छत्तीसगढ़

अंबिकापुर सहकारी बैंक घोटाले में ED की जांच शुरू

Shantanu Roy
23 Jun 2026 8:20 PM IST
अंबिकापुर सहकारी बैंक घोटाले में ED की जांच शुरू
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छग
Raipur. रायपुर। जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित अंबिकापुर की शंकरगढ़, कुसमी, रामानुजगंज और रामचंद्रपुर क्षेत्र की समितियों में सामने आई वित्तीय अनियमितताओं के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने जांच शुरू कर दी है। इस कार्रवाई का कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2020-21 से 2023-24 के बीच यह वित्तीय गड़बड़ियां हुई हैं और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। जानकारी के अनुसार, इन समितियों में हुई अनियमितताओं के कारण सैकड़ों किसानों को समय पर नकद ऋण, खाद और बीज नहीं मिल पा रहे थे, जिससे किसानों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। इस कारण ग्रामीण क्षेत्रों में असंतोष की स्थिति भी बनी रही।

प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार और बैंक प्रशासन ने पहले ही दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। इसके साथ ही कई कर्मचारियों को निलंबित किया गया है और मामले की विभागीय जांच भी जारी है। प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि प्रभावित शाखाओं से जुड़े लगभग 497 किसानों की शिकायतों में 30 करोड़ 51 लाख रुपये से अधिक की वित्तीय अनियमितता पाई गई है। सरकार ने किसानों को राहत देने के लिए तत्काल कार्ययोजना तैयार की है। संबंधित समितियों को पात्र किसानों की सूची तैयार कर मुख्यालय भेजने के निर्देश दिए गए हैं। सूची प्राप्त होने के बाद ऋण स्वीकृति और वितरण की प्रक्रिया तेज कर दी गई है, ताकि किसानों को कृषि कार्यों के लिए आवश्यक खाद, बीज और अन्य सुविधाएं समय पर मिल सकें।

कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने कहा कि राज्य सरकार की प्राथमिकता किसानों को हर संभव सुविधा उपलब्ध कराना और उनकी कृषि गतिविधियों को बिना रुकावट जारी रखना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी प्रकार की वित्तीय अनियमितता या भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। किसानों के हितों के साथ खिलवाड़ करने वालों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। मंत्री ने यह भी कहा कि इस पूरे मामले की जांच ईडी द्वारा की जा रही है, जिसका वे स्वागत करते हैं। उनका कहना है कि निष्पक्ष जांच से पूरे प्रकरण की सच्चाई सामने आएगी और दोषियों को किसी भी स्थिति में बख्शा नहीं जाएगा।

सरकारी स्तर पर की गई कार्रवाई और खाद-बीज वितरण व्यवस्था को पुनः शुरू करने के फैसले से प्रभावित क्षेत्रों के किसानों में राहत देखी जा रही है। किसानों को अब समय पर कृषि सामग्री मिलने लगी है, जिससे आगामी खेती सीजन की तैयारियां फिर से गति पकड़ रही हैं। अधिकारियों के अनुसार सहकारी समितियों की कार्यप्रणाली को पारदर्शी बनाने और भविष्य में ऐसी अनियमितताओं को रोकने के लिए नई निगरानी व्यवस्था भी तैयार की जा रही है। साथ ही, किसानों की शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए विशेष मॉनिटरिंग सिस्टम लागू करने की योजना पर भी काम चल रहा है। इस पूरे मामले ने सहकारी बैंकिंग व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े किए हैं। प्रशासन अब इस दिशा में सुधारात्मक कदम उठा रहा है ताकि किसानों को किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
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