
ईएसआईएस में दवा खरीदी में कमीशनखोरी बदस्तूर जारी..., भूपेश की देन अभी तक कायम
विधायक तुलेश्वर मरकाम ने विधानसभा में विभागीय मंत्री से मांगी जानकारी
रायपुर (जसेरि)। राज्य कर्मचारी बीमा सेवाएं ईएसआईएस में दवा खरीदी में कमीशनखोरी और भ्रष्टाचार के मामले में श्रममंत्री के दवा खरीदी पर तत्काल रोक लगाने संबंधी आदेश की खुलेआम अवहेलना की जा रही है। श्रममंत्री लखनलाल देवांगन ने पिछले महीने लगातार दवा खरीदी में कमीशनखोरी की मिल रही शिकायतों के बाद 2025-26 के लिए दवा खरीदी पर रोक लगाने का निर्देश देते हुए संचालक को कार्रवाई से अवगत कराने को कहा था। लेकिन अब तक इप कार्रवाई आगे नहीं बढ़ी है। यहां तक इस मामले की जांच के लिए भी उसी अधिकारी को अधिकृत किया गया है जिस पर कमीशनखोरी का आरोप है। इस पूरे मामले में जिस तरह लिपापोती करने का प्रयास किया जा रहा है उससे भ्रष्टाचार की जड़े कितनी मजबूत हैं इसका पता चलता है। पाली-तानाखार विधायक तुलेश्वर मरकाम ने इस मामले में बरती जा रही हिला हवाला पर विधानसभा में ध्यानाकर्षण सूचना के माध्यम से श्रममंत्री का का ध्यान इस मामले की ओर आकृष्ट कराया है।
ध्यानाकर्षण सूचना के माध्यम से उन्होंने विभागीय मंत्री से पूछा है कि क्या यह कहना सही है कि छ.ग. सरकार के श्रम विभाग के अंतर्गत आने वाली कर्मचारी राज्य बीमा सेवाएं रायपुर के द्वारा लगातार कई वर्षों से छ.ग. सरकार और केन्द्र की मोदी सरकार के द्वारा जारी किये गये आदेश की शासकीय, अर्द्ध शासकीय एवं अन्य अस्पताल, संस्थाएं केवल जेनरीक दवाईयां खरीदेंगे व सभी डॉ. जेनरिक दवा ही लिखेंगे इस प्रकार का आदेश केन्द्र एवं राज्य सरकार के द्वारा जारी किया गया है इसकी अवहेलना विभाग के श्रम सचिव एवं संचालक संचालनालय के बीमा चिकित्सा अधिकारी डाक्टर व कर्मचारी खुलेआम भ्रष्टाचार कर राज्य के बजट से कमीशनखोरी करते हुए ब्राण्डेड दवाईयां कई वर्षों से खरीदी कर अपने डाक्टरों पर दबाव बनाकर लिखवा रहे है। जबकि छ0ग0 सरकार में दवाई उपकरण एवं अस्पतालों को लगने वाली अन्य सामाग्रियों के मांग अनुसार क्रय करने के लिए छ0ग0 मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेषन लिमिटेड की स्थापना की गई है उसके बाद भी भ्रष्टाचार करने के लिए कर्मचारी राज्य बीमा सेवाएं खुद दवा के लिए संचालक संचालनालय के बीमा चिकित्सा अधिकारी प्रथम श्रेणी के द्वारा अपने पत्र क्रमांक त्रश्वहृस् / 9456/2025 श्वस्ढ्ढस्/श्वस्ढ्ढ नवा रायपुर अटल नगर दिनांक 09.09.2025 के माध्यम से बीमा चिकित्सा पदाधिकारी कर्मचारी राज्य बीमा सेवायें प्रभारी समस्त केन्द्र को अपने मनचाहे अनुसार अधिक कमिशन लेने की नियत से लगभग 341 दवाईयों की सूची बनाकर समस्त डिस्पेंसरियों के डाक्टरों दबाव बनाकर केवल 02 ही दिनों में अर्थात 11.09.2025 तक मांग भेजने को कहा गया जबकि रेट कॉन्ट्रैक्ट में लगभग 2000 से अधिक दवाईयां है फिर भी संचालनालय के अधिकारियों के द्वारा ज्यादा कमिशनखोरी करने की नियत से उन्हीं दवाईयों को चिन्हित किया गया और उन्हीं दवाईयों को मांग पत्र में उल्लेख किया गया। डिस्पेंसरियों के डॉक्टरों पर दबाव बनाकर लगभग 341 दवाईयों की सूची अनुसार ही मांग पत्र मंगाया गया इससे यह स्पष्ट है कि डॉक्टर मरीज के बीमारी अनुसार दवा नहीं लिख सकते है संचालनालय के निर्देशानुसार मांग भेजा गया है उन्हे उसी दवाईयों को ही लिखना है। इस बड़े भ्रष्टाचार की शिकायत अनेकोबार कई जनप्रतिनिधियों के द्वारा शासन एवं प्रशासन को की गई जिसे विभागीय मंत्री ने गंभीरता से लेते हुए अपने पत्र क्रमांक 1346 /क्र/मंत्री/वाणिज्य/ उद्योग/सा.उ. / आबकारी / श्रम दिनांक 06.11.2025 के माध्यम से वर्ष 2025-26 के औषधियों के क्रय आदेश को तत्काल निरस्त करते हुए कृत कार्यवाही से अवगत कराने संचालक कर्मचारी राज्य बीमा सेवाएं रायपुर को कहा गया है। मंत्री के द्वारा दिये गये आदेशो की अवहेलना हो रही है आज तक वर्ष 2025- 26 के औषधियों के क्रय आदेश को निरस्त नहीं किया गया है। अत्यंत गंभीर बात यह है कि जिन कर्मचारियों पर इस बड़े भ्रष्टाचार के आरोप लगे है उन्हीं से जांच कराई जा रही है और जांच रिपोर्ट मांगा जा रहा है तो कार्यवाही किस पर होगी मंत्री के आदेशो का पालन न होने भ्रष्ट अधिकारियों से ही भ्रष्टाचार की जांच कराने भ्रष्ट कर्मचारी अधिकारियों पर कार्यवाही नहीं होने के कारण शासन प्रशासन के विरूद्ध आम जनता में अविश्वास एवं आक्रोश व्याप्त है।
सुलगते सवाल...
जिन अधिकारी कर्मचारियों पर ब्रांडेड दवा खरीदी के भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं उन्हीं से शासन के द्वारा जांच करवाई जा रही है व जांच रिपोर्ट मांगा जा रहा है तो कार्रवाई कैसे होगी
दवाई खरीदी का जो आवंटन है वह प्रदेश सरकार का पैसा है जिससे ब्रांडेड दवाइयां खरीदी की जा रही हैं जो कि नियम विरुद्ध है।
छत्तीसगढ़ सरकार में दवाइयां एवं अन्य मेडिकल सामग्रियों की खरीदी के लिए राज्य शासन की संस्था छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन लिमिटेड है जो की सरकार के विभिन्न संस्थाओं को लगने वाली दवाइयां एवं अन्य सामग्री खरीद कर उन्हें उपलब्ध कराती है इस संस्था के होने के बाद भी कर्मचारी राज्य बीमा सेवाएं भ्रष्टाचार करने के लिए अपने स्तर से नियम विरुद्ध तरीके से ब्रांडेड दवाइयां खरीद कर भ्रष्टाचार कर रहे हैं।
केंद्र की मोदी सरकार एवं राज्य सरकार के निर्देश है कि प्रदेश एवं देश के शासकीय अर्थशास्त्र की एवं अन्य सामग्री संस्थाओं के द्वारा केवल जेनेरिक दवाई ही खरीदी की जावे एवं डॉक्टर के द्वारा जेनेरिक दवाइयां को ही लिखा जावे इसका भी उल्लंघन ब्रांडेड दवाइयां खरीद कर कर रहे हैं।
रेट कांटेक्ट में लगभग 2000 दवाइयां हैं उसमें से मात्र 350 दवाइयां को चिन्हित कर जिसमें ज्यादा कमीशन है उन्हें दवाइयां का मांग डिस्पेंसरियों के डॉक्टर पर दबाव बनाकर मांग भेजने एवं उन्हीं दवाईयों को मरीजों को लिखने के लिए कहा जा रहा है डिस्पेंसरी के डॉक्टर मरीज की बीमारी अनुसार दवा नहीं लिख पा रहे हैं वह संचनालय कर्मचारी राज्य बीमा सेवाएं के दबाव में उनके बताएं अनुसार ही दवाइयां लिख पा रहे हैं यह भ्रष्टाचार कई वर्षों से चल रहा है इसकी जांच होने पर कई 100 करोड़ का बड़ा भ्रष्टाचार उजागर होगा। विभागीय मंत्री के द्वारा औषधीय के क्रय आदेश वर्ष 2025 26 को तत्काल निरस्त करने के निर्देश का भी पालन अधिकारियों के द्वारा नहीं किया जा रहा है।





