छत्तीसगढ़
जहरीली कफ सिरप मामले में औषधि प्रशासन की सख्त कार्रवाई, 18 मेडिकल स्टोर्स में छापेमारी
Shantanu Roy
13 Oct 2025 12:35 AM IST

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Mahasamund. महासमुंद। जिले में औषधि प्रशासन विभाग ने बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए जहरीली कफ सिरप को लेकर जिले के 18 मेडिकल स्टोर्स में छापेमारी की है। विभाग ने इस दौरान चार दवा सैंपल जांच के लिए रायपुर स्थित औषधि परीक्षण प्रयोगशाला भेजे हैं। मालूम हो कि मध्यप्रदेश और राजस्थान में जहरीली कफ सिरप पीने से 20 से अधिक बच्चों की मौत हो चुकी है। इसके बाद सरकार ने इस दवा के फॉर्मूले पर प्रतिबंध लगाते हुए दो वर्ष से कम उम्र के बच्चों को कफ सिरप देने पर रोक लगा दी थी। हालांकि, महासमुंद जिले में यह सिलसिला जारी था। कई मेडिकल स्टोर्स में बिना डॉक्टर की पर्ची और बिना जांच के बच्चों को कफ सिरप बेचा जा रहा था।
औषधि प्रशासन की कार्रवाई
सूचना मिलने के तुरंत बाद औषधि प्रशासन ने जिले में सघन निरीक्षण अभियान चलाया। दिन भर चले इस अभियान के दौरान 18 मेडिकल स्टोर्स की जांच की गई। निरीक्षण के दौरान विभाग ने विशेष रूप से प्रतिबंधित फॉर्मूले वाले कफ सिरप की बिक्री की पड़ताल की। विभाग की सहायक नियंत्रक एडीसी तृप्ति जैन ने बताया कि बिना डॉक्टर की पर्ची किसी को भी दवा न दी जाए। प्रदेश में सभी जिलों से कुल 72 औषधि निरीक्षक जुड़े हैं, और उनके द्वारा लिए गए सैंपल रायपुर स्थित प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजे गए हैं।
जांच में लिए गए सैंपल
जाँच के दौरान कुल चार सैंपल लिए गए, जिनमें:
तीन कफ सिरप के सैंपल
एक पैनडर्म क्रीम का सैंपल
सभी सैंपल औषधि परीक्षण प्रयोगशाला रायपुर में भेजे गए हैं। रिपोर्ट आने के बाद ही इस मामले में आगे की कार्रवाई तय होगी।
विभाग की एडवाइजरी
औषधि प्रशासन ने सभी मेडिकल स्टोर्स संचालकों को सख्त चेतावनी दी है कि बिना डॉक्टर की पर्ची के किसी भी दवा की बिक्री न की जाए, खासकर बच्चों को देने वाली दवाओं में। विभाग ने स्पष्ट किया कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
बच्चों की सुरक्षा के लिए जागरूकता
इस कार्रवाई के माध्यम से औषधि विभाग ने यह संदेश दिया है कि बच्चों की जान और सुरक्षा सर्वोपरि है। विभाग ने मेडिकल स्टोर्स, अभिभावकों और जनता से अपील की है कि केवल प्रमाणित डॉक्टर की सलाह के बाद ही दवा लें और बच्चों को किसी भी प्रतिबंधित दवा का सेवन न कराएँ। प्रदेश में कुल 72 औषधि निरीक्षक जुड़े हैं और सभी जिलों में समान अभियान चलाया जा रहा है। इससे बच्चों में होने वाले स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों को कम करने और दवा सुरक्षा सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है।
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