छत्तीसगढ़

मुक्तिधाम का रास्ता बंद होने पर विवाद, प्रशासन ने खुलवाया मार्ग

Shantanu Roy
1 Oct 2026 3:43 PM IST
मुक्तिधाम का रास्ता बंद होने पर विवाद, प्रशासन ने खुलवाया मार्ग
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Takhatpur. तखतपुर। ग्राम पंचायत डोमनपुर में मुक्तिधाम तक पहुंचने वाले रास्ते को लेकर विवाद की स्थिति बन गई। निजी जमीन पर बाउंड्रीवाल किए जाने के कारण ग्रामीणों को शव को मुक्तिधाम तक ले जाने में परेशानी का सामना करना पड़ा। रास्ता बंद होने की जानकारी मिलने के बाद ग्रामीणों ने तहसीलदार और थाना प्रभारी से मदद की गुहार लगाई। प्रशासनिक अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद रास्ता खुलवाया गया और शव को मुक्तिधाम पहुंचाकर अंतिम संस्कार कराया गया। मामले की सूचना मिलते ही तहसीलदार शशांक शेखर शुक्ला, नायब तहसीलदार और थाना प्रभारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने ग्रामीणों और निजी भूमि स्वामी दोनों पक्षों से बातचीत की। स्थिति को देखते हुए तत्काल रास्ता उपलब्ध कराया गया, ताकि शव को अंतिम संस्कार के लिए मुक्तिधाम तक पहुंचाया जा सके।
ग्राम पंचायत के सरपंच प्रतिनिधि विजय जायसवाल ने बताया कि मुक्तिधाम तक जाने वाला यह रास्ता करीब 100 वर्षों से ग्रामीणों द्वारा उपयोग किया जा रहा है। ग्रामीण इसी रास्ते से निस्तारी और अंतिम संस्कार के लिए मुक्तिधाम तक पहुंचते रहे हैं। उनका आरोप है कि इस मार्ग पर समय-समय पर कब्जा कर बाउंड्रीवाल खड़ी कर दी जाती है, जिससे रास्ता बाधित हो जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में किसी व्यक्ति की मृत्यु होने पर ऐसी स्थिति बेहद कठिन हो जाती है। शव को मुक्तिधाम तक पहुंचाने के लिए यही परंपरागत रास्ता लंबे समय से इस्तेमाल किया जा रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि इस रास्ते को स्थायी रूप से निस्तारी मार्ग के रूप में खुला रखा जाए, ताकि भविष्य में किसी परिवार को अंतिम संस्कार के समय परेशानी का सामना न करना पड़े।
तहसीलदार शशांक शेखर शुक्ला ने बताया कि मुक्तिधाम से लगी जमीन निजी स्वामित्व की है। ग्रामीण लंबे समय से निजी जमीन से लगी परंपरागत मेड़ के रास्ते का उपयोग करते हुए मुक्तिधाम तक पहुंचते रहे हैं। भूमि स्वामी द्वारा रास्ते पर बाउंड्रीवाल किए जाने के बाद शव ले जाने का मार्ग बाधित हो गया था। उन्होंने बताया कि मामले की जानकारी मिलने पर प्रशासनिक टीम मौके पर पहुंची और दोनों पक्षों से चर्चा की गई। तत्कालीन परिस्थिति को देखते हुए शव को मुक्तिधाम तक पहुंचाने के लिए रास्ता उपलब्ध कराया गया। इसके बाद अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की जा सकी।
दूसरी ओर निजी जमीन के मालिक हितेश चंद्राकर ने प्रशासन की कार्रवाई पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि संबंधित जमीन उनकी निजी संपत्ति है। पूर्व में उनके खिलाफ बेजा कब्जा से संबंधित मामला चला था, जिसमें फैसला उनके पक्ष में आया था। हितेश चंद्राकर का आरोप है कि उन्हें किसी तरह की पूर्व सूचना दिए बिना ग्रामीणों और प्रशासनिक अमले ने उनकी जमीन पर बनाई गई बाउंड्रीवाल को तोड़कर रास्ता बनाया। उन्होंने कहा कि निजी संपत्ति से जुड़े मामले में नियमानुसार प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए और पूरे प्रकरण की विधिवत जांच होनी चाहिए।
प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद तत्काल स्थिति तो संभाल ली गई और शव का अंतिम संस्कार करा दिया गया, लेकिन मुक्तिधाम तक जाने वाले रास्ते का विवाद पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। एक ओर ग्रामीण इसे दशकों पुराना परंपरागत निस्तारी मार्ग बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर भूमि स्वामी निजी संपत्ति के अधिकार का दावा कर रहे हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से इस मामले का स्थायी समाधान निकालने की मांग की है। उनका कहना है कि मुक्तिधाम तक जाने के लिए स्पष्ट और निर्बाध रास्ता निर्धारित किया जाना जरूरी है, ताकि भविष्य में अंतिम संस्कार के समय किसी तरह का विवाद या परेशानी उत्पन्न न हो।
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