छत्तीसगढ़

आबकारी अफसर की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र की जांच शुरू

Nilmani Pal
20 May 2026 8:59 AM IST
आबकारी अफसर की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र की जांच शुरू
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छग

बिलासपुर. आबकारी अधिकारी के फर्जी जाति प्रमाणपत्र बनवाने का मामला हाईकोर्ट पहुंच गया है. कोर्ट ने बिलासपुर की जिला स्तरीय जाति छानबीन समिति को जल्द जांच कर रिपोर्ट देने का आदेश दिया है.

आबकारी अफसर राजेश हेनरी पर आरोप है कि बिलासपुर में बने फर्जी प्रमाणपत्र के जरिए वह पिछले 35 साल से आबकारी विभाग में नौकरी कर रहे हैं. इस मामले में भोपाल निवासी प्रभात पांडे ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी. इसमें बताया कि मध्यप्रदेश के अतिरिक्त आबकारी आयुक्त राजेश हेनरी ने फर्जी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी हासिल की है. उन्होंने इस संबंध में 22 जून 2024 को शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन लंबे समय से यह मामला बिलासपुर की जिला स्तरीय जाति सत्यापन समिति के पास लंबित है.

याचिका में बताया गया कि सूचना के अधिकार के तहत ली गई जानकारी के अनुसार उक्त अधिकारी के प्रमाणपत्र में बिलासपुर तहसील के सील और साइन मिले. लेकिन, जब बिलासपुर तहसील कोर्ट के दायरा पंजी में साल 1990-91 के प्रकरण की जानकारी ली गई, तब पता चला कि तहसील कार्यालय में उनके जाति प्रमाण पत्र का प्रकरण ही दर्ज नहीं है. याचिकाकर्ता का आरोप है कि, छत्तीसगढ़ की उच्च स्तरीय प्रमाणीकरण छानबीन समिति ने उनके अनुसूचित जनजाति (एसटी) प्रमाणपत्र को जांच के लिए जिला स्तरीय समिति को भेजा था. लेकिन, दो साल से अफसर जांच ही नहीं कर रहे.

याचिकाकर्ता ने मांग की थी कि, समिति को एक निश्चित समय सीमा के भीतर कार्रवाई पूरी करने के निर्देश दिए जाएं. क्योंकि देरी से सत्यापन का उद्देश्य ही खत्म हो जाएगा. इसके अलावा यह भी मांग की थी कि जांच पूरी होने तक संबंधित अधिकारी को आरक्षण के लाभ से वंचित रखा जाए और प्रमाण पत्र अवैध पाए जाने पर कानूनी कार्रवाई की जाए. जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की सिंगल बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि, जब शिकायत सक्षम प्राधिकारी के पास लंबित है, तो उसे उचित समय के भीतर तय किया जाना चाहिए. हाईकोर्ट ने सभी संबंधित पक्षों को सुनवाई का अवसर देते हुए समयसीमा में फैसला सुनिश्चित करने के निर्देश दिए.


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