छत्तीसगढ़

दुर्ग पुलिस हुई हाईटेक, 11 हजार से ज्यादा बायोमेट्रिक रिकॉर्ड दर्ज

Shantanu Roy
20 Oct 2026 3:48 PM IST
दुर्ग पुलिस हुई हाईटेक, 11 हजार से ज्यादा बायोमेट्रिक रिकॉर्ड दर्ज
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Durg. दुर्ग। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में अपराधों की जांच को अधिक प्रभावी और तकनीकी रूप से मजबूत बनाने के लिए पुलिस ने नई पहल की है। अपराधियों और संदिग्धों की पहचान में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करते हुए पुलिस बायोमेट्रिक और फिंगरप्रिंट रिकॉर्ड का डिजिटल डाटाबेस तैयार कर रही है। अब तक मेजरमेंट कलेक्शन यूनिट (MCU) में 2,153 और नेशनल ऑटोमेटेड फिंगरप्रिंट आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (NAFIS) में 8,963 रिकॉर्ड दर्ज किए जा चुके हैं। इस तरह दोनों व्यवस्थाओं में कुल 11,116 प्रविष्टियां दर्ज हो चुकी हैं। इस पहल का उद्देश्य आपराधिक मामलों की जांच में तेजी लाना और घटनास्थल से मिले साक्ष्यों के आधार पर संदिग्धों की पहचान को आसान बनाना है।

अपराधियों की पहचान के लिए डिजिटल रिकॉर्ड तैयार
दुर्ग पुलिस आपराधिक गतिविधियों में शामिल रहे व्यक्तियों, चाकूबाजी और अन्य गंभीर मामलों में संलिप्त बदमाशों का निर्धारित नियमों के अनुसार बायोमेट्रिक रिकॉर्ड तैयार कर रही है। इस प्रक्रिया में संबंधित व्यक्तियों के फिंगरप्रिंट और अन्य निर्धारित माप दर्ज किए जा रहे हैं। इन जानकारियों को डिजिटल रूप में सुरक्षित रखा जा रहा है, ताकि भविष्य में किसी आपराधिक घटना की जांच के दौरान आवश्यकता पड़ने पर उनका उपयोग किया जा सके। पुलिस का मानना है कि तकनीकी साक्ष्यों का व्यवस्थित रिकॉर्ड होने से अपराधों की जांच में महत्वपूर्ण सहायता मिल सकती है।

कंट्रोल रूम सेक्टर-6 में शुरू हुई व्यवस्था
इस व्यवस्था को दुर्ग के कंट्रोल रूम सेक्टर-6 में शुरू किया गया है। यहां बायोमेट्रिक और फिंगरप्रिंट से संबंधित रिकॉर्ड एकत्र किए जा रहे हैं। पुलिस की इस पहल से चोरी, लूट, हत्या, चाकूबाजी और अन्य गंभीर अपराधों की जांच में मदद मिलने की संभावना है। घटनास्थल से प्राप्त फिंगरप्रिंट का पुराने रिकॉर्ड से मिलान कर संदिग्ध व्यक्तियों की पहचान की पड़ताल की जा सकेगी।

एक ही अपराधी की कई वारदातों में भूमिका का मिल सकता है सुराग
कई बार अलग-अलग स्थानों पर हुई आपराधिक घटनाओं में एक ही व्यक्ति की संलिप्तता की संभावना होती है। ऐसे मामलों में घटनास्थल से प्राप्त फिंगरप्रिंट महत्वपूर्ण साक्ष्य साबित हो सकते हैं। यदि अलग-अलग घटनाओं में मिले फिंगरप्रिंट का मिलान होता है, तो पुलिस यह जांच कर सकती है कि उन घटनाओं के बीच कोई संबंध है या नहीं। इससे संबंधित मामलों में संदिग्धों की भूमिका और अपराध के तरीके को समझने में सहायता मिल सकती है। हालांकि, फिंगरप्रिंट का मिलान होने के बाद भी अन्य साक्ष्यों के आधार पर जांच करना आवश्यक होगा।

जांच में लगने वाला समय हो सकता है कम
अपराधों की जांच के दौरान कई बार पुलिस को आरोपियों की पहचान करने में काफी समय लग जाता है। घटनास्थल पर पर्याप्त जानकारी नहीं मिलने से जांच प्रभावित हो सकती है। ऐसी परिस्थितियों में पहले से उपलब्ध बायोमेट्रिक और फिंगरप्रिंट रिकॉर्ड उपयोगी साबित हो सकते हैं। डिजिटल डाटाबेस की सहायता से साक्ष्यों का मिलान कर पुलिस जांच की दिशा तय कर सकती है। इससे अपराधियों की पहचान से जुड़े नए सुराग मिलने और जांच प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

सीसीटीवी और मोबाइल साक्ष्यों की भी अहम भूमिका
अपराधों की जांच में फिंगरप्रिंट के अलावा सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से मिले साक्ष्य भी महत्वपूर्ण होते हैं। इन साक्ष्यों की जांच अलग-अलग तकनीकी प्रक्रियाओं के माध्यम से की जाती है। वहीं, MCU और NAFIS का उपयोग मुख्य रूप से निर्धारित माप, बायोमेट्रिक और फिंगरप्रिंट रिकॉर्ड के लिए किया जाता है। दुर्ग पुलिस की इस पहल से भविष्य में आपराधिक घटनाओं की जांच में तकनीकी साक्ष्यों का बेहतर उपयोग हो सकेगा। साथ ही अपराधों की गुत्थी सुलझाने में पुलिस को अतिरिक्त सहायता मिलने की संभावना है।
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