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Sarangarh Bilaigarh. सारंगढ़ बिलाईगढ़। कलेक्टर डॉ संजय कन्नौजे की अध्यक्षता में शनिवार को कलेक्ट्रेट में फाइलेरिया (हाथी पांव) रोग से जुड़े प्रश्नों के समाधान के लिए प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया। फाइलेरिया को लेकर प्रिंट व इलेक्ट्रानिक मीडिया के सभी पत्रकारों ने प्रश्न किये, जिनका उत्तर कलेक्टर डॉ. कन्नौजे और सीएमएचओ डॉ निराला ने दिया। फाइलेरिया क्या है ? यह एक संक्रामक बीमारी है जो मच्छरों के काटने में फैलती है। इसे सामान्य भाषा में हाथीपाँव भी कहा जाता है। बीमारी कैसे फैलती है ? संक्रमित क्यूलेक्स मच्छर किसी स्वस्थ व्यक्ति को काटता है, तो शरीर में फाइलेरिया के सूव्स कीटाणु माइक्रो फाइलेरिया छोड देता है। क्या फाइलेरिया वंशानुगत है ? जी नहीं, यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में केवल मच्छर के काटने से फैलता है, यह जन्मजात या आनुवंशिक नहीं है।
लक्षण ? शुरुआत में बुखार, बदन में खुजली, या अंगों में सूजन हो सकती है। लंबे समय बाद हाथ, पैर या अंडकोष में भारी सूजन आ जाती है। संक्रमित व्यक्ति को तुरंत पता चल जाता है ? नहीं । इसके कीटाणु शरीर में 5 में 15 साल तक बिना किसी बड़े लक्षण के रह सकते हैं। जब लक्षण दिखते हैं, तब तक काफी नुकसान हो चुका होता है। सामुहिक दवा वितरण अभियान, जिनमें सरकार प्रभावित क्षेत्रों में पूरी आबादी को फाइलेरिया बचाव की मुफ्त दवा खिलाती है। आमतौर पर यह दवा किसे खानी चाहिए ? 2 वर्ष से अधिक आयु के सभी स्वस्थ व्यक्तियों को यह दवा खानी चाहिए। किसे यह दवा नहीं खानी चाहिए ? 2 वर्ष से कम उम्र के बच्चे। गर्भवती महिलाएं ,अति वृद्ध और बहुत अधिक बीमार व्यक्ति को। क्या खाली पेट दवा खा सकते हैं ? नहीं यह दवा हमेशा कुछ खाने के बाद ही लेनी चाहिए। दवा स्वास्थ्य कार्यकर्ता के सामने ही क्यों खायें ? ताकि यह सुनिश्चिंत हो सके कि – आपने सही खुराक ली है व यदि कोई तत्काल समस्या हो, तो स्वास्थ्य कर्मी आप की मदद कर सके। क्या इन दवाओं के कोई साइड इफेक्ट्स हैं ? स्वस्थ व्यक्ति पर इसका कोई असर नहीं होता। लेकिन जिनके शरीर में माइक्रो फाइलेरिया होते हैं, उन्हें मामूली चक्कर, उल्टी, सिर दर्द हो सकता है। दवा खाने बाद चक्कर आने का क्या मतलब है ? इसका मतलब है कि- दवा शरीर में मौजूद फाइलेरिया के कीटाणुओं को मार रही है। यह एक सकारात्मक संकेत है। अगर दवा खाने के बाद तबीयत बिगड़े तो क्या करें?
घवराएं नहीं। यह लक्षण स्वतः ठीक हो जाते हैं। अधिक समस्या होने पर स्वास्थ्य केंद्र या रैपिड रिस्पांस टीम से संपर्क करें। क्या यह दवा अन्य बीमारी की दवा के साथ ली जा सकती है ? हाँ, सामान्यतः यह सुरक्षित है, लेकिन यदि आप किसी गंभीर बीमारी का इलाज करा रहे हैं, तो आंगनबाड़ी कार्यकर्ता या डॉक्टर को जरूर बताए।
बैठक में उपस्थिति
जिले के स्वास्थ्य विभाग के ऑफिस इंचार्ज डिप्टी कलेक्टर शिक्षा शर्मा, सीएमएचओ डॉ. एफ आर निराला, तहसीलदार प्रकाश पटेल, डीपीएम नन्दलाल इजारदार, रोशन सचदेवा, पत्रकारों में यशवंत सिंह ठाकुर, भरत अग्रवाल, रामकिशोर दुबे, ओमकार केशरवानी, गोविंद बरेठा, राजेश यादव, प्रशांत प्रधान, योगेश कुर्रे, दिलीप टंडन, धीरज बरेठ की उपस्थिति रही।
दवा खाकर खत्म कर सकते हैं हाथीपांव बीमारी
फाइलेरिया याने हाथीपांव की बीमारी एक परजीवी के कारण होता है जिसे मादा क्यूलेक्स मच्छर के द्वारा फैलाया जाता है। हाथीपांव की बीमारी के परजीवी जब सूक्ष्म रूप में होता है तभी उसे नष्ट कर सकते है। जवान होने की स्थिति में इसे समाप्त नहीं किया जा सकता। यही कारण है कि परजीवी को नष्ट करने के लिए पूरे समुदाय को आईडीए की दवाई खिलाई जाती है। परजीवी के बड़े होने की स्थिति में मानव शरीर के लासिका तंत्र को बाधित करता है, परिणाम स्वरूप पैरों में सूजन होती है। एक बार पैर में सूजन हो जाने के बाद इसे ठीक नहीं किया जा सकता है। इसलिए फाइलेरिया होने के पहले ही जब सूक्ष्म रूप में परजीवी होता है तब उसे मारा या नष्ट किया जा सकता है। यही कारण है कि समुदाय को एक साथ दवाई खिलाई जाती है। फाइलेरिया या हाथीपांव उन्मूलन का यह अभियान 10 फ़रवरी से 25 फ़रवरी तक चलाया जाएगा। आंगनवाड़ी केंद्रों, शालाओं, कार्यालयों को बूथ बनाया गया है। लक्षित व्यक्तियों को दवाई खिलाएंगे। इस दवाई को सामने ही खिलाना होता है। कई लोग बाद में खा लेंगे दवाई दे दीजिए कहकर दवा लेते हैं।
लेकिन दवा नहीं खाते है जो बीमारी होने पर उनके लिए ही जिंदगी भर सहना पड़ेगा। फाइलेरिया की दवा पूर्णतः सुरक्षित है। कुछ लोगों को सिर दर्द ,बदन दर्द ,पेट में दर्द की शिकायत होती है, जो शरीर मे माइक्रोफाइलेरिया या कृमि के परजीवी होने के कारण हो सकता है। दवाई खाने के बाद परजीवी मरता है। परिणाम स्वरूप रिएक्शन होता है। ये साइड इफेक्ट दिखता है। कोई भी गोली खाने से जी मिचलाता है। विशेष परिस्थिति के लिए स्वास्थ्य कार्यकर्ता, सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी की रैपिड रिस्पॉन्स टीम की गठन भी की गई है। परेशानी होने पर 104 पर भी फोन करके परामर्श ली जा सकती है। बूथ में और घर में दवाई नहीं खा पाएंगे उन्हें मापअप राउंड चला कर छुटे हुए लोगों को खोज खोज कर आईडीए की दवाई खिलाई जाएगी। एलबेंडाजोल की गोली को वर्ष में 2 बार अगस्त और फरवरी में दी जाती है, लेकिन फाइलेरिया नाशक दवाई की वर्ष में एक बार ही दी जानी होती है। तीनों दवाई की कंपोजिशन इस बीमारी को नष्ट करने में सहायक है। स्कूल के बच्चो की टीएएस एक प्रकार की जांच है, जिससे पता लगाया जाता है बच्चे में फाइलेरिया के परजीवी है कि नहीं। समुदाय को फाइलेरिया रोधी दवाई खाना जरूरी हो गया है।
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