छत्तीसगढ़
CG में SIR के चलते रायपुर–बलौदाबाजार में 5 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम कटे
Shantanu Roy
23 Dec 2025 6:06 PM IST

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छग
Raipur. रायपुर। छत्तीसगढ़ में मतदाता सूची को शुद्ध और त्रुटिरहित बनाने के उद्देश्य से चुनाव आयोग द्वारा चलाए जा रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के पहले चरण का कार्य सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। इस अभियान के तहत रायपुर की सात विधानसभा क्षेत्रों समेत बलौदाबाजार विधानसभा में कुल 5 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं। चुनाव आयोग के अनुसार, ये नाम फर्जी, डुप्लिकेट, स्थानांतरित या अप्रासंगिक पाए गए थे।
रायपुर सबसे ज्यादा प्रभावित
SIR अभियान के पहले चरण में सबसे अधिक असर रायपुर जिले में देखने को मिला है। जिले की सात विधानसभा क्षेत्रों में कुल 5 लाख 11 हजार 136 मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए। आयोग द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक इनमें
23,180 मतदाता अनट्रेसेबल या लंबे समय से अनुपस्थित पाए गए,
3,87,330 मतदाता ऐसे थे जो अपना निवास स्थान बदल चुके हैं,
14,311 नाम पहले से ही अन्य स्थानों पर दर्ज (डुप्लिकेट) थे,
जबकि 2,313 नाम अतिरिक्त या नियमों के अनुरूप नहीं पाए गए।
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि जिन मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, वे दावा-आपत्ति प्रक्रिया के तहत अपने दस्तावेज प्रस्तुत कर नाम दोबारा जुड़वा सकते हैं। इसके लिए 31 दिसंबर तक आवेदन किया जा सकता है।
2023 विधानसभा चुनाव के बाद शुरू हुआ अभियान
यह विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान 2023 के विधानसभा चुनावों के बाद शुरू किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची को 100 प्रतिशत सटीक बनाना और फर्जी मतदान की संभावनाओं को समाप्त करना है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी के अनुसार, पहले चरण में रायपुर, धमतरी, बिलासपुर सहित कुल 8 विधानसभा क्षेत्रों पर विशेष फोकस किया गया। अधिकारी ने बताया कि रायपुर जिले में कुल लगभग 22 लाख मतदाता पंजीकृत हैं, जिनमें से करीब 23 प्रतिशत नामों पर SIR के तहत कार्रवाई की गई है। यह आंकड़ा शहरी क्षेत्रों में तेजी से बढ़ती आबादी, माइग्रेशन और अस्थायी निवास की प्रवृत्ति को भी दर्शाता है।
राजनीतिक हलचल, विपक्ष ने उठाए सवाल
SIR ड्राफ्ट मतदाता सूची के प्रकाशन और लाखों नाम हटाए जाने के बाद प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। इस मुद्दे पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि देश में कई तरह के राजनीतिक गठबंधन देखने को मिलते हैं, लेकिन “निर्वाचन आयोग और भाजपा के गठबंधन” को लेकर उनके मन में सवाल हैं। भूपेश बघेल ने सीधे सवाल उठाते हुए कहा कि मतदाता सूची से हटाए गए लोगों में कितने रोहिंग्या हैं और कितने बांग्लादेशी। उन्होंने यह भी कहा कि यदि नाम काटे जा रहे हैं तो पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता होनी चाहिए और जनता को स्पष्ट जानकारी दी जानी चाहिए कि किन आधारों पर नाम हटाए गए हैं।
आयोग का पक्ष: कोई वास्तविक मतदाता वंचित नहीं होगा
चुनाव आयोग ने विपक्ष के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि SIR अभियान पूरी तरह नियमों और कानून के दायरे में किया जा रहा है। आयोग का दावा है कि कोई भी वास्तविक और पात्र मतदाता मतदान के अधिकार से वंचित नहीं होगा। जिनके नाम गलती से कटे हैं, उन्हें दावा-आपत्ति प्रक्रिया के जरिए पूरा अवसर दिया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, ड्राफ्ट और फाइनल मतदाता सूची, साथ ही दावा-आपत्ति की स्थिति आयोग की वेबसाइट पर अपलोड की जाएगी और राजनीतिक दलों के साथ भी साझा की जाएगी। इसके अलावा, ERO (निर्वाचन रजिस्ट्रीकरण अधिकारी) के फैसले के खिलाफ जिला मजिस्ट्रेट और फिर मुख्य निर्वाचन अधिकारी के पास अपील का प्रावधान भी मौजूद है।
आगे के चरणों पर नजर
SIR अभियान का यह केवल पहला चरण है। आने वाले चरणों में राज्य के अन्य जिलों और विधानसभा क्षेत्रों में भी इसी तरह का गहन पुनरीक्षण किया जाएगा। चुनाव आयोग का कहना है कि इस प्रक्रिया से मतदाता सूची अधिक मजबूत, पारदर्शी और भरोसेमंद बनेगी, जिससे आगामी चुनावों में निष्पक्षता सुनिश्चित की जा सकेगी। छत्तीसगढ़ में SIR अभियान को लेकर जहां प्रशासन इसे लोकतंत्र को मजबूत करने की दिशा में जरूरी कदम बता रहा है, वहीं विपक्ष इसे संदेह की नजर से देख रहा है। आने वाले दिनों में दावा-आपत्ति प्रक्रिया और उसके परिणाम इस पूरे विवाद की दिशा तय करेंगे।
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