छत्तीसगढ़

न्यूज पोर्टल शुरू कर 5000 से 50000 तक प्रति माह कमाएं...

Admin2
3 Dec 2020 11:52 AM IST
न्यूज पोर्टल शुरू कर 5000 से 50000 तक प्रति माह कमाएं...
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व्यवसाय के सकारात्मक पहलु छोड़ कर नकारात्मक तरीके अपना रहे संचालक

अतुल्य चौबे

रायपुर। भारत में वर्तमान समय में इंटरनेट का विस्तार बड़ी तेजी से हो रहा है , और इसी विकास के जरिए आमदनी का विकल्प या स्थाई स्त्रोत इंटरनेट को बनाया जा सकता है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के डिजीटल भारत के सपनों के कारण देश में इंटरनेट का विस्तार द्रुतगति से हो रहा है. जनमानस की आदत में स्मार्टफोन लाईफस्टाईल बस रही है, इसी कारण मीडिया भी डिजीटल स्वरुप में तेजी से फल-फूल रहा है. मीडिया की यहीं प्रगति उसके वैश्विक होने का प्रमाण तो है ही साथ में पत्रकारिता के विस्तार में बेहतरीन आमदनी का विकल्प भी है.

भारत में पत्रकारों की आर्थिक स्थिति के विश्लेषण में कई चौकानें वाले तथ्य सामने आएं है जैसे कि-

60त्न से अधिक पत्रकार मध्यम वर्ग में भी नहीं आते है.

आर्थिक स्थिति कमजोर होने से पीत पत्रकारिता की ओर कदम बढ़ रहे है.

आय के अन्य विकल्प नहीं होनें से परिवार की स्थिति भी कमजोरतम हो जाती है.

समाचार संस्थानों में वेतन भी कम और नियमीत न हो पाने के कारण आर्थिक विषमताएँ पत्रकारिता में व्यापत है.

85त्न पत्रकार कार्य की समय सीमा नहीं होने से, कमजोर आर्थिक स्थिति के कारण भी अवसाद ग्रस्त हो रहे है.

आखिर क्यों पत्रकार स्वयं को समय के साथ अपग्रेड नहीं कर पा रहें है?

अपग्रेड करना ही समय की आवश्यकता है.

वर्तमान युग में मीडिया का डिजीटल स्वरुप पाठकों को भी सुविधाजनक है.

खबरों को तुरन्त पाठकों तक विश्वसनियता के साथ पहुँचाना ही वास्तविक कार्य है.

अब हम बात करते है आय के स्त्रोत कि, क्य़ोंकि 'बीना अर्थ के सब व्यर्थ है

भारत में आज के दौर में ही 24 घंटे चलने वाले सैकड़ों न्यूज चैनल या आज की खबर कल प्रकाशित करने वाले दैनिक अखबार का विकल्प डिजीटल मीडिया होता जा रहा है. एसोचैम की रिपोर्ट के अनुसार सन् 2018 तक भारत में इंटरनेट उपभोक्ताओं की संख्या लगभग 750 मिलीयन हो जाएगी. मतलब लगभग 65 फिसदी आबादी इंटरनेट से जुड़ चुकी होगी, ऐसे दौर में डिजीटल मीडिया या कहें वेब पत्रकारिता बेहतरीन और उज्जवल भविष्य़ के साथ-साथ उत्कृष्ट आय का स्त्रोत है.

डिजीटल मीडिया में आय के स्त्रोत

1. ब्लाग

निशुल्क क्चद्यशद्दह्यश्चशह्ल पर मिलनें वाला नाम, जहाँ आप अपना कंटेटं प्रकाशित करके प्रसिद्ध पा सकते है साथ ही गूगल एडसेंस से आय भी प्राप्त भी कर सकते है, किन्तु इससे प्राप्त आय बहुत कम होती है.

2. सोशल मीडिया

सोशल मीडिया प्लेटफार्म जैसे फेसबुक,व्हाटसअप आदी पर भी समाचार सेवाएँ उपलब्ध करवा कर आमदनी की जा सकती है.

3. वेब न्यूज पोर्टल

वेबपोर्टल हेतु एक उपलब्ध नाम चुन कर उसका वेब पोर्टल बनवा कर असीमित आय का स्त्रोत तैयार किया जा सकता है. पोर्टल पर शासकिय एड,निजी एड, ्रद्घद्घद्बद्यद्बड्डह्लद्ग द्वड्डह्म्द्मद्गह्लद्बठ्ठद्द, कंटेंट सेल, प्रमोशन आदि विकल्पों से 5000/- से लाखों रुपये मासिक कमाएं जा सकते है. वेब पोर्टल एक बेहतरीन विकल्प है, बतौर सम्पादक आप प्रसिद्धि भी प्राप्त कर सकते है. साथ ही विश्व भर में अपने संवाददाताओं की टीम तैयार कर सकते है. विडीयों बुलेटिन के माध्यम से भी खबरें प्रकाशित कर सकते है.

4. यू-ट्यूब चैनल

यू-ट्यूब चैनल के माध्यम से भी विडीयों प्रसारित करके आय प्राप्त की जा सकती है.

5. मोबाईल एप्प

एंड्रोइड या अन्य आपरेटिंग सिस्टम पर मोबाईल एप बनवा कर उसपर भी एड लिए जा सकते है.

उपरोक्त विकल्पों के अलावा और भी कई मार्ग है डिजीटल दुनिया में प्रवेश के जिनसे आय प्राप्त की जा सकती है , परन्तु इन सब में वेब पोर्टल बेहतर है ।

कैसे न्यूज पोर्टल से पैसे कमा सकते है-

एडसेंस

एफीलेट मार्केटिंग

कंटेंट सेलिंग

निजी एड

शासकिय एड....आदि

न्यूज़ पोर्टल बनवाने के लाभ

आपका खबरों की दुनिया में दखल होगा

सामाजिक सुधारों के मुद्दों को मीडिया के माध्यम से प्रसारित कर पाएंगें

बतौर सम्पादक आपकी पहचान में अभिवृद्धि होगी

शासकीय कार्यों में आपका वर्चस्व

अतिरिक्त आय के स्त्रोत बनेंगे

मासिक खर्चों की पुर्ति हेतु विकल्प रहेगा (गूगल से प्राप्त आय से)

देशभर में आपका परिचय क्षेत्र बनेगा...आदि।

न्यूज पोर्टल की कानूनन मान्यता

सुचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने वेबसाइटों पर विज्ञापन के लिए एजेंसियों को सूचीबद्ध करने एवं दर तय करने की खातिर दिशानिर्देश और मानदंड तैयार तो किए हैं ताकि सरकार की ऑनलाइन पहुंच को कारगर बनाया जा सके और एक बयान भी दिया जिसमे यहां कहा गया कि दिशानिर्देशों का उद्देश्य सरकारी विज्ञापनों को रणनीतिक रूप से हर महीने सर्वाधिक विशिष्ट उपयोगकर्ताओं वाले वेबसाइटों पर डालकर उनकी दृश्यता बढ़ाना है। नियमों के अनुसार, विज्ञापन एवं दृश्य प्रचार निदेशालय (डीएवीपी) सूचीबद्ध करने के लिए भारत में निगमित कंपनियों के स्वामित्व एवं संचालन वाले वेबसाइटों के नाम पर विचार करेगा। हालांकि विदेशी कंपनियों के स्वामित्व वाली वेबसाइट को इस स्थिति में सूचीबद्ध किया जाएगा कि उन कंपनियों का शाखा कार्यालय भारत में कम से कम एक साल से पंजीकृत हो एवं संचालन कर रहा हो।

आइए जानते हैं क्या हैं शर्तें

विज्ञापन उन्हीं को दिया जाएगा जो वेबमीडिया और पोर्टल कम से कम 3 साल से चल रहे हों।

ऐसे वेबसाइट और पोर्टल जिनके दर का निर्धारण केंद्र सरकार के ष्ठ्रङ्कक्क से किया गया हो।

वेबमीडिया और पोर्टल राज्य के जनसंपर्क विभाग में रजिस्टर्ड होना चाहिए।

विज्ञापन मान्यता के आवेदन के लिए वेबसाइट-पोर्टल को अपना रजिस्ट्रेशन सूचना एवं जनसंपर्क निदेशालय में कराना होगा।

विज्ञापन वितरण के उद्देश्य से वेब माध्यमों को 3 कैटगरी में बांटा जाएगा।

सरकारी विज्ञापन उसी वेबसाइट और पोर्टल को दिया जाएगा, जिसके पास हर महीने कम से कम ढाई लाख ॥ढ्ढञ्ज आते हों।

गणना के लिए पिछले 6 महीने का रिकार्ड देखा जाएगा।

इसके लिए भारत में वेबसाइट ट्रैफिक मॉनीटरिंग करने वाली कंपनी के रिकार्ड मान्य होंगे।


छत्तीसगढ़ में न्यूज पोर्टल की बाढ़, प्लेटफार्म का वसूली ब्लैकमेलिंग के इस्तेमाल

प्रदेश में भाजपा सरकार से जुड़े और उपकृत अधिकारी-नेताओं ने शार्टकट कमाई का नया रास्ता निकाल लिया है। हर्रा लगे न फिटकिरी रंग चोखा के कहावत को सरकार में बैठे नेताओं और मंत्रियों के चहेतों के साथ पूर्ववर्ती भाजपा सरकार के मुंह लगे अधिकारी और नेताओं को विभाग में बैठे अधिकारी सरकार के जनसंपर्क फंड को लुटाने के लिए नई सरकार के शपथ के साथ ही वेबपोर्टलों के लिए खजाना खोल दिया है। भ्रष्ट अधिकारियों ने अपनी ऊपरी कमाई का जरिया बनाए रखने के लिए दोनों पार्टियों के नेताओं और अधिकारियों के बेटे-बेटियों को वेबपोर्टल खोलने की सलाह देकर पत्रकार बनवा दिया और आसानी से कम खर्च में लाखों करोड़ों की कमाई का जरिया लांच कर दिया। इनपेनलमेंट कमेटी में शामिल लोगों को भी नहीं मालूम की वेबपोर्टल का आरएनआई में रजिस्ट्रेशन कराना आवश्यक है। सरकारी विज्ञापन की बाध्यता भी प्रिंट मीडिया की तरह नहीं है। फिर भी मनमर्जी के वेबपोर्टल को धड़ाधड़ लाखों के विज्ञापन जारी कर रहे है। अखबार में 60-40 के रेसो के साथ प्रसार संख्या के आधार पर विज्ञापन दिया जाता है, लेकिन छत्तीसगढ़ में उल्टा बांस बरेली वाला खेल चल रहा है। प्रदेश में दौड़ रहे अधिकांश वेबपोर्टल आरएनआई में न रजिस्टर्ड है और न ही गूगल एनालेस्टिक में यूजर में उनकी गुणवत्ता क्राइटेरिया में है, फिर भी पोर्टलवालों को सरकार में बैठे भ्रष्टअधिकारी एक वर्ग विशेष को लाभ पहुंचाने पूरे प्रदेश में वेबपोर्टलों का अंबार लगवा दिया है। जो आने वाले सालों में ब्लेक मेलिंग के धंधे के रूप में परिवर्तित हो जाएगा। प्रदेश में अब तो कुकुरमुत्ते की तरह वेबपोर्टल मोबाइल पर चल रहे है और अधिकारियों की मिली भगत से लाखों की कमाई कर रहे है। मार्केट में कम्प्यूटर आईटी इंजीनियरों और साफ्टवेयर का काम करने वालों से 5 से 15 हजार में वेबपोर्टल बनाकर सरकार से हर महीने 50 से एक लाख तक विज्ञापन लेकर सरकारी धन में डाका डाल रहे है।

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