छत्तीसगढ़

दुश्मनी लाख सही खत्म ना कीजे रिश्ता, दिल मिले या न मिले हाथ मिलाते रहिए

Nilmani Pal
14 Nov 2025 11:59 AM IST
दुश्मनी लाख सही खत्म ना कीजे रिश्ता, दिल मिले या न मिले हाथ मिलाते रहिए
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ज़ाकिर घुरसेना/ कैलाश यादव

छत्तीसगढ़ की तीन करोड़ जनता के लिए सीएम जनदर्शन विश्वास की मजबूत डोर बन गई है, जिस विश्वास से जनता जनदर्शन में पहुंची उसको वहीं पर समाधान मिलने से त्वरित लाभ मिला। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि जनदर्शन प्रदेश सरकार की संवेदनशीलता और जवाबदेही का प्रतीक है। उन्होंने स्पष्ट किया, हमारी कोशिश है कि अधिक से अधिक लोगों की समस्याओं का उसी समय समाधान किया जाए। कार्यक्रम में महिलाएँ, छात्र, किसान, बुजुर्ग और दिव्यांगजन बड़ी संख्या में पहुंचे। आवास, छात्रवृत्ति, रोजगार, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े आवेदन प्रस्तुत किए गए, जिनमें से अधिकांश का समाधान उसी दिन कर दिया गया। लोगों के चेहरों पर राहत और संतोष की मुस्कान इस पहल की सफलता को बयां कर रही थी। जनता में खुसुर-फुसुर है कि सरकार को पूरे बाकी के तीन सालों तक जनदर्शन चलाना चाहिए ताकि पीडि़त मानवता की सेवा के साथ समस्या का समाधान हो, प्रदेश में जनता की सेवा का इससे बड़ा कोई प्रत्यक्ष उदाहरण नहीं हो सकता है। बधाई हो सीएम साहब आपका मजबूत डोर जनता के साथ गठबंधन हो गया है। जनदर्शन में पक्ष विपक्ष सभी आ रहे हैं और सभी की बात सुनी जा रही है और उनको फायदा भी पहुंचाया जा रहा है। इसी बात पर मशहूर शायर निदा फाज़ली का एक शेर याद आया दुश्मनी लाख सही खत्म ना कीजे रिश्ता, दिल मिले या न मिले हाथ मिलाते रहिए।

जो वोएगा वही काटेगा, तेरा किया आगे आएगा....

कहा जाता है कि रिश्ता इंसान के जीवन में एक तरह से फसल ही होता है मतलब जो हम बोयेंगे वही काटेंगे लेकिन सब कुछ जानते हुए देखते हुए भी इंसान गलत फसल बो कर सही उपज की कामना करता है जो संभव नहीं है। पिछले दिनों आईपीएस पर एक महिला ने आरोप लगाया था साथ ही कई अधिकारी, कर्मचारी, बाबा भी इसी मामले में जेल की हवा खा रहे हैं फिर ये लोग सुधरते क्यों नहीं? कहते हैं कि खरबूजे को देखकर खरबूजा रंग बदलता है, ऐसा करने वाले शायद ये भूल जाते हैं कि रंग बदलने के पहले तक खरबूजा सेफ रहता है और रंग बदलते ही काटा जाता है। दरअसल मामला जांजगीर के कृषि विभाग में कार्यरत एक महिला कृषि विस्तार अधिकारी ने उप संचालक पर मानसिक प्रताडऩा के गंभीर आरोप लगाए हैं। महिला अधिकारी ने आरोप लगाया है कि उन्होंने उनका वेतन रोक दिया और जब उसने कारण पूछा तो उसे अकेले अपने शासकीय आवास पर बुलाया। अब इस पर सही जांच हो तो अधिकारी का निपटना तो तय है इसी बात पर किसी ने ठीक ही कहा है जो वोएगा वही काटेगा, तेरा किया आगे आएगा।

खुशिय़ां बांटते रहो न्योता देते रहो ...

राजधानी रायपुर में सरकारी कर्मचारी अब अपने जन्मदिन को केवल व्यक्तिगत उत्सव नहीं, बल्कि सेवा और सामाजिक सरोकार का अवसर बना रहे हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की मंशा के अनुरूप जिले में शुरू की गई पहल प्रोजेक्ट आओ बाँटें खुशियाँ अब लगातार सकारात्मक उदाहरण पेश कर रही है। इस अनूठी पहल का उद्देश्य है- समाज के वंचित वर्गों तक खुशियाँ पहुँचाना, बच्चों के जीवन में मुस्कान लाना, और सरकारी कर्मचारियों को सामाजिक उत्तरदायित्व से जोडऩा। मुख्यमंत्री के निर्देश पर प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना और न्योता भोज कार्यक्रम के साथ इस परियोजना को जोड़ा गया है। इसके तहत जिला प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया है कि किसी भी शासकीय कर्मचारी का जन्मदिन केवल एक औपचारिक अवसर न होकर समाजसेवा और बच्चों के साथ खुशियाँ बाँटने का दिन बने। जनता में खुसुर-फुसुर है कि एैसे न्योता भोज से क्या मतलब जब दिन भर लोग अपने काम के लिए चक्कर काटते है जब थक हार कर घर जाते है तो उनके ही बच्चों को अधिकारी न्योता भोज के नाम पर जन्म दिन मनाकर बच्चों के साथ खुशियां बांटते है।

किसानों के खिलाफ साजिश ...

फैक्ट्री लगाने के फायदे और नुकसान भी है, ताजा मामला आरंग विकासखंड और अभनपुर विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत भिलाई स्थित मोदी बायोटेक प्राइवेट लिमिटेड द्वारा औद्योगिक कचरे और दूषित पानी को सीधे स्थानीय नाले में बहाए जाने का है, जिसके कारण क्षेत्र में एक गंभीर पर्यावरणीय और कृषि संकट उत्पन्न हो गया है। इस लापरवाही के चलते कई मवेशियों और जलीय जीव-जंतुओं की दर्दनाक मौत हो चुकी है। साथ ही किसानों के फसलों को भी भारी नुकसान पहुंचा है।ग्रामीण जनता में खुसुर-फुसुर है कि ये फैक्ट्री वाले किसानों को दोनों तरफ से मारते है पहले जमीन ले लेते है फिर फसल को बर्बाद कर फिर से जमीन पर कब्जा करने के लिए तरह -तरह हथकंडे अपनाते है, जैसे अभी दूषित पानी छोडक़र किसानों के साथ जीवजंतुओं को नुकसान पहुंचा रहे है। ताकि किसान औने पौने में फैक्ट्री के विस्तार के लिए जमीन बेच दे।

प्रकृति प्रेमियों को फिर रोमांचित करेगी तितलियां ...

प्रकृति प्रेमियों और तितली विशेषज्ञों के लिए दिसंबर माह में एक अद्भुत अनुभव का अवसर आने वाला है। राज्य शासन द्वारा आयोजित तीन दिवसीय कांगेर वैली बटरफ्लाई मीट 2025 का आयोजन 5 से 7 दिसंबर 2025 तक सुरम्य कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान में किया जा रहा है। बस्तर की इस रहस्यमयी घाटी को जंगल का जीवित काव्य कहा जाता है, जहाँ सदियों पुराने वृक्ष समय की कहानियाँ फुसफुसाते हैं और तितलियाँ अपने रंगीन पंखों से प्रकृति के कैनवास पर नई कविताएँ रचती हैं। इस आयोजन में भाग लेने वाले प्रतिभागियों को जंगल की लय में खो जाने, वन्यजीवों के बीच जीवन की नजदीकी को महसूस करने और तितलियों की अद्भुत विविधता को देखने का सुनहरा मौका मिलेगा। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की मंशानुरूप इस आयोजन से वन्यजीव प्रेमियों को प्रकृति का लुफ्त उठाने का मौका मिलेगा और बस्तर पर्यटन को भी नया आयाम प्राप्त होगा। जनता में खुसुर-फुसुर है कि सरकार ने बस्तर को नक्सल मुक्त कर जनता को फुल आजादी तितलियों की तरह देना चाहती है तकि उनके जीवन की स्वतंत्रता यथावत बनी रहे वो हमेशा प्रकृति से जुड़े रहे। यहीं है प्रकृित का वास्तविक स्वरूप जो बस्तर में दिखाई देगी।

कैसा होगा बस्तर का नया स्वरूप...

बीजापुर जिले के नेशनल पार्क क्षेत्र में छत्तीसगढ़ पुलिस, जिला रिज़र्व गार्ड और स्पेशल टास्क फोर्स की संयुक्त कार्रवाई में सुरक्षाबलों को महत्वपूर्ण सफलता मिली। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सुरक्षाबलों की इस सफलता की सराहना करते हुए कहा कि यह उपलब्धि पुलिस बलों के उत्कृष्ट समन्वय, साहस और सटीक रणनीति का परिणाम है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद के पूर्ण उन्मूलन के संकल्प के साथ मिशन मोड में कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार और सुरक्षा एजेंसियाँ एकजुट होकर इस लड़ाई को निर्णायक अंत तक ले जाएंगी। जनता में खुसुर-फुसुर है कि नक्सल मुक्त बस्तर एक सुखद अहसास होगा, मगर उसके बाद नया बस्तर कैसा होगा इस बात को लेकर बस्तरवासी चिंतित है, क्या बस्तर का मूल स्वरूप बना रहेगा या इस पर कोई नया आडंबर रचा जाएगा। जिससे बस्तर की पहचान खत्म हो जाएगा। यह विचारणीय सवाल है।

आम जनता की क्या बिसात...

पिछले दिनों एक हैरान करने वाला मामला सामने आया की पार्किंग के नाम से दो तहसीलदारों की पिटाई हो गई। दोनों तहसीलदार खदान एरिया का मुआयना कर मसाज के लिए पार्लर पहुंचे थे वहीँ पर पार्किंग के नाम पर स्थानीय युवको ने दोनों तहसीलदारों की धुनाई कर दी। वो बात अलग है की बाद में पुलिस उन बदमाशों की धुनाई करे जिसकी संभावना न के बराबर है। क्योकि सबकी अपनी सेटिंग होती है खैर जनता में खुसुर फुसुर है कि दिन भर के काम के बोझ से परेशान कुछ हल्का होने गए थे लेकिन उत्पाती युवको ने भारी कर दिया यानी सर दर्द दूर करने गए थे बदन दर्द लेकर लौटे। अब सवाल उठता है कि इन असामाजिक तत्वों को शासन प्रशासन का डर क्यों नहीं है। हो सकता है कहीं न कहीं इनकी सेटिंग तो है वर्ना किसी के ऊपर हाथ तो उठाते नहीं. . साथ ही जब अधिकारियो का ये हाल है तो आम जनता की क्या बिसात।

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