छत्तीसगढ़

चुनाव आयोग ने राष्ट्रीय गोंड़वाना पार्टी को जारी किया नोटिस

Shantanu Roy
27 Sept 2025 11:46 PM IST
चुनाव आयोग ने राष्ट्रीय गोंड़वाना पार्टी को जारी किया नोटिस
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Bilaspur. बिलासपुर। भारत निर्वाचन आयोग ने छत्तीसगढ़ की राजनीतिक हलचल को और तेज कर दिया है। आयोग ने राजनीतिक दल के रूप में पंजीकृत राष्ट्रीय गोंड़वाना पार्टी को गंभीर आरोपों के चलते शो-कॉज नोटिस जारी किया है। पार्टी अध्यक्ष को निर्देशित किया गया है कि वे 9 अक्टूबर 2025 को आवश्यक दस्तावेजों के साथ मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी (सीईओ) कार्यालय, रायपुर में उपस्थित होकर अपना पक्ष रखें। आयोग द्वारा जारी नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि राष्ट्रीय गोंड़वाना पार्टी पर लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धाराओं का पालन नहीं करने के आरोप लगे हैं।

आयोग का कहना है कि प्रत्येक राजनीतिक दल को अधिनियम में निर्धारित नियमों और दायित्वों का पालन करना आवश्यक है, जिसमें पार्टी की वित्तीय पारदर्शिता, वार्षिक रिपोर्टिंग, सदस्यता का रिकॉर्ड, और अन्य वैधानिक दायित्व शामिल हैं। आयोग के दस्तावेजों के अनुसार, राष्ट्रीय गोंड़वाना पार्टी का आधिकारिक पता “अध्यक्ष, राष्ट्रीय गोंड़वाना पार्टी, सरखेल हाऊस, तिफरा, बिलासपुर” दर्ज है। नोटिस इसी पते पर भेजा गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पार्टी आरोपों का संतोषजनक उत्तर देने में असफल रहती है तो निर्वाचन आयोग कठोर कार्रवाई कर सकता है। इसमें पार्टी की मान्यता पर सवाल उठना या चुनाव चिह्न से संबंधित अधिकारों पर रोक लगना जैसी संभावनाएं भी शामिल हैं।

छत्तीसगढ़ में गोंड़वाना पार्टी का आधार मुख्य रूप से आदिवासी क्षेत्रों में माना जाता है। इस पार्टी का प्रभाव कुछ विधानसभा क्षेत्रों में देखा जाता रहा है। ऐसे में निर्वाचन आयोग की इस कार्रवाई से पार्टी के भविष्य पर बड़ा असर पड़ सकता है। राजनीतिक हलकों में यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या पार्टी आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत कर आयोग को संतुष्ट कर पाएगी या फिर उसे किसी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। पार्टी अध्यक्ष से अब आयोग ने सीधे तौर पर जवाब मांगा है और व्यक्तिगत रूप से सुनवाई में शामिल होने का निर्देश दिया गया है। आयोग की इस सख्ती से अन्य राजनीतिक दलों को भी यह संदेश गया है कि अधिनियम के प्रावधानों का पालन अनिवार्य है और लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यह मामला केवल एक पार्टी तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि अन्य पंजीकृत राजनीतिक दलों के लिए भी यह एक चेतावनी की तरह देखा जा रहा है।
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