए स्टॉक तक टीम पहुंच सकी। दरअसल, 16 दिसंबर को रायपुर और रायगढ़ से आए चार अधिकारियों की टीम ने सारंगढ़-बिलाईगढ़ में छापा मारा था। उस समय सरस्वती मेडिकल स्टोर और संचालक के घर से केवल 2 लाख 24 हजार रुपये की दवाओं की जब्ती दिखाई गई थी। बाद में विभाग को जानकारी मिली कि उसी वक्त घर में लाखों रुपये की दवाइयां मौजूद थीं, जिन्हें नजरअंदाज कर दिया गया। इस पर कार्रवाई में लापरवाही और खानापूर्ति के आरोप लगे।जांच के दौरान कारोबारी के बेटे के मोबाइल में नागपुर गोल्डन ट्रांसपोर्ट और गोगांव से पहले पकड़ी गई नकली दवाइयों की तस्वीरें मिलीं। इन्हीं तस्वीरों के आधार पर FDA को बड़े स्टॉक का पता चला।

प्रारंभिक जांच में नकली दवाओं के तार इंदौर और नागपुर से जुड़े होने की आशंका जताई जा रही है। FDA ने जब्त दवाओं में से तीन सैंपल जांच के लिए रायपुर लैब भेज दिए हैं। साथ ही कारोबारी और उससे जुड़े अन्य लोगों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। खाद्य एवं औषधि विभाग रायपुर के सहायक औषधि नियंत्रक संजय कुमार नेताम ने बताया कि यह कार्रवाई उच्च अधिकारियों के निर्देश पर की गई। उन्होंने कहा कि जब्त दवाओं में ज्यादातर जेनेरिक मेडिसिन हैं, जिनका उपयोग बाजार में बड़े पैमाने पर होता है। उन्होंने यह भी बताया कि 16 दिसंबर की पहली कार्रवाई में लापरवाही और कथित लेन-देन के आरोपों को लेकर रायपुर और रायगढ़ के चार अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच शुरू की गई है।

Next Story
null